नाट्यशाला

“यस, मिनिस्टर” की वापसी: आधुनिक ‘कैंसल कल्चर’ और पुरानी नौकरशाही के बीच की आखिरी जंग

जोनाथन लिन के नए नाटक "आई एम सॉरी, प्राइम मिनिस्टर" में जिम हैकर और सर हम्फ्री एप्पलबी की जोड़ी एक बार फिर सत्ता के गलियारों से निकलकर आज की आधुनिक चुनौतियों का सामना कर रही है।
Martha Lucas

ब्रिटिश राजनीति पर आधारित विश्व प्रसिद्ध व्यंग्य श्रृंखला “यस, मिनिस्टर” के प्रशंसकों के लिए एक शानदार खबर है। जोनाथन लिन द्वारा लिखित और निर्देशित नया नाटक “आई एम सॉरी, प्राइम मिनिस्टर” अब लंदन के अपोलो थिएटर में मंचन के लिए तैयार है। यह नाटक जिम हैकर और सर हम्फ्री एप्पलबी की कालजयी जोड़ी को व्हाइटहॉल के सरकारी दफ्तरों से निकालकर ऑक्सफोर्ड के शैक्षणिक गलियारों में ले आता है। आज के पारदर्शी युग और ‘कैंसल कल्चर’ के बीच, यह शो यह परखता है कि क्या पुरानी पीढ़ी की सत्ता की चालें अब भी काम कर सकती हैं। अपनी तीखी कॉमेडी और सटीक राजनीतिक टिप्पणियों के साथ यह नाटक गूगल न्यूज़ और डिस्कवर पर छा जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

राजनीतिक व्यंग्य अक्सर समय के साथ अपना प्रभाव खो देते हैं क्योंकि वे अपने दौर की विशिष्ट समस्याओं से जुड़े होते हैं। लेकिन सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली—जिसमें जानकारी को चतुराई से छिपाना और रक्षात्मक पैंतरेबाजी शामिल है—आज भी वैसी ही बनी हुई है। यही निरंतरता “आई एम सॉरी, प्राइम मिनिस्टर” की कहानी को गति देती है। यह नाटक जिम हैकर की गाथा को आधुनिक शिक्षा जगत के तनावपूर्ण माहौल में ले जाता है, जहाँ यह देखा जा रहा है कि क्या सत्ता के पुराने हथकंडे इस पारदर्शी युग में भी टिक पाएंगे।

यह नई प्रस्तुति उस गाथा का अंतिम अध्याय है जिसने 1980 के दशक में शासन व्यवस्था के प्रति जनता के नज़रिए को पूरी तरह बदल दिया था। मूल टीवी श्रृंखला के सह-निर्माता जोनाथन लिन ने इस नाटक को व्हाइटहॉल से हटाकर ऑक्सफोर्ड के एक कॉलेज के बंद और कड़े माहौल में स्थापित किया है। ग्रिफ राइस जोन्स ने जिम हैकर की भूमिका निभाई है, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके पूर्व प्रधानमंत्री हैं। हैकर अब ऑक्सफोर्ड के हैकर कॉलेज के ‘मास्टर’ के रूप में एक शांत जीवन बिताने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, यह कहानी दिखाती है कि राजनीति से संन्यास लेने का मतलब सत्ता के संघर्ष से संन्यास लेना बिल्कुल नहीं है। हैकर खुद को एक बेहद आधुनिक संकट में पाते हैं, जहाँ छात्रों और कॉलेज के सदस्यों की एक समिति द्वारा उन्हें “कैंसल” किए जाने का खतरा बना हुआ है।

इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने के लिए हैकर एक बार फिर अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी और मददगार, सर हम्फ्री एप्पलबी का सहारा लेते हैं। क्लाइव फ्रांसिस ने सर हम्फ्री की भूमिका को फिर से जीवंत किया है। उनके लैटिन मुहावरों और नौकरशाही की अड़ंगेबाजी के प्रति प्रेम में उम्र के साथ कोई कमी नहीं आई है। इन दो दिग्गजों के बीच का संवाद केवल नीति और नियमों के बारे में नहीं है, बल्कि यह बढ़ती उम्र और बदलती दुनिया की हकीकत को भी दर्शाता है। वे एक विरोधी छात्र समुदाय और बदलते सामाजिक मूल्यों को मात देने की कोशिश करते हैं। यह नाटक एक बड़ा सवाल खड़ा करता है: क्या दोहरे अर्थों वाली बातें करने वाले ये उस्ताद आज के उस युग में जीवित रह पाएंगे जो हर बात में स्पष्टता और पारदर्शिता की मांग करता है?

मुख्य भूमिकाओं के अलावा विलियम चब (सर डेविड के रूप में) और स्टेफनी लेवी-जॉन (सोफी के रूप में) ने भी शानदार अभिनय किया है। यह नाटक केवल पुरानी यादों को ताजा करने का बहाना नहीं है, बल्कि दो पीढ़ियों के बीच के वैचारिक टकराव पर एक गहरा कटाक्ष भी है। मूल रूप से 1980 से 1988 के बीच प्रसारित हुई टीवी श्रृंखला मार्गरेट थैचर की पसंदीदा थी। इसने निर्वाचित प्रतिनिधियों और स्थायी नौकरशाही के बीच के तनाव को इतने प्रभावी ढंग से दिखाया था कि इसे ब्रिटिश संस्कृति में एक स्थायी स्थान मिला।

अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर इन पात्रों के माध्यम से यह नाटक सत्ता और अधिकार के बारे में दशकों से चली आ रही बातचीत को एक मुकाम पर पहुँचाता है। यह दर्शाता है कि भले ही पात्र बूढ़े हो जाएं और युद्ध का मैदान कैबिनेट रूम से बदलकर कॉलेज के मैदान में पहुँच जाए, लेकिन सत्ता की संस्थागत विडंबना सार्वजनिक जीवन में एक अटल सत्य बनी रहती है।

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