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Through My Window: दिल को छूने वाली प्रेम कहानी, पर जोखिम उठाने से बचती हुई

मार्सल फोरेस की 2022 की यह टीन रोमांस फ़िल्म अपने दो मुख्य कलाकारों के भरोसे चलती है।
Martha O'Hara
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“Through My Window” की बुनियाद एक ऐसी स्थिति पर टिकी है जिससे बहुत से लोग कभी न कभी गुज़रे होंगे: बरसों पुराना एकतरफ़ा आकर्षण, और वह भी बगल के घर में रहने वाले इंसान के लिए। मार्सल फोरेस की इस फिल्म में राकेल (क्लारा गैले) अपने पड़ोसी एरेस हिदाल्गो (जुलियो पेणा) पर लंबे समय से फ़िदा है। कहानी तब करवट लेती है जब एरेस के भीतर भी राकेल के लिए भावनाएँ पनपने लगती हैं। ठीक उसी मोड़ पर उसका परिवार रास्ते में आ खड़ा होता है, क्योंकि उसे यह रिश्ता मंज़ूर नहीं। फिल्म रोमांस, ड्रामा और कॉमेडी, तीनों खानों में दर्ज है, और उसका मिज़ाज इसी मिलावट से बनता है। हँसी के हल्के छींटे ड्रामा को बोझिल होने से बचाते हैं, इसलिए यह एक हल्की-फुल्की प्रेम कहानी की तरह सांस ले पाती है।

कहानी अपने आप में नई नहीं है। पड़ोस की दीवार के आर-पार पलता प्यार और घरवालों की नामंज़ूरी, यह ढाँचा हम पहले भी कई बार देख चुके हैं। फिल्म इस पर पर्दा डालने की कोशिश भी नहीं करती। उसका दाँव दो कलाकारों के आपसी तालमेल पर है, और ज़्यादातर जगह यह दाँव चल जाता है। क्लारा गैले और जुलियो पेणा जब साथ दिखते हैं, तो दृश्य में एक सहजता आ जाती है जो पटकथा के सीधे-सपाट होने की भरपाई कर देती है। प्रेम कहानी में यह सबसे ज़रूरी चीज़ है: दर्शक को यक़ीन हो कि ये दोनों सचमुच एक-दूसरे की तरफ़ खिंच रहे हैं। यहाँ वह यक़ीन बन जाता है, और बाक़ी कमियाँ उसके सामने छोटी पड़ने लगती हैं।

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गैले के हिस्से में राकेल की वह बेचैनी आती है जो बरसों दबी रही चाहत के अचानक जवाब पाने पर पैदा होती है। जिसे सालों से ख़ामोशी से चाहा हो, उसी की तरफ़ से इशारा मिले तो ख़ुशी के साथ घबराहट भी आती है, और गैले इस दोहरी हालत को बहुत शोर किए बिना पकड़ती हैं। उनके अभिनय में नरमी है, और यह नरमी किरदार को कमज़ोर नहीं, बल्कि भरोसे के लायक बनाती है। पेणा का एरेस ज़्यादा आत्मविश्वासी लगता है, कहीं-कहीं थोड़ा अकड़ा हुआ भी, मगर वे उसे कार्टून बनने से बचा ले जाते हैं। जिस किरदार के सामने पूरा परिवार खड़ा हो, उसे एक साथ ज़िद्दी और दुविधा में दिखाना आसान नहीं होता, और पेणा इस संतुलन को ठीक-ठाक साध लेते हैं।

कास्ट लंबी है। गिलेर्मो लाशेरास (योशी), नतालिया अज़ाहारा (डैनिएला) और एमिलिया लाज़ो (क्लाउडिया) राकेल की दुनिया के आसपास के चेहरे हैं, और इन्हीं के सहारे फिल्म का हल्का-फुल्का रंग बनता है। दूसरी तरफ़ ह्यूगो अर्बुएस का अपोलो और एरिक मासिप का आर्तेमिस हिदाल्गो नाम वाले उस घेरे का हिस्सा हैं जिससे एरेस को जूझना है। पिलार कास्त्रो (तेरे), आबेल फोल्क (हुआन हिदाल्गो) और राखेल लास्कर (सोफिया हिदाल्गो) भी कहानी के इसी जाल में दिखते हैं। इतनी बड़ी कास्ट के साथ दिक़्क़त यह है कि हर किसी को अपनी बात कहने का पूरा मौक़ा नहीं मिल पाता। कई चेहरे परदे पर आते हैं, असर छोड़ने की गुंजाइश दिखाते हैं, और फिर कहानी उन्हें पीछे छोड़कर आगे बढ़ जाती है। नतीजा यह कि नाम याद रह जाते हैं, किरदार कम।

फिल्म का केंद्रीय टकराव यही है कि दिल की मर्ज़ी और परिवार की मर्ज़ी आमने-सामने हैं। यह विषय काग़ज़ पर काफ़ी संभावना रखता है, क्योंकि परिवार का विरोध बाहरी खलनायकी से कहीं ज़्यादा चुभता है। जब रोकने वाले अपने ही लोग हों, तो हर फ़ैसला दोहरे बोझ के साथ आता है। फिल्म इस दुविधा को छूती ज़रूर है, पर उसमें बहुत गहरे नहीं उतरती। हिदाल्गो परिवार को रिश्ता क्यों नहीं भाता, इस सवाल का जवाब जितना ठोस और पेचीदा हो सकता था, उतना बन नहीं पाता। नतीजा यह कि विरोध कई बार बस एक बाधा की तरह खड़ा रहता है, उसके पीछे की इंसानी वजहें धुंधली रह जाती हैं। अगर परिवार की आपत्ति में थोड़ा डर, थोड़ा स्वार्थ या थोड़ी पुरानी कड़वाहट दिखती, तो एरेस का चुनाव कहीं ज़्यादा महँगा लगता।

सबसे कमज़ोर कड़ी कहानी की बुनावट है। शुरुआती हिस्से में जो खिंचाव बनता है, वह आगे बढ़ते-बढ़ते ढीला पड़ने लगता है। परिवार के विरोध वाले कुछ प्रसंग एक-दूसरे से इतने मिलते-जुलते लगते हैं कि लगता है कहानी अपनी जगह पर घूम रही है, आगे नहीं बढ़ रही। अंत भी उतना कसा हुआ नहीं लगता जितनी शुरुआत से उम्मीद बँधती है। ऐसी कई प्रेम कहानियों का यही हाल होता है: सवाल शुरू में बड़े उठाए जाते हैं, और जवाब देने की बारी आती है तो हड़बड़ी दिखने लगती है।

शीर्षक “Through My Window” अपने आप में एक तस्वीर सामने रखता है: खिड़की से देखना, चाहना, और फिर फ़ासले का घटना। पड़ोस में रहने वाले इंसान पर बरसों से टिकी नज़र के लिए इससे सटीक नाम शायद नहीं हो सकता। इस रूपक की गूँज फिल्म में कितनी सुनाई देती है, यह देखने वाले की नज़र पर निर्भर करेगा। मुझे लगा कि फिल्म की असली ताक़त किसी सोची-समझी दृश्य-योजना में नहीं, कलाकारों के आपसी रसायन में बसती है। जहाँ पटकथा ढीली पड़ती है, वहाँ गैले और पेणा की जोड़ी काम सँभाल लेती है। मगर जिन दृश्यों में दोनों साथ नहीं होते, वहाँ फिल्म का सहारा छिन जाता है और वह अपेक्षाकृत फीकी पड़ जाती है।

मिज़ाज के लिहाज़ से यह फिल्म किसी बड़े दावे के साथ नहीं आती। यह रोमांटिक कॉमेडी-ड्रामा की उसी परिचित पटरी पर चलती है जहाँ दर्शक को पहले से पता होता है कि वह क्या पाने जा रहा है। ऐसे दर्शक को, जो हर फिल्म से कुछ अनदेखा माँगता है, निराशा होगी। लेकिन जिन्हें दो जवान दिलों की झिझक, घरवालों की रुकावट और बीच-बीच में हल्की हँसी पसंद है, उनके लिए यह छुट्टी की किसी शाम का ठीक-ठाक साथी बन सकती है।

मेरा आकलन यह है कि “Through My Window” एक औसत पटकथा को दो भरोसेमंद कलाकारों के सहारे खींच ले जाती है। राकेल और एरेस के बीच का तालमेल ही वह वजह है जिससे आप आख़िर तक स्क्रीन से जुड़े रहते हैं। कमज़ोर बुनावट और अधपके सहायक किरदार खटकते हैं, पर वे इस जोड़ी की चमक को पूरी तरह ढक नहीं पाते। फिल्म से बहुत बड़ी उम्मीद न रखें, तो यह अपने वादे का ज़्यादातर हिस्सा निभा देती है।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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