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Hard Feelings में दमदार आइडिया है, पर फूहड़ और दोहराए गए मज़ाकों में बर्बाद हो जाता है

ग्रांज़ हेनमैन की 2023 की जर्मन टीन सेक्स कॉमेडी, दोस्ती और शर्मिंदगी पर।
Martha O'Hara
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सुबह आँख खुलते ही चार्ली के कान में एक आवाज़ गूंजती है। बेलगाम, बकबकिया, किसी शोहदे फ्रैटबॉय जैसी, और सबसे बुरी बात यह कि वह उसके अपने शरीर से आ रही है। ग्रांज़ हेनमन की जर्मन टीन सेक्स कॉमेडी Hard Feelings इसी एक विचार पर टिकी है। किशोरों के गुप्तांग बोलने लगते हैं और अपने मालिकों को ठीक वही करने के लिए उकसाते हैं जिससे वे सबसे ज़्यादा घबराते हैं। Decider की समीक्षा पूछती है कि ऐसी कहानी पहले क्यों नहीं देखी गई, और फिर साफ़ कर देती है कि यहाँ कठपुतलियाँ नहीं हैं। बोलते अंग वॉइसओवर बनकर आते हैं, जिन्हें सिर्फ़ उनके मालिक सुन सकते हैं। बस हम दर्शक भी सुनते हैं, और Decider के शब्दों में हमें इस “अभिशप्त कमेंट्री” को झेलना पड़ता है।

चार्ली (टोबियास शेफ़र) स्कूल के आख़िरी साल में है और लोकप्रियता की सीढ़ी के सबसे निचले पायदान पर खड़ा है। Decider के मुताबिक़ फ़िल्म स्विमिंग पूल वाली जिम क्लास से खुलती है, जहाँ चार्ली सबके सामने शर्म से गड़ा खड़ा है और बाकी बच्चे “CHARLY NO DICK” का नारा लगा रहे हैं। यह ताना बरसों पुराना है, उस दिन से जब बचपन में बदमाशों ने उसकी स्विम ट्रंक टखनों तक खींच दी थी। तब से वह स्कूल का अछूत है। उसकी इकलौती दोस्त पौला (कोसीमा हेनमन) है, जो किंडरगार्टन से उसके साथ है। दोनों अब तक कुँवारे हैं, और दोनों को डर है कि सेक्स उनकी दोस्ती बिगाड़ देगा। एक रात वे पौला की छत पर बैठे बतिया रहे होते हैं कि बिजली गिरती है। अगली सुबह चार्ली की नींद उस आवाज़ से टूटती है, जिसे टॉम बेक ने स्वर दिया है।

बेक की आवाज़ का लहजा वही है जो Decider ने पकड़ा है: दिमाग़ के भीतर बैठा एक कामुक फ्रैटबॉय, जो बिना रुके बड़बड़ाता रहता है। चार्ली उससे ज़ोर से बहस करता है, मानो हवा से बात कर रहा हो, और तभी उसके माता-पिता कमरे में आ धमकते हैं। जब भी कोई आकर्षक लड़की पास से गुज़रती है, आवाज़ हुल्लड़ मचाने लगती है। चार्ली बस चाहता है कि वह हमेशा के लिए चुप हो जाए। आवाज़ राज़ी भी है, पर एक शर्त पर: पहले पौला के साथ सेक्स। यह शर्त पूरी फ़िल्म की धुरी है।

सबसे बड़ा दृश्य स्कूल के कोरस कॉन्सर्ट में आता है। चार्ली का सोलो है, वह माइक के सामने पहुँचता है और उसका अंग पूरे स्कूल के सामने अपनी मौजूदगी जता देता है। चार्ली मंच से भागता है, अपने अंग पर चीखता है, और माइक खुला रह जाता है। Decider इसे “माइक ऑन छूट गया” वाला पुराना गैग कहता है, और इस पर असहमत होना मुश्किल है। उसके बाद वायरल हुई सोशल मीडिया पोस्ट का किसी को कोई नतीजा नहीं भुगतना पड़ता। Decider की यह शिकायत मुझे जायज़ लगती है, क्योंकि इस फ़िल्म की दुनिया में बदतमीज़ी की कोई कीमत नहीं चुकानी पड़ती।

विचार के स्तर पर फ़िल्म किशोर-कॉमेडी की एक जानी-पहचानी चाल को उलट देती है। ऐसी कहानियों में बेचैनी अक्सर भीतर दबी रहती है और मज़ा इसमें होता है कि वह कब फूटेगी। यहाँ बेचैनी को आवाज़ दे दी गई है, और वह इतनी बेशर्म है कि चार्ली के पास छिपने की जगह नहीं बचती। इससे शर्मिंदगी के दृश्य बनते हैं, और शर्मिंदगी इस फ़िल्म का असली ईंधन है, पूल की नारेबाज़ी से लेकर मंच के खुले माइक तक। पर यही चाल फ़िल्म को एक तंग दायरे में भी बाँध देती है। जब अंग हर बार वही माँग दोहराता है, पौला के साथ सो जाओ, तो कहानी के पास आगे बढ़ने के लिए बस वही एक शर्त बचती है।

फ़िल्म के पास कहने को कुछ ठोस भी है। Common Sense Media के अनुसार इसमें धौंस-पट्टी और किशोरावस्था की शर्मिंदगी के ख़िलाफ़ सकारात्मक संदेश हैं, पर खुले यौन कंटेंट के शोर में वे दब जाते हैं। चार्ली को उसके अंग के आकार को लेकर ताने सुनने पड़ते हैं। पौला के साथ हालात और बुरे हैं। Common Sense के मुताबिक़ उसे शब्दों से और स्मार्टफ़ोन के ज़रिए सताया जाता है, उस लोकप्रिय लड़के की फैलाई अफ़वाहों के कारण जिसके साथ वह लगभग सो चुकी थी। यहाँ फ़िल्म की कॉमेडी को चुभन में बदलना चाहिए था, पर बोलते अंगों का शोर उसे ढक देता है। किशोरों की असली तकलीफ़ पर्दे पर आती है, लेकिन अगले ही दृश्य में कोई अंग फिर कुछ बक देता है और मज़ाक आगे निकल जाता है।

दर्शकों के लिए एक चेतावनी भी दर्ज करनी होगी। Common Sense Media इसे किशोर सेक्स कॉमेडी के रूप में दर्ज करता है, जिसमें शुरू से अंत तक तीखी भाषा, यौन बातचीत, हस्तमैथुन, संक्षिप्त पुरुष नग्नता (नितंब) और अलग-अलग तस्वीरों का एक छोटा सिलसिला शामिल है। फ़िल्म कहीं नरमी नहीं बरतती। यह अपने आप में दोष नहीं है। दोष तब बनता है जब इतनी बेबाकी के बावजूद चुटकुले नए न लगें।

इस सबके बीच शेफ़र और हेनमन फ़िल्म का मानवीय केंद्र हैं। शेफ़र के चार्ली की झेंप पूल वाले दृश्य से ही दर्शक तक पहुँच जाती है, और हेनमन की पौला उस दोस्ती को भरोसेमंद बनाती है जिसके बिना बाकी सब फूहड़ मज़ाक भर रह जाता। फ़िल्म का भावनात्मक वज़न इन्हीं दोनों के कंधों पर है। अक्सेल श्टाइन (रूडॉल्फ), डियाना आम्फ़्ट (पौला की माँ), विवियन कोएनिग (फ्रांसोआ), यास्मिन शकेरी (प्रिंसिपल फ़ोइग्ट), सामिरा ब्रॉयर (मार्लेन) और न्हुंग होंग (सारा) जैसे सहायक कलाकार भी कास्ट में हैं। पर फ़िल्म की ऊर्जा बोलते अंगों और दोनों मुख्य किरदारों पर इतनी केंद्रित है कि बाकी लोग पृष्ठभूमि में सिमट जाते हैं।

आख़िर में Hard Feelings एक ऐसा चुटकुला है जो अपना पूरा दम शुरुआती दृश्यों में दिखा देता है। बोलते अंग पहली बार चौंकाते हैं, फिर उनकी हर टिप्पणी पिछली टिप्पणी की गूँज लगने लगती है। Decider ने अपनी समीक्षा में माइक थपथपाकर पूछा था, “क्या हम हँस रहे हैं?”, और फ़िल्म के दूसरे हिस्से में यह सवाल मुझे भी बार-बार याद आया। विचार साहसी है और कलाकार ईमानदारी से मेहनत करते हैं, पर नेटफ़्लिक्स पर आई यह फ़िल्म अपने इकलौते मज़ाक से आगे नहीं बढ़ पाती। पूल की बेइज़्ज़ती, छत की बिजली और कॉन्सर्ट का खुला माइक याद रह जाते हैं। उन्हें जोड़ने वाली कहानी याद नहीं रहती।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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