फ़िल्में

Nowhere एक अकेले कंटेनर से रोमांच निकालती है, पर पटकथा अन्ना कास्टिलो का साथ नहीं दे पाती

अल्बर्ट पिंटो की 2023 की सर्वाइवल थ्रिलर, समुद्र में बहती एक माँ और उसकी नवजात बच्ची की कहानी।
Martha O'Hara
हमें Google पर जोड़ें

मिया (अन्ना कास्टिलो) गर्भवती है, उसका देश युद्ध की चपेट में है, और बच निकलने का उसके पास एक ही रास्ता बचा है: मालवाहक जहाज़ पर लदे समुद्री कंटेनर में छिप जाना। अल्बर्ट पिंटो की स्पेनिश फ़िल्म Nowhere इसी लोहे के डिब्बे को अपना पूरा संसार बना लेती है। थ्रिलर और ड्रामा का मेल यहाँ सादा है और सजावट से दूर रहता है।

फ़िल्म पूरी तस्वीर देने की जल्दी में नहीं है, पर जितना बताती है वह काफ़ी है। मिया और निको अपने अजन्मे बच्चे की सुरक्षा के लिए देश छोड़ने का फ़ैसला करते हैं। योजना मालवाहक जहाज़ से आयरलैंड पहुँचने की है। तस्कर दोनों को अलग कर देते हैं: निको को दूसरे कंटेनर में धकेल दिया जाता है और मिया अकेले आगे बढ़ती है। एक सैन्य चौकी पर वह इसलिए बच जाती है कि वह सामान के ढेर के ऊपर छिपी है, जबकि कंटेनर में मौजूद बाक़ी सब मारे जाते हैं। यह हिस्सा तेज़ है और पहले ही बता देता है कि इस दुनिया में एक छोटी-सी चूक की क़ीमत भी जान से चुकानी पड़ सकती है।

YouTube video

फिर एक भयंकर तूफ़ान आता है, कंटेनर समुद्र में जा गिरते हैं और मिया पानी के बीच भटकती रह जाती है। उसी हाल में वह बच्चे को जन्म देती है। कहानी का ढाँचा इससे सीधा नहीं हो सकता था: एक औरत, एक नवजात और चारों तरफ़ पानी। पटकथा एर्नेस्ट रिएरा, मिगेल रुज़, इंडियाना लिस्टा, सीन विंस्लो और तेरेसा रोसेंडोय ने मिलकर लिखी है, और वह किसी बात को ज़रूरत से ज़्यादा समझाने नहीं बैठती। इसी कसाव से फ़िल्म आगे खिंचती चलती है। पर वही कसाव कभी-कभी भारी भी पड़ता है। दायरा इतना छोटा है कि एक ही तरह की जद्दोजहद बार-बार लौटती है, और दर्शक बीच-बीच में थकने लगता है।

कंटेनर में भरा सामान, एक ड्रिल, थोड़ा टेप और एक छोटा चाकू मिया के काम आते हैं। उसके पास टीवी, हुडी, इयरफ़ोन और वोदका की बोतलें तक हैं, और हर चीज़ किसी न किसी मौक़े पर इस्तेमाल हो जाती है। कभी-कभी यह इतना सुविधाजनक लगता है कि भरोसा डगमगाता है, पर हर औज़ार के पीछे मिया की कोई तात्कालिक ज़रूरत खड़ी रहती है, इसलिए बात सँभल जाती है। कंटेनर में पानी भरने लगता है तो वह ड्रिल और चाकू से छत में छेद करती है और नवजात बेटी नोआ को लेकर ऊपर चढ़ जाती है। इससे पहले गोली के एक छेद से उसे लोगों से भरा एक और कंटेनर कुछ ही मीटर दूर डूबता दिखता है, और भीतर से चीख़ें आती हैं। यह दृश्य देखना सचमुच कठिन है। फ़िल्म वहाँ ज़्यादा देर रुकती नहीं, और यही उसे और चुभने वाला बनाता है, क्योंकि मिया के पास रुकने का समय नहीं है।

पूरी फ़िल्म का वज़न अन्ना कास्टिलो के कंधों पर है, और वे उसे सँभाल लेती हैं। उनके चेहरे पर डर और ज़िद एक साथ दिखते हैं, और इसके लिए उन्हें लंबे संवादों की ज़रूरत नहीं पड़ती। प्रसव के बाद वे एक कमज़ोर, थकी हुई माँ को बिना शोर किए निभाती हैं, जो अपनी जान के साथ-साथ एक और जान के लिए लड़ रही है। भूख और कमज़ोरी के बीच मिया को अपनी अपरा (प्लेसेंटा) तक खानी पड़ती है, और कास्टिलो इस दृश्य को सनसनी बनाए बिना निभा जाती हैं। छत पर किसी गुज़रते विमान का ध्यान खींचने की कोशिश में उसके पैर पर गहरा घाव लग जाता है। वह उसे टीवी के पुर्ज़ों से सिलती है और वोदका से साफ़ करती है। यह दृश्य दिखाता है कि मिया हर मोड़ पर रुककर सोचती है कि अब क्या करना है। बाद में वह जाल बनाकर मछली पकड़ती है और कंटेनर के सामान से बेड़ा बनाती है। वही व्यावहारिक सूझ उसे आख़िरी दृश्यों तक ले जाती है।

तमर नोवास निको के रूप में ज़्यादातर पर्दे से बाहर रहते हैं। तस्करों ने दोनों को अलग कर दिया था, इसलिए उनका रिश्ता फ़ोन पर आती आवाज़ के सहारे चलता है। यह फ़िल्म का एक समझदार फ़ैसला है। अकेली पड़ी मिया को दूर से सुनाई देती एक आवाज़ मिलती है, और दर्शक भी समझ जाता है कि उस आवाज़ का उसके लिए क्या मतलब है। सबसे भारी पल वह फ़ोन है जिसमें निको अपनी बिगड़ती सेहत की बात बताते हैं और मिया उन्हें बच्ची के जन्म की ख़बर देती है। मिया की पहली बेटी उमा को खोने का अपराधबोध भी उसके साथ सफ़र करता है, और कमज़ोरी के क्षणों में उमा के भ्रम उसे घेर लेते हैं। इससे समुद्र की लड़ाई में एक पुराना घाव भी जुड़ जाता है। मिया के लिए बचना अब नोआ का ही सवाल नहीं रहा, उमा को न बचा पाने की टीस भी उसे हर बार उठकर आगे बढ़ने को मजबूर करती है।

पिंटो का निर्देशन संयमित है। वे कहानी को बड़े ऐलानों से नहीं सजाते। कंटेनर के भीतर की तंगी फ़िल्म को थ्रिलर की बेचैनी देती है, जबकि खुला समुद्र उसमें अकेलेपन का एहसास जोड़ता है। दोनों जगहों का फ़र्क़ फ़िल्म के मिज़ाज को बदलता रहता है और उसे एक ही सुर में अटकने से बचाता है।

फ़िल्म की कमज़ोरी उसकी पृष्ठभूमि में है। तानाशाही सरकार, संसाधनों की किल्लत और आयरलैंड पहुँचने की उम्मीद का ज़िक्र तो होता है, पर यह दुनिया सिर्फ़ ख़ाका बनकर रह जाती है। अगर मिया के भागने की वजहें थोड़ी और ठोस होतीं, तो समुद्र की लड़ाई का असर और गहरा पड़ता। निको से होने वाली फ़ोन बातचीत भी कई बार भावना से ज़्यादा जानकारी पहुँचाने का ज़रिया लगती है।

फिर भी Nowhere का सबसे गहरा असर उसके आख़िरी हिस्से में है। कंटेनर डूब चुका है और मिया बेड़े पर बह रही है। उसके पास अब चमत्कार की उम्मीद के सिवा कुछ नहीं बचा। एक माँ अपनी नवजात बेटी के साथ खुले पानी पर टिकी है, और कैमरा उस थकान को छिपाता नहीं। यहाँ कास्टिलो का चेहरा ही वह सब कह देता है जो संवाद नहीं कहते।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

टैग: , , , Nowhere,

हमें Google पर जोड़ें

चर्चा

0 टिप्पणियाँ हैं।