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Don’t Look Now: शोक और भय का ऐसा सिनेमाई संयोजन जो आज भी बेजोड़ है

निकोलस रोएग, 1973। वेनिस — एक भूलभुलैया जहाँ अतीत और भविष्य एक हो जाते हैं।
Martha O'Hara
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“रेड कोट का आभास: एक दुखी पिता की अंतर्दृष्टि या भ्रम?”

निकोलस रोग के “डोंट लुक नाउ” में, वेनिस के शीतकालीन बादल छाए रहते हैं, और इसी तरह अस्पष्टता और डर के बादल जॉन बैक्स्टर (डोनाल्ड सुथरलैंड) की चेतना पर मंडरा रहे हैं। यह फिल्म एक ऐसे पिता की यात्रा का वर्णन करती है जो अपनी बेटी के दुखद निधन से उबर रहा है, लेकिन रोग उसे केवल एक शोकाकुल व्यक्ति के रूप में नहीं गढ़ते—जॉन की असली त्रासदी यह है कि वह एक तर्कशील आदमी है जो हर असाधारण संकेत को बुद्धि की छलनी से छानता है, और इसी प्रक्रिया में वह उन चेतावनियों को अनसुना कर देता है जो उसे बचा सकती थीं। रोग की संपादन शैली दृश्यों को टुकड़ों में काटकर पुनः व्यवस्थित करती है, जिससे समय और वास्तविकता के बीच की सीमाएं धुंधली हो जाती हैं। यह तकनीक जॉन की मानसिक अवस्था को दर्शाती है, जहां भूतकाल और वर्तमान का मिलन होता है। एक विशेष दृश्य में, जॉन अपनी बेटी क्रिस्टीन की यादों में खो जाता है, जबकि उसी क्षण वह एक छोटे बच्चे को लाल कोट में देखता है—जो उसकी बेटी के निधन के समय पहने हुए कपड़ों जैसा है। यह दृश्य दो समयों को एक ही पल में थाम लेता है: जॉन का हर लाल रंग देखना एक पूर्वाभास है, पर वह हर बार उसे अपना भ्रम करार दे देता है।

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डोनाल्ड सुथरलैंड और जुली क्रिस्टी के अभिनय में गहरी मानसिक यात्रा दर्शाई गई है। सुथरलैंड की आँखों में एक गहरी व्यथा और असुरक्षा झलकती है, जो उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखाती है जो शोक की भूलभुलैया में भटक रहा है और जिसके लिए वेनिस की हर तंग गली एक नया खतरा बन जाती है। जुली क्रिस्टी द्वारा निभाई गई लॉरा बैक्स्टर का अभिनय भी उतना ही प्रभावशाली है, विशेषकर जब वह हेथर नामक एक भविष्यवाणी करने वाली स्त्री से मिलती है जो उसे बताती है कि उनकी बेटी उनसे संपर्क करना चाहती है। दोनों अभिनेताओं की विशेषता यह है कि वे शोक को एक ही भाषा में नहीं जीते—लॉरा हेथर के माध्यम से बेटी की उपस्थिति को स्वीकार करती है और इससे उसे एक अजीब शांति मिलती है, जबकि जॉन इसी रास्ते को बंद करके अपनी पीड़ा को और गहरा करता जाता है।

फिल्म का दूसरा भाग जहाँ वह एक सीरियल किलर की कहानी पर केंद्रित होता है, वहाँ भी रोग ने तनाव बढ़ाने के लिए अंधेरे और पानी के दृश्यों का भरपूर उपयोग किया है। विशेष रूप से, जॉन और लॉरा का वह अंतरंग दृश्य, जो उस दौर के लिए विवादास्पद था, उनके रिश्ते की उस नाज़ुक गहराई को उजागर करता है जो अभी पूरी तरह टूटी नहीं है। हालाँकि, यह हिस्सा फिल्म के शुरुआती भावनात्मक धरातल से थोड़ा हट जाता है, फिर भी अंतिम चरमोत्कर्ष तक तनाव बना रहता है।

फिल्म की सबसे बड़ी कमी उसके अंत में देखी जा सकती है। हालाँकि अंत गहरा और विचित्र है, फिर भी यह कुछ दर्शकों को असंतुष्ट छोड़ सकता है, जो एक स्पष्ट समाधान चाहते हैं। लेकिन यही फिल्म का आकर्षण भी है—यह एक ऐसा रहस्य खोलता है जो जीवन की अनिश्चितताओं को दर्शाता है।

“डोंट लुक नाउ” ने अपनी रिलीज के बाद एक धीमी लेकिन पक्की साख अर्जित की। पहले विवादास्पद, फिर पुनर्मूल्यांकन का विषय, और अब इसे ब्रिटिश हॉरर सिनेमा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जाता है। रोग की संपादन शैली और फ्लैशबैक-फ्लैशफॉरवर्ड का उपयोग फिल्म को एक अनोखा और भयावह अनुभव बनाता है। यह उन थ्रिलरों में से है जिसने साबित किया कि शोक और डर को अलग नहीं किया जा सकता—दोनों एक ही मूल से उठते हैं।

फिल्म के विषयों पर आलोचकों ने काफी चर्चा की है, विशेष रूप से इस पर कि शोक को इंसान किस तरह और कितने अलग-अलग रूपों में झेलता है। जॉन और लॉरा दोनों अपनी बेटी के निधन को अलग-अलग तरीके से संभालते हैं, जो उनके रिश्ते में धीरे-धीरे दरार पैदा करता है। लेकिन रोग इस दरार को महज मनोवैज्ञानिक नहीं छोड़ते—लॉरा की ग्रहणशीलता उसे हेथर से चेतावनी सुनने का अवसर देती है, और जॉन की अस्वीकृति उसे उसी चेतावनी से वंचित करती है। फिल्म का केंद्र यही है: दुख को नकारना खुद को खतरे में डालता है, और जब वह खतरा आता है तो वह लाल रंग में आता है।

“डोंट लुक नाउ” ने अपनी संपादन शैली और भावनात्मक गहराई के लिए अपने समय में भी और उसके बाद भी प्रशंसा पाई। यह फिल्म दर्शकों को उनके खुद के भयों और असुरक्षाओं से सीधे टकराने पर मजबूर करती है। शोक, विश्वास और तर्कशीलता के बीच का तनाव इसे सिर्फ एक डरावनी फिल्म से कहीं अलग बनाता है—यह उस कीमत की कहानी है जो एक आदमी तब चुकाता है जब वह यह स्वीकार करने से इनकार करता है कि उसे बचाया जा सकता था।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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