व्यवसाय

Google के CEO सुंदर पिचाई ने स्टैनफोर्ड में बताया, पिता ने उनके हवाई टिकट पर एक साल की तनख्वाह खर्च की, AI पर लगभग चुप्पी

Victor Maslow
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सुंदर पिचाई (Sundar Pichai) की सबसे अहम कहानी सर्च, Chrome या Gemini के बारे में नहीं है। यह उस विमान टिकट की कहानी है जिसे खरीदना उनके पिता के लिए मुश्किल था। Google के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अब यह कहानी दूसरी बार दीक्षांत समारोह में सुनाई—इस बार ऐसे स्टेडियम में, जहाँ उनके मंच पर आते ही कुछ स्नातक उठकर बाहर चले गए।

इस हफ्ते यह बात एक बार फिर सुर्खियों में है और इसे अभाव से सफलता तक पहुँचने की दास्तान की तरह पेश किया जा रहा है। लेकिन कॉरपोरेट संवाद के नज़रिए से देखें तो इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति दिखती है: टेक्नोलॉजी की सबसे ज़्यादा निगरानी में रहने वाली कंपनियों में से एक के प्रमुख ने ऐसे स्नातकों के सामने, जो इस बात को लेकर सबसे अधिक चिंतित हैं कि उनका उद्योग क्या बना रहा है, अपने परिवार की बात चुनी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लगभग पूरी तरह चर्चा से बाहर रखा।

स्टैनफोर्ड के स्नातकों से पिचाई ने क्या कहा

Google की ओर से प्रकाशित प्रतिलिपि के मुताबिक, स्टैनफोर्ड के दीक्षांत समारोह में अपने संबोधन के दौरान पिचाई ने कहा, “मेरे पिता ने मेरा टिकट खरीदने के लिए एक साल की तनख्वाह के बराबर रकम खर्च की थी। विमान में बैठने का वह मेरा पहला मौका था।” उन्होंने चेन्नई में अपने बचपन का ज़िक्र किया, जब परिवार भीषण सूखे और पानी के टैंकर समय पर पहुँचेंगे या नहीं, इस चिंता में रहता था। परिवार को टेलीफोन, टेलीविज़न और रेफ़्रिजरेटर के लिए भी सालों इंतज़ार करना पड़ा।

भाषण का रुख एक छोटी-सी घटना से बदला। हवाई अड्डे से आते हुए पिचाई ने कैलिफ़ोर्निया की भूरी पहाड़ियों पर टिप्पणी की। उनकी मेज़बान जेन अर्ल ने उन्हें टोका, “हम इन्हें सुनहरी पहाड़ियाँ कहना पसंद करते हैं।” इसी बातचीत से उन्होंने अपनी पहली सलाह निकाली: “हम यह नहीं चुन सकते कि स्नातक होकर हम किस दुनिया में कदम रखेंगे, लेकिन अपने हालात को किस नज़रिए से देखते हैं, यह ज़रूर चुन सकते हैं।”

फ़ैसले लेने के लिए उन्होंने तीन कसौटियाँ बताईं: आशावाद चुनें, मुश्किल समस्याओं की ओर बढ़ें और, जब बाकी सब बराबर हो, तो वही करें जो आपको उत्साहित करता हो। दूसरी सलाह समझाने के लिए उन्होंने Chrome का उदाहरण दिया—एक ऐसा ब्राउज़र जिसे पहले ही दिन करीब 80 लाख लोगों ने इस्तेमाल किया, लेकिन जिसकी बाज़ार हिस्सेदारी फिर लगभग 2% पर अटक गई। 9to5Google के मुताबिक, स्टीव बाल्मर ने इस आँकड़े को “गोलाई के हिसाब में आने वाली मामूली त्रुटि” कहकर ख़ारिज कर दिया था।

एक ही कहानी दो बार सुनाना भी पूँजी है

टिकट वाला किस्सा नया नहीं है। YouTube के लिए रिकॉर्ड किए गए अपने “Dear Class of 2020” संबोधन में पिचाई ने लगभग यही बात कही थी: “मेरे पिता ने मुझे अमेरिका भेजने और स्टैनफोर्ड में पढ़ने का मौका देने के लिए मेरे हवाई टिकट पर एक साल की तनख्वाह के बराबर रकम खर्च की थी,” जैसा कि उस समय Business Today ने रिपोर्ट किया था। कोई मुख्य कार्यकारी अधिकारी जब सालों तक और अलग-अलग श्रोताओं के सामने अपनी जड़ों की यही कहानी दोहराता है, तो वह सिर्फ़ पुरानी यादें ताज़ा नहीं कर रहा होता। वह अपनी एक पूँजी को सँभाल रहा होता है।

यह समझना मुश्किल नहीं कि यह कहानी अपनी क़ीमत क्यों बनाए रखती है। त्याग की यह दास्तान किसी से किसी उत्पाद पर भरोसा करने को कहे बिना आशावाद, योग्यता और अवसर की बात करती है। पिचाई ने दबाव को सीधे स्वीकार किया: The Next Web के मुताबिक, उन्होंने मज़ाक में कहा कि उनके उपनाम के आखिरी दो अक्षरों को देखते हुए AI से बच पाना मुश्किल है। साथ ही, उन्होंने अपनी सलाह को “तकनीक-निरपेक्ष” बताया। इसी प्रकाशन ने यह भी लिखा कि Google के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी एरिक श्मिट को इसी साल की शुरुआत में यूनिवर्सिटी ऑफ़ एरिज़ोना में AI की संभावनाओं की तारीफ़ करने पर हूटिंग का सामना करना पड़ा था। ऐसे माहौल में, तकनीक का सबसे कम ज़िक्र करने वाला भाषण Google के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के लिए सबसे सुरक्षित भाषण था।

वायरल हो रही कहानी में क्या छूट गया

बार-बार साझा किए जा रहे उद्धरण में उस दिन की वह बात गायब है, जो इस कहानी के तयशुदा ढाँचे में फिट नहीं बैठती। पिचाई के मंच पर आते ही स्नातकों का एक समूह स्टैनफोर्ड स्टेडियम से बाहर चला गया। यह विरोध प्रदर्शन कई हफ्ते पहले Stanford Students for Justice in Palestine ने घोषित किया था। उनका निशाना Project Nimbus था—इज़राइली सरकार के साथ Google और Amazon का करीब 1.2 अरब डॉलर का क्लाउड और AI अनुबंध, जिस पर दोनों कंपनियों ने 2021 में हस्ताक्षर किए थे। SFGate का हवाला देते हुए ETV Bharat ने प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 200 बताई। किसी भी रिपोर्ट में यह नहीं है कि पिचाई ने मंच से इस विरोध प्रदर्शन पर कुछ कहा। The Next Web ने तर्क दिया कि विरोध AI के बजाय एक खास अनुबंध को लेकर था; इससे विरोधाभास और स्पष्ट हो जाता है: स्टेडियम में विवाद Google के कारोबार को लेकर था, जबकि भाषण में पिचाई के पिता की बात हुई।

यह संबोधन 14 जून 2026 को स्टैनफोर्ड के 135वें दीक्षांत समारोह में दिया गया था। पिचाई ने कहा कि यह उनके जीवन का सिर्फ़ दूसरा दीक्षांत भाषण था। उन्होंने स्टैनफोर्ड से सामग्री विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की, 2004 में Google से जुड़े, 2015 में कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने और 2019 में Alphabet की कमान भी संभाली। El Cronista ने इस हफ्ते अपनी रिपोर्ट में न तो विरोध प्रदर्शन का ज़िक्र किया, न ही 2020 में दिए गए भाषण का। यही वह संस्करण है जिसके सबसे दूर तक फैलने की संभावना है।

उनके पिता ने उस टिकट के लिए एक बार पैसे दिए थे। Google के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अब उसी टिकट पर दो बार सफ़र कर चुके हैं—और दोनों बार इससे उन्हें वह एक चीज़ मिली जो AI पर दिया गया भाषण नहीं दिला सकता: उन स्नातकों की बात सुनने का मौका, जो वहीं रुके रहे।

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