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Still Time का विचार चतुर है, मगर फिल्म इतनी शालीन है कि दिल को गहराई से छू नहीं पाती

एलेसेंड्रो अरोनादियो की 2023 की इतालवी ड्रामेडी, जिसमें एदोआर्दो लेओ मुख्य भूमिका में हैं।
Martha O'Hara
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Still Time का पूरा ढाँचा एक ऐसे आदमी पर टिका है जो अपनी ज़िंदगी को मन ही मन फ़ास्ट-फ़ॉरवर्ड करके जीता है। निर्देशक अलेसांद्रो अरोनादियो की यह नेटफ़्लिक्स फ़िल्म, जिसका इतालवी मूल नाम Era ora है, दांते की कहानी है, जिसे एडोआर्डो लेओ ने निभाया है। दांते दफ़्तर की मशीन का एक पुर्ज़ा है। वह हर घंटे को पैसे में तौलता है और घर की बातें आधे कान से सुनता है। 40वें जन्मदिन की सरप्राइज़ पार्टी के बाद वह सोकर उठता है तो पूरा एक साल गुज़र चुका है, और उसे इस साल की कोई याद नहीं। इसके बाद भी वह बार-बार आगे छलाँग लगाता है। रोमांस, कॉमेडी और ड्रामा के मेल वाली इस फ़िल्म में समय की यह उछाल असल में एक आदमी के अपने ही परिवार से कट जाने की कहानी कहने का ज़रिया है।

कहानी की शुरुआत में एक हादसा है। दांते ग़लती से एलिस को चूम लेता है और दोनों की सगाई हो जाती है। यानी इस रिश्ते की नींव एक संयोग पर रखी गई है, और फ़िल्म आगे चलकर दिखाती है कि संयोग से बने रिश्ते को सँभालने में कितनी मेहनत लगती है। एलिस को बार्बरा रोंकी ने निभाया है। जब दांते जागता है तो पता चलता है कि एलिस गर्भवती है, और उसे इसकी कोई ख़बर नहीं थी। Ready Steady Cut के मुताबिक़ वह एलिस के उभरे पेट को सूजन समझ बैठता है और पेट में बच्चे की हलचल महसूस होने पर डर जाता है। आगे की छलाँगों में वह अपनी बेटी से मिलता है, जिसे वह बार-बार बेटा समझ बैठता है, और Ready Steady Cut के अनुसार कभी-कभी तो उसके होने तक को भूल जाता है। किसी और फ़िल्म में यह बात दुखद होती, पर यहाँ उसकी घबराहट हँसी में बदल जाती है। हँसी इस बात से निकलती है कि एक आम आदमी ऐसी हालत में ठीक वैसे ही बौखलाएगा, जैसे दांते बौखलाता है।

Decider ने कहानी का सार एक पंक्ति में पकड़ा है। दांते जैसे हिसाबी, पैसे को समय मानने वाले आदमी के लिए नरक दूसरे लोग नहीं हैं। नरक वह है जहाँ समय पर उसका क़ाबू नहीं रहता। नाम का मज़ाक भी फ़िल्म के पक्ष में जाता है, क्योंकि यह दांते अपना निजी इन्फ़र्नो झेल रहा है। Decider यह भी कहता है कि दांते हर छलाँग के बाद वही रहता है जो था, जबकि बाक़ी सब ऐसे जीते रहे हैं मानो वह ऑटोपायलट पर हो, यानी जैसा वह पहले से था। यह बात फ़िल्म के जादुई विचार को एक ठोस ज़मीन देती है। छलाँगें दांते को उसकी रोज़मर्रा की आदत का आईना दिखाती हैं। जो सज़ा उसे मिलती है, वह उसके अपने स्वभाव का ही बड़ा किया हुआ रूप है।

एडोआर्डो लेओ का काम इस फ़िल्म की रीढ़ है। Decider के अनुसार पूरी फ़िल्म धीमे सुर और असली-से लगते लहजे में खेली गई है, इसलिए कोई अभिनय अलग से चमकता नहीं। लेओ को वह इस बात का श्रेय देता है कि उन्होंने जादुई यथार्थ वाली इस शर्त को लगभग अकेले अपनी अविश्वास भरी प्रतिक्रियाओं के दम पर विश्वसनीय बनाया है। मुझे यह आकलन सही लगता है। लेओ कहीं ओवरएक्टिंग नहीं करते। ऐसी कहानी में, जहाँ किरदार हर बार किसी और साल में आँख खोलता है, अभिनेता के पास भरोसा जीतने का एक ही रास्ता है कि उसकी हैरानी सच्ची लगे। इसी वजह से हम दांते के साथ उलझन महसूस करते हैं, जबकि वह ख़ुद अपने साथ जो हो रहा है उसे पूरी तरह देख नहीं पाता।

बार्बरा रोंकी के हिस्से में कम आसान ज़िम्मेदारी है। एलिस को वह आदमी सँभालना है जो उसके साथ रहकर भी ग़ैरहाज़िर है। Ready Steady Cut बताता है कि दांते यह तक भूल जाता है कि दोनों कपल्स थेरेपी में जा रहे हैं, और एलिस को इस बात की कड़वाहट है कि वह बेटी के पास कभी नहीं होता और परिवार से ज़्यादा काम को चुनता है। यही किरदार दांते की नादानी को मज़ाक से बाहर निकालकर चोट बना देता है, क्योंकि दर्शक जानता है कि दांते को जो याद नहीं, एलिस को वह सब झेलना पड़ा है। Decider ने एक और छोटी बात दर्ज की है कि एलिस दांते को मूड में लाने के लिए छेड़छाड़ भरे, सांस्कृतिक संदर्भों वाले इशारे करती है, पर मामला उससे आगे नहीं बढ़ता। यह एक हल्का, घरेलू पहलू है जो इस जोड़ी को सिर्फ़ झगड़े की जोड़ी नहीं रहने देता।

फ़िल्म की सबसे असरदार घड़ी दांते और उसकी बेटी गैलाड्रिएल के बीच आती है, जिसे स्टेला ट्रोत्ता ने निभाया है। Decider लिखता है कि नाम लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स के पात्र से आया है और फ़िल्म इस श्रद्धांजलि की कुछ वजह भी देती है, हालाँकि वह इसे हास्यास्पद ठहराता है। फ़िल्म में आगे चलकर दांते आख़िरकार बेटी के साथ वक़्त बिताता है और उससे ऐसे पूछता है जैसे किसी कर्मचारी से फ़ीडबैक माँग रहा हो: “मैं क्या बेहतर कर सकता हूँ?” बच्ची का जवाब सीधा है: “थोड़ा और समय, प्लीज़।” Decider इसी जवाब को वह जगह मानता है जहाँ कहानी का मतलब अपनी जगह बैठ जाता है। दफ़्तरी भाषा में पूछा गया सवाल और एक बच्ची का सीधा जवाब पिता का सारा हिसाब एक झटके में चुकता कर देते हैं।

अब कमज़ोरियों पर आएँ। Decider की शिकायत यह है कि नेटफ़्लिक्स जिसे ड्रामेडी कहता है, उसमें हँसी और टीस का संतुलन चाहिए, पर अरोनादियो की फ़िल्म, जिसकी पटकथा रेनातो सान्नियो के साथ लिखी गई है, ज़्यादातर बिना किसी तीखे मिज़ाज के रेंगती है। Decider के शब्दों में यह भले लोगों की भली फ़िल्म है, जिसमें समय में उछलने वाले विचार के साथ कुछ ख़ास नया नहीं किया गया। Click, About Time और Groundhog Day जैसी फ़िल्में पहले यही सबक़ दे चुकी हैं कि समय पर क़ाबू नहीं होता और हर पल को जीना पड़ता है। मैं इस बात से सहमत हूँ कि Still Time इन फ़िल्मों के पास पहुँचती तो है, पर उनसे आगे नहीं निकलती।

इसके बावजूद यह फ़िल्म बेकार नहीं है। Ready Steady Cut इसे दिल से बनी फ़िल्म कहता है, और उसके मुताबिक़ दांते की भूलों से पैदा हुई उलझन जितनी हँसाती है, भावनात्मक पहलू भी उतने ही असर के साथ काम करते हैं। फ़िल्म की सबसे बड़ी ख़ूबी यह है कि वह सुधार की राह आसान नहीं दिखाती। दांते को सिर्फ़ यह समझना नहीं है कि वह समय गँवा रहा है। उसे रिश्तों की उस दरार को भरना है जो उसकी ग़ैरहाज़िरी में पड़ चुकी है, और उसकी याद में उस दरार का कोई हिस्सा दर्ज ही नहीं है।

यह फ़िल्म कोई नई चाल नहीं चलती और भावनात्मक रूप से कभी बहुत ऊँचाई पर नहीं पहुँचती। पर गैलाड्रिएल वाला दृश्य काम करता है, और उसकी वजह सिर्फ़ संवाद नहीं, लेओ का वह दफ़्तरी लहजा भी है जो पहली बार बेटी के सामने टूटता है। रोंकी की मौजूदगी उस दृश्य के पीछे की थकान को वज़न देती है। बाक़ी फ़िल्म हल्की है, पर बुरी नहीं। इसे देखकर शाम बुरी नहीं गुज़रती, और उसके बाद अपनी घड़ी की तरफ़ देखने का मन ज़रूर होता है।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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