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‘स्ट्रेट टू हेल’ Netflix पर: निर्देशक और हीरोइन ने माना कि उन्हें कज़ुको होसोकी पसंद नहीं थी

Jun Satō
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पहला दृश्य शुरू होने से पहले स्क्रीन पर एक चेतावनी आती है। यह सीरीज़ सच्ची घटनाओं पर आधारित है, लेकिन एक काल्पनिक रचना है। यह कोई कानूनी सावधानी नहीं है। यह जापानी टेलीविज़न की सबसे ज़्यादा देखी जाने वाली ज्योतिषी कज़ुको होसोकी (Kazuko Hosoki) पर बनी जीवनीपरक सीरीज़ का पहला कथात्मक फ़ैसला है। और निर्माता इस फ़ैसले को खुलकर स्वीकार करते हैं — क्योंकि जिस औरत की ज़िंदगी उन्होंने अभी-अभी पर्दे पर उतारी है, वे उस पर पूरा भरोसा नहीं करते। यहाँ दूरी कोई शिल्प-प्रयोग नहीं, एक तरीक़ा है।

होसोकी ने उस देश के टेलीविज़न पर लगभग एक दशक तक राज किया, जो आधिकारिक तौर पर ज्योतिष में विश्वास नहीं करता। उनकी पहचान बन चुकी पंक्ति “तुम नरक में जाओगे” आम बोलचाल का हिस्सा बन गई। उनकी ख़ुद की गढ़ी हुई “छह-तारा ज्योतिष” प्रणाली पर लिखी किताबों ने अपनी श्रेणी में Guinness का रिकॉर्ड बनाया। 2004 से 2008 के प्राइम-टाइम में उनके वेरायटी शो जापानी घरों में लगभग 20 प्रतिशत दर्शकों तक पहुँचते थे। यह सीरीज़ “वह संत थी या ठग” जैसा घिसा-पिटा सवाल नहीं उठाती — वह एक ज़्यादा असुविधाजनक सवाल पूछती है: कैसा देश ऐसी हस्ती गढ़ता है, और सब जानते हुए भी देखता रहता है।

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एक लेखिका जो शक करना शुरू करती है

संदेह सीरीज़ की संरचना में ही गुँथा है। होसोकी अपनी ज़िंदगी की कहानी मिनोरी उओज़ुमी (魚澄美乃里) नामक लेखिका को सुनाती हैं, जिसे उनकी आत्मकथा भूत-लेखिका के रूप में लिखने का काम सौंपा गया है। मिनोरी का किरदार साइरी इतो (Sairi Ito) ने निभाया है — वही अभिनेत्री जो Netflix की पिछली युद्धोत्तर जापानी आत्म-निर्मित हस्ती की जीवनी, द नेकेड डायरेक्टर, में अग्रणी भूमिका में थीं। मिनोरी इस काम में यह मानकर उतरती है कि उसका काम केवल दर्ज करना है — वह दर्शक का प्रतिरूप है। एक के बाद एक एपिसोड में वह जो सुन रही है, उस पर शक करने लगती है, और दर्शक भी उसके साथ शक करने लगते हैं — क्योंकि निर्देशन का इरादा ही यही है।

एरिका तोदा (Erika Toda) ने होसोकी को 17 से 66 वर्ष की उम्र तक निभाया है, और किसी नाटकीय रूपांतरण-मेकअप का सहारा नहीं लिया। बदलती है तो सिर्फ़ नज़र: 17 में देखती है, 30 में मोल-भाव करती है, 50 में फ़ैसला सुनाती है, 60 में सज़ा सुनाती है। एक ही हाव-भाव के चार स्वर। शूटिंग शुरू होने से पहले तोदा सार्वजनिक रूप से कह चुकी थीं कि वे होसोकी को नापसंद करती थीं और जब भी वह टीवी पर दिखती थीं, चैनल बदल देती थीं। निर्देशक तोमोयुकी ताकिमोतो (Tomoyuki Takimoto) ने भी यही बात कही है। दूसरे शब्दों में, यह सीरीज़ अपनी मुख्य किरदार से प्यार न करने के घोषित संकल्प के साथ बनी है — और हर शॉट का बुनावट यही द्वैध है।

जानते हुए भी देखता रहा देश

होसोकी टेलीविज़न पर अचानक नहीं पहुँची थीं। उनका असली प्रशिक्षण-स्थल था टोक्यो के गिनज़ा मोहल्ले की रात की दुनिया। युद्धोत्तर बचपन में जीवित रहने के लिए केंचुए तक खाने वाली होसोकी ने अपनी 20 की उम्र में कई होस्टेस-क्लब चलाए, जिनसे उन्हें “गिनज़ा की रानी” का नाम मिला। मनोरंजन-मोहल्ले में एक कामयाब मामा बनाने वाली कलाएँ — दूसरों की भूख पढ़ना, ग्राहक की वह बात कह देना जो वह ख़ुद कहने से कतराता है, सौदे को देखभाल जैसा दिखा देना — ठीक वही कलाएँ हैं जिन्होंने दो दशक बाद उन्हें टीवी की ज्योतिषी बनाया।

आरोप जल्दी ही शुरू हो गए। ज़्यादातर आरोप महँगे क़ब्र-पत्थरों की उस आक्रामक बिक्री से जुड़े थे जिन्हें आध्यात्मिक ज़रूरत बताकर बेचा जाता था — एक प्रलेखित व्यापारिक ढर्रा, बार-बार जाँच में आया, मगर उनके टीवी अनुबंधों पर असर नहीं डाल पाया। संगठित अपराध से जुड़ाव की अफ़वाहें उसी नियमितता से उठती और बैठती रहीं। इनमें से कुछ भी उनकी टीआरपी नहीं हिला सका। सीरीज़ इन आरोपों को कांड के रूप में नहीं, सबूत के रूप में पेश करती है — एक ऐसा देश, जिसे शिकायतों की जानकारी थी और फिर भी देखता रहा, अपनी एक ख़ास तरह की सामूहिक सहमति गढ़ रहा था।

यहीं पर सीरीज़ का पाठ साधारण जीवनीपरक प्रारूप से आगे निकल जाता है। होसोकी के टीवी-शिखर के बरसों में जापानी टेलीविज़न अब भी एक एकल संस्कृति था; वह नैतिक सत्ता को औद्योगिक पैमाने पर गढ़ सकता था, और उसे आत्मीयता के संकेतों — कड़वी सच्चाई, शिष्टाचार के प्रति प्रदर्शनकारी अवहेलना, परंपरा के प्रति बेपरवाही — में लपेट सकता था। होसोकी ने इस पूरे ढाँचे को उसके टूटने की हद तक जीकर दिखाया। 2000 के दशक के उत्तरार्ध में जब वे पर्दे से हटीं, तो टेलीविज़न और दर्शक के बीच का अनकहा अनुबंध भी बिखरने लगा था; आस्था जल्द ही कहीं और जाने वाली थी — ज़्यादा बिखरे हुए, ज़्यादा एल्गोरिद्मीय मंचों पर। मगर उन मंचों की निश्चित आकृतियों की भूख कम नहीं थी।

तो क्या होसोकी रक्षक थीं या ठग? सीरीज़ जवाब देने से इनकार करती है। यह इनकार दरअसल संरचनात्मक है: अपनी ख़ुद की अविश्वास की भावना को लेखिका के किरदार में बाहर रखकर, काल्पनिकता के स्वीकार से शुरू होकर, उन कलाकारों के कंधों पर सवार होकर जो अपनी ही नायिका पर कभी पूरा यक़ीन नहीं कर पाए — यह जीवनी सवाल वापस दर्शक की तरफ़ मोड़ देती है। जब एक पूरा देश अपने लिए कोई पैगंबर चुन लेता है, तो क्या असली सवाल उस पैगंबर के व्यक्तिगत चरित्र का होता है?

Straight to Hell - Netflix
Straight to Hell – Netflix

स्ट्रेट टू हेल 27 अप्रैल को Netflix पर रिलीज़ हो रही है। नौ-एपिसोड की इस सीरीज़ का निर्देशन तोमोयुकी ताकिमोतो (हाउस ऑफ़ निन्जाज़, द ब्रेन मैन) और नोरीचिका ओबा (गन्निबल दूसरा सीज़न) ने मिलकर किया है। पटकथा मोनाका मानाका की है, मूल संगीत NHK के ताइगा ड्रामा दौसुरु इयासु (2023) के संगीतकार हिबीकी इनामोतो (稲本響) ने रचा है।

मुख्य भूमिका में एरिका तोदा हैं, जो कज़ुको होसोकी का किरदार निभा रही हैं। साइरी इतो ने मिनोरी उओज़ुमी का रोल किया है। कलाकारों में होसोकी के जीवन से जुड़े एक पुरुष किरदार में तोमा इकुता (Toma Ikuta), शोवा-काल की गायिका चियोको शिमाकुरा की भूमिका में तोको मिउरा (Toko Miura), तथा एइता ओकुनो, केन्तारो तामुरा, अयुमु नकाजिमा, किमिको यो, रेन्जी इशिबाशी और यासुको तोमिता शामिल हैं। निर्माण ज़िम्मेदारी Django Film की है — यह सीरीज़ Netflix के जापानी कैटलॉग के लिए बनाई गई है।

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