प्रौद्योगिकी

Xiaomi के ह्यूमनॉइड रोबोट ने 8 घंटे कार के पुर्ज़े छांटे, दो बार चार्ज हुए

Susan Hill
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Xiaomi के दो पूर्ण आकार के ह्यूमनॉइड रोबोटों ने कंपनी की इलेक्ट्रिक कार फैक्टरी की असेंबली लाइन पर पूरी शिफ्ट काम किया। वे डिब्बों से प्लास्टिक के साइड पैनल निकालकर उन रैक में रखते रहे, जहां लाइन पर बन रही कारों के क्रम के मुताबिक उनकी ज़रूरत थी। बीच में वे दो बार चार्ज होने के लिए रुके। उनमें से एक के हाथ से जब एक पुर्जा गिरा, तो पहियों पर चलने वाला दूसरा रोबोट वहां आया और उसे उठाकर ले गया।

यह आखिरी बात फैक्टरी के रोबोटों के बारे में उतना ही कुछ बताती है, जितना पूरी शिफ्ट। Xiaomi इस वीडियो को इस बात के सबूत के तौर पर पेश करती है कि किसी ह्यूमनॉइड को उसके लिए पूरी उत्पादन लाइन में बदलाव किए बिना, एक असली कार्यस्थल की ज़िम्मेदारी दी जा सकती है। यही क्लिप यह भी दिखाती है कि फैक्टरी के फर्श पर पैर कहां काम आते हैं और कहां बाधा बनते हैं।

Xiaomi ने जिस काम को चुना, वह सुनने में जितना आसान लगता है, असल में उससे कहीं मुश्किल है। ये पैनल कार के सेंटर कंसोल के दोनों ओर लगने वाले बड़े, लचीले कवर हैं और डिब्बों में बेतरतीब कोणों पर पड़े होते हैं। रोबोट को हर पैनल ढूंढ़ना होता है, यह समझना होता है कि उसका रुख किस ओर है, फिर इतनी मज़बूती से पकड़ना होता है कि वह फिसले नहीं, लेकिन इतनी नरमी से कि मुड़े भी नहीं। इसके बाद उसे लाइन की रफ्तार के साथ तालमेल रखते हुए पैनल सही स्लॉट में रखना होता है। ऐसे अनियमित और लचीले पुर्ज़ों को स्थिर औद्योगिक भुजाएं ठीक से नहीं संभाल पातीं—इसीलिए ह्यूमनॉइड बनाने वाली कंपनियां बार-बार ऐसे कामों का उदाहरण देती हैं।

वीडियो पर आई चीनी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, जिसे Xiaomi के संस्थापक लेई जून (Lei Jun) ने Weibo पर पोस्ट किया, ये मशीनें CyberOne 02 हैं—उस CyberOne ह्यूमनॉइड का अगला संस्करण, जिसे Xiaomi ने पहली बार 2022 में दिखाया था। एक रोबोट काला है, दूसरा सफेद। छोटे मोबाइल रोबोट उनके पास पुर्ज़ों के डिब्बे पहुंचाते हैं और ह्यूमनॉइड हर डिलीवरी के मुताबिक अपना रास्ता और कदमों की चाल बदल लेते हैं। दोनों रोबोटों ने 3 घंटे 2 मिनट काम करने के बाद पहली बार और फिर 6 घंटे 3 मिनट के बाद दूसरी बार चार्ज किया। उन्होंने 8 घंटे 5 मिनट में काम पूरा किया। Xiaomi का कहना है कि इस परीक्षण में स्टेशन का पूरे दिन का उत्पादन लक्ष्य पूरा हुआ और रोबोटों ने लाइन के नियंत्रण तंत्र के साथ तालमेल बनाए रखते हुए अपनी गलतियों को खुद पहचाना और सुधारा।

कई दर्शकों ने एक सीधा-सा सवाल पूछा: जहां सस्ती रोबोटिक भुजा काम कर सकती है, वहां ह्यूमनॉइड क्यों लगाया जाए? लेई जून का जवाब था कि यह एक बहुउद्देशीय रोबोट है और इसे किसी दूसरे काम पर लगाने के लिए इसके हार्डवेयर में बदलाव की ज़रूरत नहीं। पूरा दांव इसी पर लगा है। एक ही तय काम के लिए रोबोटिक भुजा तेज़, अधिक सटीक और सस्ती होती है। ह्यूमनॉइड अपनी लागत तभी वसूलता है, जब उसी मशीन को पहियों पर या पैदल एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक ले जाया जा सके।

Xiaomi ने क्या नहीं दिखाया, यह उसके दिखाए गए हिस्से से भी ज़्यादा अहम है। करीब छह मिनट का वीडियो तेज़ गति से चलाया गया है और वाइड शॉट में फिल्माया गया है, इसलिए देखने वाला न तो पकड़ की गिनती कर सकता है, न चूक पहचान सकता है। Electrek ने भी ध्यान दिलाया कि Xiaomi ने यह नहीं बताया कि रोबोटों ने कितने पैनल छांटे, पूरी शिफ्ट में उनकी सफलता दर क्या रही या काम के दौरान लोगों को बीच में दखल देना पड़ा या नहीं। कंपनी की अपनी भाषा भी नपी-तुली है: एक कार्यस्थल पर “शुरुआती पड़ताल”—न कि उत्पादन लाइन चलाती रोबोटों की पूरी टोली। स्वायत्त बताकर पेश किए गए रोबोटों के डेमो पहले भी गुमराह कर चुके हैं। Tesla के 2024 के We, Robot कार्यक्रम में Optimus रोबोटों को कुछ हद तक इंसान दूर से संचालित कर रहे थे, जिसकी जानकारी कंपनी ने उस समय नहीं दी थी।

हालांकि, Xiaomi के पक्ष में यह बात जाती है कि वह पहले भी ठोस आंकड़े सार्वजनिक कर चुकी है। मार्च में जब ह्यूमनॉइड फैक्टरी में “इंटर्न” के तौर पर काम पर लगे और सेल्फ-टैपिंग नट लगाने लगे, तब कंपनी ने तीन घंटे में 90.2% सफलता दर बताई थी—जो स्टेशन के 76 सेकंड के चक्र के लिए पर्याप्त तेज़ थी। जुलाई तक कंपनी के मुताबिक यह दर बढ़कर 98% हो गई थी, जबकि अनुभवी कर्मचारियों की दर 99% थी। तब तक रोबोटों को साइड पैनल छांटने और दोबारा इस्तेमाल होने वाले डिब्बों को मोड़ने का काम भी दे दिया गया था।

वीडियो में पहियों पर चलने वाला सहायक शायद सबसे उपयोगी हिस्सा है। Electrek के फ्रेड लैम्बर्ट (Fred Lambert) का तर्क था कि समतल फैक्टरी का फर्श पहियों के लिए सबसे अनुकूल जगह है: पहियों वाला आधार सीधा खड़े रहने में ऊर्जा खर्च नहीं करता, पुर्ज़े उठाते समय अधिक स्थिर रहता है और उसमें कहीं बड़ी बैटरी लगाने की जगह होती है। शायद तब चार्ज करने के लिए वे दो ठहराव करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। सीढ़ियों वाले घरों में पैर काम आते हैं। फैक्टरियां गाड़ियों और फोर्कलिफ्ट के हिसाब से बनाई गई थीं।

फैक्टरी के फर्श पर Xiaomi अकेली कंपनी नहीं है। Figure का कहना है कि उसके रोबोटों ने दक्षिण कैरोलाइना के स्पार्टनबर्ग स्थित BMW कारखाने में 1,250 घंटे से अधिक काम किया। वहीं, चीनी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक AgiBot के G2 ह्यूमनॉइड अब नानचांग की Longcheer टैबलेट फैक्टरी में सुबह आठ से रात सात बजे तक काम करते हैं। इन परीक्षणों में काम का स्वरूप एक जैसा है: ऐसे स्टेशन, जहां रोबोट को कोई तय हरकत बार-बार दोहराने के बजाय चीज़ों को देखना, उनका आकलन करना और हालात के मुताबिक खुद को ढालना पड़ता है।

यही कोशिश अब घरों तक पहुंच रही है। Xiaomi ने जुलाई में Xiaomi-Robotics-1 नाम का AI मॉडल सार्वजनिक तौर पर जारी किया था। अब इसे Xiaomi के कर्मचारियों के अपार्टमेंटों में आज़माया जा रहा है। वहां इसने तीन कमरों में 30 मिनट से अधिक समय तक और 50 से ज़्यादा कामों में प्रदर्शन किया—डेस्क ठीक करने और कचरा हटाने से लेकर चीज़ों को वापस उनकी सही जगह पर रखने तक। न तो ये रोबोट और न ही घर के लिए बनाया गया कोई संस्करण कहीं बिक्री के लिए उपलब्ध है। Xiaomi ने किसी भी बाज़ार के लिए कीमत या लॉन्च की तारीख भी नहीं बताई है।

लेई जून ने पिछले दिसंबर में कहा था कि Xiaomi की योजना अगले पांच वर्षों में अपनी फैक्टरियों में बड़ी संख्या में ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात करने की है। इस योजना का फैसला वे आंकड़े करेंगे, जिन्हें शिफ्ट के इस वीडियो में शामिल नहीं किया गया: एक रोबोट कितने स्टेशनों पर काम कर सकता है, वह कितनी बार चूकता है और उसके एक घंटे के काम की लागत किसी व्यक्ति के एक घंटे के काम के मुकाबले कितनी पड़ती है।

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