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The Devil’s Backbone: डेल टोरो की सबसे कठोर और राजनीतिक फ़िल्म, जो दिल से नहीं उतरती

गिलेर्मो डेल टोरो, 2001 — स्पेनिश गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि में एक अनाथालय, जहाँ असली दानव इंसान हैं।
Martha O'Hara
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“एक छाया जो भूत नहीं है, बल्कि युद्ध की यादें हैं।”

गिलर्मो डेल टोरो का The Devil’s Backbone 1939 के स्पेन को उस क्षण में थाम लेता है जब स्पैनिश सिविल वॉर अपने अंतिम, खूनी चरण में था। एक युवा लड़का, कार्लोस, सांता लूसिया अनाथालय पहुँचता है — अपने पिता की मृत्यु से बेखबर, एक अपरिचित जगह में अकेला छूटा हुआ। जल्द ही वह एक ऐसी उपस्थिति के शांत पदचापों को महसूस करने लगता है जो प्रतिशोध की प्यासी है। यह फिल्म एक भूत-कथा के ढाँचे में युद्ध की तबाही का शोकगीत है, और डेल टोरो इन दोनों रूपों को इतनी बारीकी से बुनते हैं कि वे एक-दूसरे को बल देते हैं, कमज़ोर नहीं करते।

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अनाथालय के आँगन में पड़ा अनफटा बम इस पूरी फिल्म का सबसे सटीक रूपक है। वह वहाँ है, सबको दिखता है, पर कोई उसे हटाने की हिम्मत नहीं कर सकता। युद्ध ठीक ऐसे ही काम करता है — बाहर से ठहरा हुआ लगता है, पर भीतर से हर चीज़ को खाता रहता है। डॉ. कैसरस (फेडेरिको लुप्पी) और अनाथालय की निदेशिका कार्मेन (मारिसा पैरेड्स) रिपब्लिकन खजाने के लिए सोना छिपाते हैं — यह सोना भी उसी बम की तरह है, मूल्यवान और खतरनाक दोनों। डेल टोरो इस सब को बिना बड़े संवाद के कह देते हैं, बस उस बम की छाया से जो हर दृश्य में किसी-न-किसी कोण पर मौजूद रहती है।

इस फिल्म में अनाथालय केवल एक जगह नहीं है — यह युद्धग्रस्त स्पेन का एक सूक्ष्म प्रतिबिम्ब है। बाहर फ्रेंको की सेनाएँ आगे बढ़ रही हैं, और इस अनाथालय में रिपब्लिकन विचारधारा अपनी आखिरी साँसें ले रही है। यहाँ के बच्चों को इस लड़ाई का हिस्सा नहीं बनाया गया, पर उनसे पूछे बिना ही वे उसके बीच में आ गए हैं। शिक्षिका कोंचिता (इरेने विसेडो) जैसे कर्मचारी भी इस घुटन भरे माहौल में जी रहे हैं। यही वह त्रासदी है जो डेल टोरो बड़ी ही शांत और संयमित भाषा में कहते हैं — न नारे, न भाषण, सिर्फ बच्चों की आँखें और उनके वे सवाल जिनके जवाब बड़ों के पास नहीं हैं।

फिल्म का सबसे बड़ा गुण इसके किरदारों में है। कार्लोस (फर्नांडो टील्वे) और जाइमे (ईनिगो गार्सेस) की दोस्ती धीरे-धीरे परतें खोलती है। जाइमे पहले एक कठोर, आक्रामक बुली की तरह दिखता है, लेकिन उसके भीतर दबा दर्द जैसे-जैसे सामने आता है, उसका चरित्र और भी मार्मिक हो उठता है। मारिसा पैरेड्स ने कार्मेन की भूमिका में एक ऐसी स्त्री को जीवंत किया है जो रिपब्लिकन आदर्शों की रक्षा के लिए सब कुछ दाँव पर लगाने को तैयार है, फिर भी अपनी व्यक्तिगत कमज़ोरियों से मुक्त नहीं। एडुआर्डो नोरिएगा का जैसिंटो इस फिल्म का सबसे जटिल किरदार है — वह कोई साधारण खलनायक नहीं, बल्कि लालच और त्याग के बीच पिसा हुआ इंसान है जो कभी इसी अनाथालय का बच्चा था। उसकी क्रूरता में एक पुरानी ईर्ष्या है, और यही उसे और भी भयावह बनाता है।

फेडेरिको लुप्पी के डॉ. कैसरस में एक गहरी, थकी हुई उदासी है। वे रिपब्लिकन कारण से जुड़े हुए हैं, अनाथालय के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, और कार्मेन के साथ एक जटिल, असंतुलित रिश्ते में बँधे हुए हैं। लुप्पी का अभिनय किसी लम्बे-चौड़े संवाद का सहारा नहीं लेता — वे आँखों और देह-भाषा से बात करते हैं, और यही उनके प्रदर्शन को इतना असरदार बनाता है।

दृश्यात्मक रूप से यह फिल्म असाधारण है। अनाथालय की सुनसान गलियाँ, धूप में नहाया वीरान आँगन, और वह रात का दृश्य जब कार्लोस रसोई में अकेला रह जाता है और एक पीली, सिर पर घाव लिए हुई आकृति को देखता है — ये सब मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जो डरावना होते हुए भी गहरा उदास है। डेल टोरो हॉरर को सिर्फ रोमांच के लिए नहीं, बल्कि भावनात्मक सच्चाई पहुँचाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। सांति — वह पीला लड़का जिसके सिर से खून रिसता है — भूत होने से पहले एक गवाह है, एक उलाहना है।

फिल्म में कहीं-कहीं कथा की रफ़्तार गिरती है। जैसिंटो और कार्मेन के बीच के तनाव को और कसावट दी जा सकती थी, और सांति की भूत-कथा की पृष्ठभूमि को भी अधिक गहराई मिल सकती थी। लेकिन ये छोटे-छोटे ठहराव फिल्म के संपूर्ण प्रभाव को कम नहीं करते।

रोजर ईबर्ट ने इसे “एक दुखभरी और सुंदर भूत की कहानी” कहा — और यह परिभाषा बेहद सटीक है। सांति की आत्मा दर्शकों को डराने के लिए यहाँ नहीं है; वह न्याय की माँग करने के लिए है। इसीलिए यह फिल्म देखने के बाद भी पीछा करती रहती है — किसी डरावने सपने की तरह नहीं, बल्कि एक अनकहे दुख की तरह।

फर्नांडो टील्वे की यह पहली फिल्म थी, और उन्होंने कार्लोस की जिज्ञासा, डर, और धीरे-धीरे पकती हुई समझ को बेहद स्वाभाविक तरीके से निभाया है। एक बच्चे की आँखों से युद्ध को देखना — इसी में इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। टील्वे उस दृष्टि को पूरी ईमानदारी के साथ जीते हैं, और उनकी वजह से कार्लोस की यात्रा सिर्फ एक कहानी नहीं, एक अनुभव बन जाती है।

The Devil’s Backbone हॉरर की परम्परा में रहते हुए इतिहास, बचपन और राजनीतिक हिंसा पर एक गहरी, धीरे-धीरे असर करने वाली टिप्पणी है। डेल टोरो ने अनाथालय को एक ऐसी जगह बनाया है जहाँ बड़ों के फैसले बच्चों की ज़िंदगियाँ तय करते हैं, और जहाँ भूत सबसे कम खतरनाक चीज़ होती है। बच्चों के डर और बड़ों की हिंसा के बीच की यही महीन, क्रूर रेखा इस फिल्म को बार-बार देखने योग्य बनाती है।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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