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The Shining आपको डराती नहीं — यह उस ज़मीन को खिसका देती है जिस पर आप खड़े हैं

स्टैनली कुब्रिक निर्देशित, 1980। सिनेमाई दहशत का एक कालजयी और अनुत्तरित दस्तावेज़।
Martha O'Hara
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कभी-कभी चिंता की एक आंख होती है। स्टैनली क्यूब्रिक की द शाइनिंग में, यह आंख डैनी टोरेंस की होती है—एक छोटा लड़का जो अपनी माँ वेंडी और अपने पिता जैक के साथ ओवरलुक होटल में फँस जाता है, जहाँ सर्दी का मौसम उनके आसपास की दुनिया को ठंड और अकेलेपन में बदल देता है। फिल्म का पहला दृश्य एक ऊँचे एरियल शॉट से शुरू होता है: एक कार जो रॉकी माउंटेन की खूबसूरत वादियों से गुज़रती है, जैसे कि प्रकृति ही एक चेतावनी हो कि यह रास्ता सिर्फ़ आगे जाने का है, पीछे नहीं। यह दृश्य क्यूब्रिक की दृष्टि का प्रतीक है—एक ऐसा शॉट जो दर्शकों को बिना कुछ कहे बता देता है कि यात्रा शुरू हो चुकी है, और वापसी आसान नहीं होगी।

द शाइनिंग एक मनोवैज्ञानिक हॉरर है जो मानव स्वभाव की द्वैतता पर टिका है। जैक टोरेंस (जैक निकोलसन) एक लेखक हैं जिन्हें ओवरलुक होटल की देखभाल करने का काम मिलता है, लेकिन जैसे-जैसे सर्दी बढ़ती है, उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगती है। वेंडी (शेल्ली डुवॉल) और उनके बेटे डैनी (डैनी लॉयड) के लिए, यह होटल सिर्फ़ एक मकान नहीं है—यह उनका जंगल है, जहाँ हर कोना, हर गलियारा उन्हें घेर लेता है। क्यूब्रिक ने इस फिल्म में वास्तविकता और भ्रम का एक पेचीदा खेल खेला है। डैनी की “शाइनिंग” क्षमता—एक ऐसा परोक्ष ज्ञान जो उसे आने वाली घटनाओं की झलक देता है—फिल्म के केंद्र में है, लेकिन इसे कभी स्पष्ट रूप से नहीं दिखाया जाता। इसके बजाय, क्यूब्रिक इस पर संकेत करते हैं: डैनी की आंखें बड़ी हो जाती हैं, उसके चेहरे का भाव बदल जाता है, जैसे कि वह कुछ देख रहा हो जो हम नहीं देख सकते।

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फिल्म की ताकत यह है कि इसे एक सीधे हॉरर के रूप में नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक अध्ययन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जैक का पागलपन धीरे-धीरे बढ़ता है, और क्यूब्रिक इस प्रक्रिया को इतनी मंथर गति से उतारते हैं कि डर और भी गहरा होता जाता है। फिल्म में कोई स्पष्ट खलनायक नहीं है—बस एक आदमी, जो अपने भीतर की परछाइयों से हारता जा रहा है। निकोलसन का अभिनय असाधारण है। खासकर वह दृश्य जब वे एक कुल्हाड़ी से दरवाज़ा तोड़ते हुए चिल्लाते हैं—”Here’s Johnny!”—वह पल दशकों बाद भी देखने वाले के दिमाग में टँका रहता है। लेकिन उससे पहले भी कई ऐसे क्षण हैं जहाँ उनकी आंखों में एक खिंचाव है, एक खालीपन, जो किसी भी शब्द से कहीं ज़्यादा डरावना है।

वेंडी और डैनी की कहानी जैक की कहानी के बराबर खड़ी है। दोनों उसके साथ फंस गए हैं, लेकिन एक-दूसरे से बिल्कुल अलग तरह का डर झेल रहे हैं। डुवॉल का अभिनय उतना ही मजबूत है—वे डर से भरी एक माँ की भूमिका निभाती हैं, लेकिन उनके चरित्र में एक ताकत भी है जो आखिर तक बनी रहती है। फिल्म के अंतिम दृश्यों में, जब वह जैक से लड़ रही होती है, तो उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली है।

फिल्म का समापन क्यूब्रिक की सबसे बहसपूर्ण पसंदों में से एक है: ओवरलुक होटल के इतिहास को दिखाने वाले फोटो फ्रेम। यह सुझाव देता है कि जैक टोरेंस पहले भी इस होटल में थे—कई बार, किसी और रूप में। लेकिन ये दृश्य कैसे फिट होते हैं? यह एक रहस्य है जो क्यूब्रिक ने सुलझाया नहीं, और शायद इसीलिए यह फिल्म को और भी गहरा बनाता है।

द शाइनिंग की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि कभी-कभी यह अपनी ही रहस्यमयता में खो जाती है। कुछ दृश्यों का अर्थ स्पष्ट नहीं होता, और यह दर्शकों को बेचैन कर सकता है। क्यूब्रिक ने इस फिल्म में कई प्रतीकों का इस्तेमाल किया है—जुड़वाँ लड़कियाँ, लाल बाथरूम—जो कभी खुलकर समझाए नहीं जाते। हैलोरन (स्कैटमैन क्रूदर्स) इससे बिल्कुल अलग हैं: होटल के रसोइये के रूप में वे फिल्म के सबसे सुलझे हुए किरदार हैं—वही डैनी को “शाइनिंग” का अर्थ समझाते हैं, और संकट की घड़ी में वापस लौटने भी आते हैं। जो चीज़ें अनसुलझी रह जाती हैं, वे होटल की दीवारों से जुड़ी हैं, किसी इंसान की भूमिका से नहीं।

फिर भी, द शाइनिंग एक ऐसी फिल्म है जो देखने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ती। क्यूब्रिक दर्शकों को उत्तर देने से इनकार करते हैं—और उसी इनकार में फिल्म की असली ताकत छिपी है। जो दर्शक आसान समाधान चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म बहुत लंबी और बहुत चुप्प है। जो इसे अपनी शर्तों पर देखने को तैयार हैं, उनके लिए यह एक ऐसा अनुभव है जो महीनों बाद भी किसी अंधेरे गलियारे में याद आ सकता है।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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