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Corporate Retreat: जब ऑफिस बन जाए ज़िंदा रहने की जंग

डार्क कॉमेडी जो कॉर्पोरेट रिट्रीट को सत्ता, महत्वाकांक्षा और पहचान के हॉरर में बदल देती है
Molly Se-kyung

Corporate Retreat आधुनिक कॉर्पोरेट दुनिया को केंद्र में रखकर एक साधारण-सी दिखने वाली कंपनी रिट्रीट को भयावह सर्वाइवल थ्रिलर में बदल देती है। ऐसे समय में जब बर्नआउट, परफॉर्मेंस प्रेशर और करियर को लेकर असुरक्षा पर खुलकर चर्चा हो रही है, यह फिल्म उस असहज सच्चाई को उजागर करती है कि नौकरी अब सिर्फ काम नहीं, बल्कि पहचान का हिस्सा बन चुकी है। और जब पहचान ही दांव पर लग जाए, तो असफलता एक व्यक्तिगत विनाश जैसा महसूस होती है।

कहानी एक टीम-बिल्डिंग ट्रिप से शुरू होती है, जिसका मकसद कर्मचारियों के बीच तालमेल बढ़ाना है। प्रतिभागी ट्रस्ट एक्सरसाइज़ में हिस्सा लेते हैं, मोटिवेशनल भाषण सुनते हैं और परफॉर्मेंस रिव्यू का सामना करते हैं। लेकिन सामूहिकता का यह मुखौटा जल्द ही उतर जाता है। अलग-थलग पड़ा यह माहौल धीरे-धीरे ऐसी जगह में बदल जाता है जहां सहयोग की जगह प्रतिस्पर्धा ले लेती है।

निर्देशक एरन फिशर ने केरी ली रोमियो के साथ मिलकर कहानी को इस तरह गढ़ा है कि डर किसी बाहरी खतरे से नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट संस्कृति के रोज़मर्रा के अनुष्ठानों से पैदा होता है। केपीआई, टार्गेट और ‘कॉर्पोरेट वेलनेस’ की भाषा यहां महज़ औपचारिकताएं नहीं, बल्कि नियंत्रण के औज़ार बन जाती हैं। Corporate Retreat दिखाती है कि महत्वाकांक्षा किस तरह प्रेरणा से आगे बढ़कर दबाव और हथियार में बदल सकती है।

फिल्म में एलन रक, ओडिया रश, एश्टन सैंडर्स, रोसाना आर्केट, साशा लेन, ज़ायन मोरेनो और टायलर अल्वारेज़ जैसे कलाकार नजर आते हैं। इनके किरदार कॉर्पोरेट सीढ़ी के अलग-अलग पायदानों का प्रतिनिधित्व करते हैं—उभरता हुआ युवा कर्मचारी, सतर्क पर्यवेक्षक, अनुभवी एग्जीक्यूटिव। जैसे-जैसे तनाव बढ़ता है, रिश्तों की परतें खुलती हैं और साथ काम करने की भावना की नाज़ुकता सामने आती है।

Corporate Retreat
Corporate Retreat

टोन और विज़ुअल शैली के लिहाज़ से फिल्म समकालीन हॉरर की उस धारा से जुड़ती है जो सामाजिक व्यंग्य और शारीरिक खतरे को मिलाती है। यहां डर सिर्फ खून-खराबे से नहीं, बल्कि पहचान से उपजता है। दर्शक आसानी से उस भाषा को पहचान लेते हैं जो उत्पादकता, लीडरशिप और पूर्ण समर्पण की मांग करती है।

Corporate Retreat का प्रदर्शन Brussels International Fantastic Film Festival में हुआ, जहां जॉनर सिनेमा को अक्सर सामाजिक टिप्पणी के रूप में पढ़ा जाता है। फैंटास्टिक फिल्मों के ये मंच अब आर्थिक और सांस्कृतिक सत्ता संरचनाओं पर चर्चा के अहम स्थल बन चुके हैं।

89 मिनट की अवधि के साथ फिल्म तेज़ रफ्तार बनाए रखती है, जो स्ट्रीमिंग युग की दर्शक आदतों के अनुरूप है। आज के बिखरे मीडिया परिदृश्य में सघन जॉनर फिल्में सिनेमाघरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों पर तेज़ी से अपनी जगह बना सकती हैं।

फिल्म का फोकस युवा प्रोफेशनल्स पर है, जो हाइब्रिड कामकाज और लगातार ऑनलाइन रहने वाली दुनिया में काम कर रहे हैं। निजी जीवन और पेशेवर पहचान के बीच की सीमाएं धुंधली हो चुकी हैं। Corporate Retreat पेशेवर असफलता को शारीरिक खतरे के रूप में रूपायित कर उस डर को और तीखा करती है—लगातार आंका जाना, बदला जाना या उजागर हो जाना।

हॉरर सिनेमा लंबे समय से सत्ता और व्यवस्था पर बात करने का माध्यम रहा है। वित्तीय संकट के बाद के दौर में कॉर्पोरेट भाषा खुद एक भयावह स्वर लेने लगी है। रिट्रीट, सेमिनार और लीडरशिप वर्कशॉप एकता का वादा करते हैं, लेकिन अक्सर भीतर छिपी प्रतिस्पर्धा को ढकते हैं। Corporate Retreat में यही तनाव कथा की धुरी बनता है।

जब पेशेवर महत्वाकांक्षा को ज़िंदा रहने की लड़ाई में बदल दिया जाता है, तो फिल्म काम, पहचान और जुड़ाव की कीमत पर चल रही व्यापक सांस्कृतिक बहस का हिस्सा बन जाती है। बोर्डरूम यहां किसी भूतिया हवेली की तरह सामूहिक असुरक्षाओं का प्रतीक बनकर उभरता है।

फिल्म का अंतरराष्ट्रीय प्रीमियर Brussels International Fantastic Film Festival में हुआ।

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