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The Mothers of Penguins सीज़न 2 Netflix पर: माता-पिता अपने बच्चों के लिए खुद स्कूल खोलते हैं

Jun Satō
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स्कूल की परिकल्पना सबसे पहले एक डिज़ाइन की समस्या है: दरवाज़े से कौन दाख़िल हो सकता है, हर कमरे का मक़सद क्या है, कौन-से नियम बदले जा सकते हैं और कौन-से कभी नहीं। “The Mothers of Penguins” के दूसरे सीज़न में, पहले सीज़न में अपने बच्चों के लिए किसी संस्थान में जगह बनाने की गुहार लगाते रहे माता-पिता अब गुहार लगाना छोड़कर ख़ुद कुछ बनाने निकल पड़ते हैं। कामा, उला, तातियाना और येर्जी अपना स्कूल खोलते हैं और उसका नाम रखते हैं Biegun Szczęścia—मोटे तौर पर कहें तो ‘ख़ुशी का ध्रुव’।

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“The Mothers of Penguins” नेटफ्लिक्स की एक ड्रामा सीरीज़ है, जिसमें सूखा-सा हास्य भी है; इसे क्लारा कोखान्स्का-बायोन ने बनाया है। पहले सीज़न में कहानी कामिला “कामा” बार्स्का की थी—माशा वोंग्रोत्स्का अभिनीत एक MMA फाइटर और अकेली मां, जिसके सात साल के बेटे याश को ऑटिज़्म का निदान मिलता है और उसे दिव्यांग बच्चों के स्कूल भेज दिया जाता है। ऑक्टागन में लड़ाई आसान निकली। असली मुश्किल निदान, विशेषज्ञों, दूसरे माता-पिताओं और उन सबके प्रति अपने ही प्रतिरोध से जूझना था।

दूसरा सीज़न कहानी को करीब डेढ़ साल आगे ले जाता है और हालात की बुनियाद ही बदल देता है। पोलैंड में नेटफ्लिक्स ने जो सारांश जारी किया है, वह साफ़ बताता है कि गड़बड़ कहां होती है: बच्चों को सुरक्षा और अपनापन देने के इरादे से बनाया गया स्कूल जल्द ही नौकरशाही, पैसों की तंगी और भावनात्मक थकान से जूझने लगता है। बच्चे बड़े हो रहे हैं, और उनके साथ समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

यह पहले सीज़न के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा धारदार आधार है। किसी संस्थान की शिकायत करना एक बात है; उसे चलाना दूसरी—और अब चारों माता-पिता को वही काम करना पड़ रहा है, जिससे वे छह एपिसोड तक खीझते रहे। किसी को फ़ॉर्म पर दस्तख़त करने होंगे। किसी को बजट का हिसाब बैठाना होगा। किसी को ऐसे परिवार को मना करना होगा, जो इस व्यवस्था में फिट नहीं बैठता।

वही चार माता-पिता, अब दायरा बड़ा

मुख्य कलाकारों में कोई बदलाव नहीं है। कामा के रूप में माशा वोंग्रोत्स्का लौटती हैं, उला की भूमिका बारबरा वाइपिख, तातियाना की मैग्दालेना रूज़्च्का और येर्जी की भूमिका तोमाश तिंदिक निभाते हैं। कहानी के नाम में सिर्फ़ माताओं का ज़िक्र है, लेकिन येर्जी अकेले पिता हैं। बच्चे भी लौट रहे हैं: याश के रूप में यान लुबास, तोला के रूप में तोला बेन्जिकोव्स्का और मिखाव के रूप में माक्सिमिलियान म्वोदाव्स्की। सबसे नया चेहरा मात्यूश दामेंत्स्की हैं, जिन्हें हाल ही में पोलिश सीरीज़ Prosta sprawa में देखा गया था; नेटफ्लिक्स ने यह नहीं बताया है कि वह किसकी भूमिका निभाएंगे।

कोखान्स्का-बायोन ने नए सीज़न को उन लोगों पर नज़र डालने वाली कहानी बताया है, जो माता-पिता और बच्चे की जोड़ी से ठीक बाहर खड़े हैं: भाई-बहन, दादा-दादी, सहपाठी, जीवनसाथी—और यह कि न्यूरोडाइवर्जेंट या दिव्यांग बच्चा उनकी ज़िंदगी को भी किस तरह बदलता है। पहले सीज़न का दायरा सीमित था: एक माता-पिता, एक बच्चा और उनके बीच खड़ा तंत्र। उनके मुताबिक, दूसरा सीज़न इसे पूरे घर और उसके इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों तक फैलाता है।

कैमरे के पीछे भी टीम वही है। कोखान्स्का-बायोन के साथ यागोदा शेल्त्स निर्देशन कर रही हैं, जो Tower. A Bright Day और Monument जैसी फ़िल्मों की निर्देशक हैं। दोनों ने नीना लेवांडोव्स्का, युस्तिना बिलिक, आरियाद्ना लेवांस्का और मैग्दालेना झाकोव्स्का के साथ मिलकर पटकथा लिखी है। अग्न्येश्का कुर्शिद्वो MD4 के ज़रिए निर्माण कर रही हैं—इस कंपनी का औपचारिक नाम Mental Disorder 4 है।

एक ड्रामा, जो पर्दे तक सीमित नहीं रहा

पोलैंड की बहुत कम सीरीज़ ने पर्दे से बाहर इतनी दूर तक असर छोड़ा है। पहले सीज़न को सर्वश्रेष्ठ टेलीविज़न सीरीज़ के लिए ईगल, यानी पोलिश फ़िल्म पुरस्कार, मिला; पटकथा के लिए पोलिश स्क्रीनराइटर्स गिल्ड का पुरस्कार मिला और Wirtualna Polska पोर्टल के Top Seriale दर्शक सर्वेक्षण में भी यह विजेता रहा। The New York Times के माइक हेल ने इसे साल के बेहतरीन अंतरराष्ट्रीय शो की अपनी सूची में शामिल किया।

ईगल पुरस्कार समारोह में मंच से मिले समय का इस्तेमाल करते हुए कोखान्स्का-बायोन ने सत्ता में बैठे लोगों से समावेशी समाज बनाने की अपील की। बाद में पोलिश मीडिया ने इस सीरीज़ को Personal Assistance Act पर विधायी काम दोबारा शुरू होने से जोड़ा। इस विधेयक का मक़सद दिव्यांग लोगों को स्वतंत्र जीवन जीने का अवसर देना और उनकी देखभाल करने वालों को भी अपने लिए कुछ जगह देना है। टीम को शो लेकर सेज्म में आने का न्योता भी मिला। कोखान्स्का-बायोन ने ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम पर मौजूद बेटे को पालने के अपने अनुभव के बारे में बात की है, लेकिन साथ ही यह भी ज़ोर देकर कहा है कि किरदार उनका परिवार नहीं हैं। यह सीरीज़ अनुभव से प्रेरित है, मगर कल्पना के रूप में गढ़ी गई है—और दोनों के बीच की यह रेखा कायम रखती है।

इसी मंच पर तुलना के लिए सबसे स्वाभाविक नाम Atypical का है—ऑटिज़्म से ग्रस्त एक किशोर के बारे में नेटफ्लिक्स की अमेरिकी सीरीज़, जिसकी कहानी बड़े पैमाने पर लड़के के नज़रिए से कही गई थी। “The Mothers of Penguins” का ध्यान बच्चे के आसपास के वयस्कों पर और इस बात पर है कि निदान उनसे क्या मांगता है। इससे ज़्यादा करीबी मिसाल शायद हाविएर फेस्सेर की स्पैनिश फ़िल्म Campeones है, जहां कॉमेडी दिव्यांगता पर बनी कहानी को आगे बढ़ाती है, लेकिन दर्शकों से दया की मांग नहीं करती।

स्कूल कहानी का रुख़ क्यों बदल देता है

डिज़ाइन की भाषा में कहें तो पहले सीज़न से दूसरे तक का सफ़र आलोचक से रचयिता बनने का सफ़र है। माता-पिता का चलाया स्कूल अब किसी और के सिर नहीं मढ़ा जा सकता। Biegun Szczęścia का हर नियम उन्हीं का होगा—उन नियमों समेत, जो किसी को बाहर कर दें। इस आधार से लगता है कि सीज़न यह पड़ताल करेगा कि अपनापन देने की क़ीमत क्या होती है, जब किराया भी आपको देना हो और निरीक्षक को जवाब भी।

इससे कामा के लिए दांव भी नए सिरे से तय होते हैं। फाइटर किसी मुक़ाबले के लिए तय तारीख़ और तय अंत के साथ अभ्यास करता है। स्कूल का कोई अंत नहीं होता; वह हर सुबह फिर खुलता है। पोलैंड में जारी सारांश बच्चों के बड़े होने के साथ एक और दबाव का ज़िक्र करता है: उनके पहले गंभीर रिश्ते और यह सवाल कि माता-पिता उन्हें कितनी आज़ादी सौंप पाने का हौसला रखते हैं।

सीज़न एक ऐसा सवाल उठाता है, जिसका जवाब देना उसके लिए ज़रूरी नहीं: क्या कोई माता-पिता अपने बच्चे के लिए अपनापन देने वाली जगह बना सकते हैं, बिना ख़ुद वही संस्थान बने जिससे वे भागकर आए थे?

The Mothers of Penguins season 2, Netflix series
The Mothers of Penguins, season 2. Photo: K. Grabowska / Netflix

“The Mothers of Penguins” सीज़न 2: एपिसोड, रिलीज़ और कहां देखें

“The Mothers of Penguins” के दूसरे सीज़न के सभी छह एपिसोड 21 अक्टूबर, 2026 को नेटफ्लिक्स पर मूल पोलिश भाषा में रिलीज़ होंगे। पहला सीज़न भी छह एपिसोड का था और नवंबर 2024 में आया था। नेटफ्लिक्स की अपनी दर्शक सहभागिता रिपोर्ट के मुताबिक, यह पोलैंड में नेटफ्लिक्स की दैनिक टॉप 10 सूची में 55 दिन तक रहा और उस साल की दूसरी छमाही में इसे करीब 59 लाख बार देखा गया।

क्या “The Mothers of Penguins” सच्ची कहानी है? नहीं। यह काल्पनिक कहानी है, हालांकि कोखान्स्का-बायोन कह चुकी हैं कि इसकी जड़ें माता-पिता के रूप में उनके अपने अनुभव में हैं। क्या पहले सीज़न को देखना ज़रूरी है? नया सीज़न कहानी को करीब डेढ़ साल आगे ले जाता है, इसलिए नेटफ्लिक्स पर अब भी मौजूद पहले छह एपिसोड इसे समझने का सबसे अच्छा रास्ता हैं।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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