विज्ञान

J1007+3540 का ब्लैक होल 10 करोड़ साल बाद जागा, जेट्स 10 लाख प्रकाश वर्ष तक फैले

Peter Finch

आकाशगंगा J1007+3540 के केंद्र में स्थित महाविशाल ब्लैक होल करीब 10 करोड़ साल की चुप्पी के बाद फिर सक्रिय हो गया है। इसके नए प्लाज्मा जेट्स गहरे अंतरिक्ष में करीब 10 लाख प्रकाश वर्ष तक फैल गए हैं — जो हमारी आकाशगंगा के व्यास का लगभग 10 गुना है। भारत के मिदनापोर सिटी कॉलेज की खगोल वैज्ञानिक शोभा कुमारी के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस खोज को Royal Astronomical Society की शोध पत्रिका Monthly Notices में प्रकाशित किया है।

इस शोध में दो रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया गया: नीदरलैंड्स का LOFAR नेटवर्क और पुणे, भारत स्थित अपग्रेडेड जायंट मेट्रेवेव रेडियो टेलीस्कोप (uGMRT)। तस्वीरों में दो अलग-अलग परतें साफ दिखती हैं — बाहर की तरफ सैकड़ों करोड़ साल पुराने विस्फोट का धुंधला प्लाज्मा, और उसके अंदर एक चमकदार, सघन नया जेट, जो बताता है कि ब्लैक होल का केंद्रीय इंजन फिर से चालू हो गया है। दोनों सक्रियता के बीच का अंतर करीब 10 करोड़ साल का आंका गया है।

शोभा कुमारी ने इसे “सदियों की शांति के बाद फिर से फटने वाले ब्रह्मांडीय ज्वालामुखी” जैसा बताया।

जेट्स और गैलेक्सी क्लस्टर की टक्कर

J1007+3540 एक विशाल गैलेक्सी क्लस्टर के अंदर स्थित है, जो अत्यधिक गर्म गैस से भरा है। यह गैस बाहर से इतना दबाव बनाती है जो ज़्यादातर रेडियो गैलेक्सी के लिए असामान्य है। इस वजह से नए जेट्स सीधे नहीं जा पाते — बल्कि वे इस प्रतिकूल माहौल में मुड़ते, दबते और विकृत होते हैं।

LOFAR की तस्वीरों में आकाशगंगा का उत्तरी हिस्सा साफ दिखता है कि कैसे वह दब गया है और मुड़ गया है। uGMRT के डेटा से पता चला कि इस इलाके में बेहद पुराने कण हैं जो लाखों साल में अपनी ज़्यादातर ऊर्जा खो चुके हैं। सह-शोधकर्ता सब्यसाची पाल ने कहा कि J1007+3540 उन दुर्लभ उदाहरणों में से एक है जहां जेट-क्लस्टर का यह टकराव इतनी स्पष्टता से देखा जा सकता है।

आकाशगंगाओं के विकास पर नई रोशनी

यह खोज इस पुरानी धारणा को चुनौती देती है कि आकाशगंगाएं धीरे-धीरे और लगातार बढ़ती हैं। जब ब्लैक होल के जेट्स आसपास की गैस में ऊर्जा छोड़ते हैं, तो वे उस गैस को ठंडा होने और नए तारे बनाने से रोक सकते हैं — इसे AGN फीडबैक कहते हैं। J1007+3540 की मेजबान आकाशगंगा 1,200 करोड़ साल से ज़्यादा पुरानी है, फिर भी हर साल 100 से ज़्यादा सौर द्रव्यमान के बराबर नए तारे बना रही है। यह चक्र अभी खत्म नहीं हुआ।

शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि इस अध्ययन की सीमाएं हैं। 10 करोड़ साल की निष्क्रियता का अनुमान प्लाज्मा एजिंग मॉडल पर आधारित है — यानी इलेक्ट्रॉन चुंबकीय क्षेत्र में कितनी तेज़ी से ऊर्जा खोते हैं, इसकी गणना पर। इस पैमाने पर ये मॉडल काफी अनिश्चितता लिए चलते हैं। यह आंकड़ा एक सुविचारित अनुमान है, सीधी माप नहीं।

टीम ने J1007+3540 के केंद्र को और करीब से देखने और नए जेट्स की गति को ट्रैक करने के लिए उच्च रिज़ॉल्यूशन वाले फॉलो-अप अवलोकन की घोषणा की है। uGMRT जैसी भारतीय सुविधा इस शोध में केंद्रीय भूमिका निभा रही है, जो इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैज्ञानिक उपस्थिति को रेखांकित करता है।

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