विज्ञान

TRAPPIST-1 के दो ग्रहों में वायुमंडल नहीं, 400 डिग्री के अंतर ने किया खुलासा

Peter Finch
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जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप ने सौरमंडल के बाहर किसी चट्टानी ग्रह का पहली बार पूरा जलवायु नक्शा तैयार किया है, और नतीजे एकदम स्पष्ट हैं। TRAPPIST-1 तारा मंडल के सबसे नजदीकी दो ग्रहों — TRAPPIST-1 b और TRAPPIST-1 c — के स्थायी दिन वाले हिस्से और स्थायी रात वाले हिस्से के बीच 400 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा का तापमान अंतर पाया गया। इतना भारी अंतर तभी संभव है जब ग्रह पर कोई वायुमंडल न हो जो गर्मी को एक तरफ से दूसरी तरफ पहुंचा सके। वेब टेलिस्कोप ने पुष्टि कर दी है कि ये दोनों ग्रह बंजर चट्टान हैं — न हवा, न जीवन की कोई ज्ञात संभावना।

पिछले एक दशक से TRAPPIST-1 को पृथ्वी के बाहर जीवन की तलाश में सबसे आशाजनक जगह माना जाता रहा है। कुंभ राशि की दिशा में पृथ्वी से 39 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित यह एक लाल बौना तारा है, जिसके चारों ओर पृथ्वी के आकार के सात ग्रह चक्कर लगाते हैं। इनमें से तीन ग्रह “रहने योग्य क्षेत्र” में हैं — यानी ऐसी दूरी पर जहां का तापमान सतह पर तरल पानी के अस्तित्व की अनुमति देता है। आकाशगंगा में तीन-चौथाई से ज्यादा तारे लाल बौने हैं और इनके आसपास पृथ्वी जैसे ग्रह बहुतायत में मिलते हैं। इस वजह से TRAPPIST-1 खगोल विज्ञान के सबसे बड़े सवाल का जवाब देने की सबसे उम्मीद भरी जगह बन गई थी। नए आंकड़ों ने सबसे भीतरी दो ग्रहों के लिए यह उम्मीद खत्म कर दी है।

वायुमंडल क्यों नष्ट हुआ?

इस नतीजे की वजह है ज्वारीय बंधन। चूंकि TRAPPIST-1 सूर्य से कहीं ज्यादा छोटा और ठंडा है, इसके भीतरी ग्रह बहुत करीबी कक्षा में घूमते हैं और दो पृथ्वी दिनों से भी कम समय में एक चक्कर पूरा कर लेते हैं। इतनी करीबी दूरी पर ज्वारीय बल ने ग्रह के घूमने की गति और उसकी परिक्रमा अवधि को एक कर दिया है — ठीक वैसे जैसे चंद्रमा हमेशा पृथ्वी की तरफ एक ही मुख रखता है। नतीजा यह है कि एक तरफ हमेशा दिन और दूसरी तरफ हमेशा रात रहती है। अगर कोई घना वायुमंडल होता तो हवाएं गर्म दिन वाली तरफ से ठंडी रात वाली तरफ ऊष्मा पहुंचातीं और अंतर कम करतीं। लेकिन वेब का 400 डिग्री का आंकड़ा साफ बताता है कि ऐसा कुछ नहीं हो रहा। हवा नहीं है, तो गर्मी कहीं जाएगी भी नहीं।

पहली बार बना चट्टानी ग्रह का पूरा जलवायु नक्शा

यह शोध जिनेवा विश्वविद्यालय की खगोलशास्त्री एमेलीन बोल्मोंत की टीम ने किया। टीम ने वेब टेलिस्कोप के MIRI उपकरण से दोनों ग्रहों की तापीय कला वक्र (thermal phase curves) दर्ज की। इस तकनीक में पूरी कक्षा के दौरान तारे और ग्रह की मिली-जुली अवरक्त चमक का अध्ययन किया जाता है, जिससे ग्रह के हर बिंदु का तापमान पता चलता है। नतीजों के मुताबिक TRAPPIST-1 b का दिन वाला हिस्सा 200 डिग्री सेल्सियस से ऊपर है और रात वाला हिस्सा माइनस 200 डिग्री से नीचे। TRAPPIST-1 c कुछ ठंडा है लेकिन वहां भी इतना ही तीखा अंतर है। पृथ्वी के आकार के किसी चट्टानी बाह्य ग्रह का इस तरह का पूरा तापीय नक्शा पहली बार तैयार हुआ है।

रहने योग्य क्षेत्र के ग्रहों की उम्मीद अभी बाकी है

यहां यह जरूरी है कि हम पूरे TRAPPIST-1 मंडल को खारिज न करें। TRAPPIST-1 b और c तारे के सबसे करीब हैं और विकिरण की सबसे तेज मार झेलते हैं। बोल्मोंत की टीम के सैद्धांतिक मॉडल बताते हैं कि मंडल के बाहरी ग्रह शायद अपना वायुमंडल बचाए रख सकते हैं। शोधकर्ताओं की तुलना काम की है — सूर्य के सबसे करीब बुध ग्रह का कोई वायुमंडल नहीं है, जबकि थोड़ी दूर शुक्र और पृथ्वी दोनों ने अपना वायुमंडल बरकरार रखा है। TRAPPIST-1 b और c की स्थिति रहने योग्य क्षेत्र वाले e, f और g ग्रहों का भविष्य नहीं तय करती। इसके अलावा तापीय कला वक्र अप्रत्यक्ष प्रमाण देती है — यह घने वायुमंडल की अनुपस्थिति तो साबित करती है, लेकिन बेहद पतली गैस परत की संभावना पूरी तरह नकारती नहीं।

यह शोध नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित हुआ है। रहने योग्य क्षेत्र के एकदम बीच में मौजूद TRAPPIST-1 e की निगरानी अभी जारी है। स्पेस टेलिस्कोप साइंस इंस्टिट्यूट के DREAMS कार्यक्रम के तहत 15 और पारगमन अवलोकन तय हैं। अगर उस ग्रह पर वायुमंडल है, तो वेब अगले कुछ महीनों में उसे खोज लेगा — और यह इंसानी इतिहास की सबसे बड़ी खोजों में से एक होगी।

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