प्रौद्योगिकी

सिलिकॉन को अलविदा: चीन ने पेश किया ‘LightGen’, वो प्रोसेसर जो रोशनी से चलता है और Nvidia की बादशाहत को चुनौती देता है

AI की बिजली की भूख ने दुनिया को संकट में डाला, लेकिन अब प्रकाश पर आधारित नई तकनीक ने पारंपरिक चिप्स से 100 गुना ज्यादा दक्षता का वादा किया है।
Susan Hill

ग्लोबल टेक्नोलॉजी की दुनिया एक ऐसे संकट के मुहाने पर खड़ी है जिसके बारे में ज्यादा बात नहीं हो रही, लेकिन जो टलने वाला नहीं है। यह संकट जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की कभी न मिटने वाली भूख से पैदा हुआ है। जैसे-जैसे AI मॉडल खरबों पैरामीटर्स तक पहुंच रहे हैं, सिलिकॉन चिप्स पर हमारी पुरानी निर्भरता अब जवाब दे रही है। समस्या सिर्फ मॉडल्स को ट्रेन करने की नहीं है, बल्कि असली मुसीबत उनके रोज़ाना इस्तेमाल (Inference) में है—यानी जब हम और आप चैट करते हैं या वीडियो बनाते हैं। आज AI से महज एक हजार तस्वीरें बनाने में इतनी बिजली खर्च होती है, जितना एक पेट्रोल कार को छह किलोमीटर चलाने में लगती है। यह कड़वी सच्चाई अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) में हुई सारी प्रगति पर पानी फेर सकती है।

सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री एक ऐसी दीवार से टकरा गई है जिसे पार करना नामुमकिन लग रहा है: और वह है ‘गर्मी’ (Heat)। दशकों तक मूर के नियम (Moore’s Law) के सहारे हम ट्रांजिस्टर छोटे करके ताकत बढ़ाते रहे, लेकिन अब नैनोमीटर के स्तर पर पुराने इलेक्ट्रॉनिक तरीके फेल हो रहे हैं। तांबे और सिलिकॉन में इलेक्ट्रॉनों की भागदौड़ इतनी गर्मी पैदा करती है कि हार्डवेयर पिघल सकता है, जिसे ठंडा रखने के लिए विशालकाय कूलिंग सिस्टम चाहिए। ऊपर से, पुराना कंप्यूटर आर्किटेक्चर डेटा को प्रोसेसर और मेमोरी के बीच लाने-ले जाने में ही सारी ताकत गँवा देता है। अगर हमें एक सच्चे सुपर-इंटेलिजेंट AI (AGI) तक पहुंचना है, तो हमें इलेक्ट्रॉन को छोड़कर ‘फोटोन’ (प्रकाश) को अपनाना होगा।

यहीं पर ‘फोटोनिक कंप्यूटिंग’ एक जरूरी विकल्प बनकर उभरती है, जो कंप्यूटर के काम करने के बुनियादी तरीके को ही बदल देती है। इलेक्ट्रॉनिक चिप्स ट्रांजिस्टर को ऑन-ऑफ करते हैं जिससे गर्मी पैदा होती है, लेकिन ऑप्टिकल चिप्स रोशनी के गुणों का इस्तेमाल करते हैं। फोटोन का न तो वजन होता है और न ही उन पर कोई इलेक्ट्रिक चार्ज होता है, इसलिए वे बिना गर्मी पैदा किए सफर कर सकते हैं। इससे भारी-भरकम कूलिंग की जरूरत खत्म हो जाती है। साथ ही, ये प्रकाश के अलग-अलग रंगों का इस्तेमाल करके एक साथ कई डेटा स्ट्रीम को प्रोसेस कर सकते हैं, जो तांबे की तारों से मुमकिन ही नहीं था।

सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग के इतिहास में इसे एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है—शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी और सिंघुआ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ‘LightGen’ को दुनिया के सामने पेश किया है। विज्ञान जगत में हलचल मचाने वाले इस रिसर्च में बताया गया है कि यह पूरी तरह से ऑप्टिकल प्रोसेसर है, जो बड़े AI मॉडल्स को इतनी कुशलता से चला सकता है जितना सिलिकॉन चिप्स कभी नहीं कर सकते। प्रोफेसर चेन यितोंग की अगुवाई वाली टीम ने 3D पैकेजिंग तकनीक का इस्तेमाल करके सिर्फ 136.5 वर्ग मिलीमीटर की जगह में 20 लाख से ज्यादा फोटोनिक ‘न्यूरॉन्स’ फिट कर दिए हैं। यह कामयाबी ऑप्टिकल कंप्यूटिंग को प्रयोगशाला के एक प्रयोग से निकालकर हकीकत में बदल देती है।

LightGen की असली क्रांति तस्वीरों को टुकड़ों में तोड़ने के बजाय उन्हें ‘समग्र’ (Holistic) रूप में प्रोसेस करने की क्षमता है। Nvidia जैसे पारंपरिक GPU को किसी तस्वीर को समझने के लिए उसे हजारों छोटे टुकड़ों में तोड़ना पड़ता है, जिससे डेटा का असली मतलब खो जाता है और मेमोरी की बर्बादी होती है। इसके उलट, LightGen एक “ऑप्टिकल लेटेंट स्पेस” का उपयोग करता है। यह चिप प्रकाश को एनालॉग तरीके से लगातार मोड़कर पूरी दृश्य जानकारी को एक बार में प्रोसेस करती है। इससे डेटा की अखंडता बनी रहती है और कंप्यूटर विजन की रफ्तार बढ़ जाती है, जो पहले एनालॉग-टू-डिजिटल कन्वर्शन के कारण धीमी हो जाती थी।

लैब के नतीजे LightGen को सिलिकॉन के मौजूदा राज के लिए एक बड़ा खतरा बताते हैं। जटिल कार्यों में, जैसे कि इमेज जनरेशन और 3D रेंडरिंग, LightGen के प्रोटोटाइप ने Nvidia A100 GPU के मुकाबले 100 गुना से भी ज्यादा ऊर्जा दक्षता और रफ्तार दिखाई। हालाँकि Nvidia ने अब और भी ताकतवर Blackwell B200 चिप्स उतार दिए हैं, लेकिन लंबी दौड़ में भौतिक विज्ञान (Physics) प्रकाश के पक्ष में है: जहाँ सिलिकॉन गर्मी और देरी (Latency) से जूझ रहा है, वहीं फोटोनिक्स बिना गर्मी के और असीमित बैंडविड्थ के साथ काम करता है।

इस तरक्की को ‘चिप वॉर’ और चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता की रणनीति को समझे बिना नहीं देखा जा सकता। अमेरिका ने जब अत्याधुनिक लिथोग्राफी मशीनों (EUV) और GPU के निर्यात पर रोक लगाई, तो बीजिंग ने एक अलग रास्ता चुन लिया। LightGen ने साबित कर दिया है कि सिलिकॉन लिथोग्राफी की बाधाओं को पार किया जा सकता है: फोटोनिक चिप्स को बनाने के लिए बेहद सूक्ष्म (sub-nanometer) ट्रांजिस्टर की जरूरत नहीं होती, जिसका मतलब है कि पुरानी मशीनों से भी अत्याधुनिक एक्सीलरेटर बनाए जा सकते हैं। सिंघुआ के ACCEL चिप और क्वांटम कंप्यूटिंग के साथ मिलकर, चीन एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहा है जो पश्चिमी प्रतिबंधों को बेअसर कर सके।

रोशनी की ओर यह बदलाव सिर्फ चीन तक सीमित नहीं है, यह एक वैश्विक घटना है। यूरोप में भी मैटेरियल साइंस में बड़ी कामयाबी मिली है। एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसे मिश्र धातु (GeSn) को स्थिर करने में सफलता पाई है जो मौजूदा सिलिकॉन निर्माण प्रक्रियाओं के साथ तालमेल बिठाकर कुशलता से प्रकाश छोड़ सकते हैं। यह कदम इतिहास की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक को हल करता है: चिप के ऊपर ही सूक्ष्म लेजर और ऑप्टिकल कंपोनेंट्स बनाना। LightGen जैसे प्रोसेसर्स को बड़े पैमाने पर बाजार में लाने के लिए यह बेहद जरूरी है।

हालांकि, प्रयोगशाला से निकलकर बड़े पैमाने पर कमर्शियल उत्पादन तक का सफर चुनौतियों से भरा है। इन सिस्टम्स को बड़ा करने का मतलब है कि इन्हें शोर (noise) से बचाना होगा और लाखों ऑप्टिकल कंपोनेंट्स को एकदम सटीक बनाना होगा। सिलिकॉन इंडस्ट्री की परिपक्वता के मुकाबले फोटोनिक्स की फैक्ट्रीज अभी शुरुआती दौर में हैं, और Nvidia के पास अपने CUDA सॉफ्टवेयर का मजबूत किला है। विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि LightGen को तुरंत “Nvidia किलर” कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन अगर चीनी फैक्ट्रियां पश्चिमी नियंत्रण से बाहर रहकर इन निर्माण प्रक्रियाओं को महारत हासिल कर लेती हैं, तो कंप्यूटिंग पावर का वैश्विक संतुलन हमेशा के लिए बदल सकता है।

ब्रह्मांड के भौतिक नियमों से तय होने वाला कंप्यूटिंग का भविष्य ‘प्रकाश’ में लिखा हुआ नजर आता है। भले ही कुछ समय के लिए इलेक्ट्रॉनिक चिप्स बाजार पर राज करें, लेकिन AI की ऊर्जा खपत और एक समझदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मांग हमें ऑप्टिक्स की ओर धकेल रही है। LightGen इस बात का सबूत है कि सिलिकॉन का एकाधिकार हमेशा नहीं रहेगा, और हार्डवेयर की अगली बड़ी क्रांति शुरू हो चुकी है।

चर्चा

0 टिप्पणियाँ हैं।

```
?>