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Make Me Believe हर जगह असर छोड़ती है, बस मुख्य जोड़ी में नहीं

मुरात साराचोग्लू और एवरेन काराबियिक गुनायदिन की 2023 की तुर्की रोमांटिक कॉमेडी दादी-नानी, दोस्तों और संगीत के दम पर कमज़ोर केमिस्ट्री की भरपाई करती है।
Martha O'Hara
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दो बूढ़ी दादियों की एक छोटी-सी चाल—यही “मेक मी बिलीव” की पूरी कहानी को गति देती है। वे अपने वयस्क पोते-पोती सहरा और डेनिज़ को एक मिलन-मुलाक़ात में उलझा देती हैं, और इस मुलाक़ात से सहरा का बचपन का क्रश फिर जाग उठता है, साथ ही बरसों पुरानी नाराज़गी भी लौट आती है। यह प्रेम-कहानी अपने आप में नई नहीं है, लेकिन इसका ढाँचा इतना पुराना है कि दर्शक शुरू से ही अंदाज़ा लगा सकता है कि आगे क्या होगा।

फिल्म की शुरुआत उम्मीद जगाती है। सहरा (आयचा आयशिन तुरान) और डेनिज़ (एकिन कोच) के बीच का रसायन धीरे-धीरे पनपता है, और दोनों कलाकार अपनी भूमिकाओं में सहज दिखते हैं। सहरा के पेशेवर जीवन को जिस तरह पर्दे पर उतारा गया है, वह फिल्म के आगे के हिस्सों में इसकी सबसे मज़बूत कड़ी बनकर उभरता है—यह वह जगह है जहाँ फिल्म चरित्र को केवल रोमांस तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे एक इंसान के रूप में गढ़ने की कोशिश करती है।

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लेकिन यह शुरुआती वादा टिकता नहीं। कहानी जल्दी ही भारी और पूर्वानुमेय हो जाती है। सहरा और डेनिज़ के बीच की केमिस्ट्री सूखी और बेजान लगने लगती है, और उनकी बातचीत बनावटी जान पड़ती है। पुरानी नाराज़गी को फिर से कुरेदने वाला हिस्सा खिंचा हुआ और असंगत लगता है, मानो लेखक जल्दी में एक टकराव को निपटाकर आगे बढ़ना चाहते हों।

फिल्म की सबसे बड़ी कमी यही है कि वह अपने किरदारों को पूरी तरह उभरने नहीं देती। सहरा का पेशेवर पक्ष एक अपवाद है, लेकिन डेनिज़ की कहानी सतही ही रह जाती है—उसकी प्रेरणाएँ, उसकी अपनी उलझनें, कुछ भी ठीक से सामने नहीं आता। अंत तक दोनों किरदार अपनी नाराज़गी और अपने पुराने क्रश को ठीक से समझ नहीं पाते, और यही अधूरापन दर्शक तक पहुँच जाता है।

“मेक मी बिलीव” एक हल्की रोमांटिक कॉमेडी है, वैसी ही जैसी गर्मियों की छुट्टियों में देखी जाती है—बिना बहुत माँग किए मनोरंजन करने वाली। यह अपने कुछ हिस्सों में सुखद ज़रूर है, पर किरदारों और कहानी दोनों को उतनी गहराई नहीं दे पाती जितनी इसकी शुरुआत वादा करती है।

फिल्म को लेकर समीक्षकों की राय बँटी हुई है। एक ओर कुछ ने कलाकारों के सहज और प्रवाहमय अभिनय की तारीफ़ की है और इसे गर्मियों की एक हल्की-फुल्की फिल्म बताया है। वहीं IMDb पर एक दर्शक-समीक्षा में कहानी को बहुत पूर्वानुमेय बताया गया और कहा गया कि इसका ज़्यादातर हिस्सा तर्कसंगत नहीं बैठता, साथ ही सहरा और डेनिज़ के बीच की केमिस्ट्री को सूखा बताया गया। रॉटन टोमैटोज़ पर छपी एक समीक्षा में भी लिखा गया कि यह फिल्म शुरू से दिल नहीं जीत पाई, बस एक ठीक-ठाक रोमांस बनकर रह गई। एक अन्य समीक्षा में इस बात को सराहा गया कि फिल्म ने रोमांस को जल्दी सुलझाकर सहरा के काम और उससे जुड़ी कहानी पर ध्यान केंद्रित करने का मौक़ा पाया।

निर्देशक मुरात सराकोग्लु और एवरेन कराबियिक गुनायदिन ने एक ऐसी रोमांटिक कॉमेडी रची है जो शैली के जाने-पहचाने ढाँचे पर टिकी है। दोनों दादियों की चालाकी, बचपन का क्रश, पुरानी नाराज़गी—ये सब इस शैली में बार-बार देखे गए तत्व हैं, और फिल्म इनमें कोई नया मोड़ नहीं जोड़ती। यही वजह है कि जो दर्शक इस फॉर्मूले से पहले ही परिचित हैं, उन्हें कहानी में कोई आश्चर्य नहीं मिलेगा।

फिल्म के दृश्य-बंध में रोमांस के लिए ज़रूरी माहौल बनाने की कोशिश ज़रूर दिखती है, पर वह कोशिश उतनी असरदार नहीं बन पाती कि कमज़ोर पड़ते कथानक की भरपाई कर सके। यही बात किरदारों पर भी लागू होती है: तुरान और कोच अपने हिस्से का काम ईमानदारी से करते हैं, लेकिन पटकथा उन्हें वह गहराई नहीं देती जिसकी दरकार थी। ख़ासतौर पर डेनिज़ का किरदार भावनात्मक रूप से अधूरा रह जाता है, और यह अधूरापन फिल्म के कुल असर को कमज़ोर कर देता है।

कुल मिलाकर, “मेक मी बिलीव” उन दर्शकों के लिए बनी है जो एक हल्की, बिना जटिलता वाली रोमांटिक कॉमेडी की तलाश में हैं। सहरा के पेशेवर जीवन का चित्रण और मुख्य जोड़ी का सहज अभिनय इसके पक्ष में जाते हैं, लेकिन घिसा-पिटा ढाँचा, पूर्वानुमेय मोड़ और अधूरे रह गए किरदार इसे उस स्तर तक नहीं पहुँचने देते जहाँ यह पहुँच सकती थी।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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