नाट्यशाला

सत्ता, भौतिकी और अतीत की गुत्थियां: माइकल फ्रायन के ‘कोपेनहेगन’ की मंच पर वापसी

हैम्पस्टेड थिएटर के इस भव्य पुनरुद्धार में एलेक्स किंग्स्टन और रिचर्ड शिफ मुख्य भूमिकाओं में हैं, जो परमाणु युग की नैतिकता और मानवीय स्मृति की अविश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं।
Martha Lucas

लंदन के हैम्पस्टेड थिएटर में माइकल फ्रायन के कालजयी नाटक कोपेनहेगन की वापसी इस वसंत के सबसे चर्चित सांस्कृतिक आयोजनों में से एक बनने जा रही है। आज के दौर में, जहां तथ्य और सत्य अक्सर विवादों के घेरे में रहते हैं, यह नाटक द्वितीय विश्व युद्ध की एक रहस्यमयी मुलाकात को वैज्ञानिक नैतिकता और सत्य की नाजुकता पर एक गहन चिंतन में बदल देता है। एलेक्स किंग्स्टन और रिचर्ड शिफ जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी और माइकल लॉन्गहर्स्ट द्वारा निर्देशित यह प्रस्तुति, परमाणु बम के निर्माण के पीछे के नैतिक बोझ की पड़ताल करती है। यह नाटक न केवल विज्ञान और इतिहास के प्रेमियों के लिए एक बौद्धिक थ्रिलर है, बल्कि यह वर्तमान राजनीतिक और वैज्ञानिक माहौल में अतीत के निर्णयों की गूंज को समझने का एक अनूठा अवसर भी प्रदान करता है।

नाटक की मुख्य कहानी एक ऐसी घटना के इर्द-गिर्द घूमती है जिसने दशकों से इतिहासकारों को उलझा रखा है: साल 1941 में, नाजी कब्जे वाले डेनमार्क में जर्मन भौतिक विज्ञानी वर्नर हाइजेनबर्ग अपने पुराने गुरु नील्स बोर से मिलने पहुंचे थे। उस मुलाकात में उनके बीच असल में क्या बातचीत हुई, यह आज भी एक रहस्य है। फ्रायन ने इस अनिश्चितता को अपनी कहानी का आधार बनाया है और क्वांटम भौतिकी के ‘अनिश्चितता सिद्धांत’ (Uncertainty Principle) का मानवीय इरादों को समझने के लिए एक रूपक के तौर पर बेहतरीन इस्तेमाल किया है। मंच पर किंग्स्टन और शिफ, मार्गरेट बोर के साथ मिलकर उस मुलाकात को अलग-अलग दृष्टिकोणों से पुनर्जीवित करते हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या हाइजेनबर्ग नाजी परमाणु कार्यक्रम के लिए मदद मांग रहे थे या उसे भीतर से नाकाम करने की कोशिश कर रहे थे। हैम्पस्टेड थिएटर का यह सीजन केवल ऐतिहासिक नाटकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कहानी कहने के नए तरीकों को भी शामिल किया गया है। इसी कड़ी में सारा रुल के नाटक स्टेज किस का ब्रिटिश प्रीमियर भी होने जा रहा है। हालांकि इसका मिजाज फ्रायन के नाटक से अलग है, लेकिन यह भी हकीकत और कल्पना के बीच की धुंधली रेखाओं की पड़ताल करता है। यह दो ऐसे कलाकारों की कहानी है, जो कभी असल जिंदगी में प्रेमी थे और अब उन्हें एक नाटक में प्रेमियों की भूमिका निभानी पड़ रही है। रिहर्सल के दौरान मंच की भावनाओं और उनके निजी जीवन के विवादों के बीच का अंतर कम होने लगता है, जो दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि कला किस तरह जीवन का अनुकरण करती है।