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Centauro रफ़्तार से भरी कसी हुई थ्रिलर है, पर किरदारों में इंजन जितना दम नहीं

डैनियल कैल्पारसोरो की 2022 की नेटफ्लिक्स फ़िल्म, फ्रेंच Burn Out का रीमेक, मुख्य भूमिका में आलेक्स मोनर।
Martha O'Hara
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फ़िल्म का नाम ही उसका इरादा बता देता है। Daniel Calparsoro की «Centauro» (2022) स्पेनिश एक्शन-क्राइम थ्रिलर है, जो Netflix पर आई और जिसकी अवधि IMDb के अनुसार एक घंटा उनतीस मिनट है। इतनी छोटी अवधि में कहानी को इधर-उधर भटकने की जगह नहीं मिलती। फ़िल्म सीधे रफ़्तार की ओर बढ़ती है और रुककर साँस लेने का वादा भी नहीं करती। सेंटौर आधा इंसान, आधा घोड़ा होता है, और यहाँ वही दोहरापन इंसान और मशीन के बीच दिखता है। स्पेनिश साइट Rock and Films ने अपनी समीक्षा का शीर्षक ही यही रखा है: «पैरों की जगह पहिए»।

कहानी का ढाँचा सीधा है। Rafa (Àlex Monner) को स्पीड रेसिंग की उस शुद्ध, दहकती अनुभूति की लत है, जो उसे और कहीं नहीं मिलती। उसके बच्चे की माँ Natalia (Begoña Vargas) ड्रग डीलरों के चक्कर में फँस जाती है, और Rafa उसे बचाने के लिए गाड़ी का एक्सेलेरेटर दबा देता है। कागज़ पर यह विचार काम का है। जो चीज़ Rafa की कमज़ोरी है, वही उसका हथियार बन जाती है। जिस नशे ने उसे बाकी दुनिया से काट रखा था, वही अब उसके परिवार तक पहुँचने का रास्ता है। फ़िल्म इस विरोधाभास को छूती ज़रूर है। पर उस पर टिकती नहीं।

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टिकने की फ़ुरसत उसके पास है भी नहीं। एक्शन, अपराध और थ्रिलर, तीनों खानों में फ़िल्म का वज़न एक ही तरफ़ झुका है, यानी गति की तरफ़। Espinof के Mikel Zorrilla ने इसे Netflix की एक «trepidante» स्पेनिश फ़िल्म कहा है, यानी ऐसी फ़िल्म जो हाँफती हुई तेज़ चाल से आगे बढ़ती है। Rotten Tomatoes पर दर्ज एक समीक्षा का सार भी लगभग यही है कि फ़िल्म जानती है कि वह क्या है और उसी का पूरा फ़ायदा उठाती है। मैं इस आकलन से सहमत हूँ, पर एक शर्त के साथ। अपनी हद पहचानने वाली फ़िल्म अक्सर उस हद से आगे जाने का जोखिम भी नहीं उठाती, और «Centauro» में यह साफ़ दिखता है। जहाँ एक मोड़ पर रुककर किरदार को साँस लेने देना फ़िल्म को कुछ और बना सकता था, वहाँ वह अगली दौड़ की ओर निकल जाती है।

«Centauro» मौलिक कहानी नहीं है। Wikipedia के अनुसार यह Yann Gozlan की 2017 की फ्रेंच फ़िल्म «Burn Out» का रीमेक है। रीमेक के साथ हमेशा एक सवाल चलता है कि नए संस्करण ने क्या जोड़ा। जिन दर्शकों ने फ्रेंच मूल देखी है, उनके लिए तुलना स्वाभाविक होगी। जिन्होंने नहीं देखी, उनके सामने यह एक सीधी-सादी स्पेनिश थ्रिलर है जो अपने पैरों पर खड़ी होने की कोशिश करती है। मेरे लिए असली परीक्षा यह रही कि फ़िल्म उधार की कहानी को कितना अपना बना पाती है। नतीजा मिला-जुला है। मैंने मूल फ़िल्म से कोई दृश्य-दर-दृश्य मिलान नहीं किया, इसलिए यह नहीं कह सकता कि कौन-सा हिस्सा कहाँ से आया। पर परदे पर जो दिखता है, उसमें बाहर से लिया हुआ ढाँचा और अपने ढंग का लहजा साथ-साथ चलते हैं।

अभिनय की बात करें तो फ़िल्म का बोझ Àlex Monner के कंधों पर है। Rafa के किरदार में दो चीज़ें साथ चलती हैं: रफ़्तार के लिए बेचैनी और एक पिता की ज़िम्मेदारी। Monner इन दोनों को एक ही चेहरे पर रखने की कोशिश करते हैं। वे हर बार कामयाब नहीं होते, क्योंकि पटकथा उन्हें भीतर उतरने के मौके कम देती है। फिर भी उनकी मौजूदगी में एक तनाव है जो फ़िल्म को बाँधे रखता है। वे उस आदमी जैसे लगते हैं जिसे शांत बैठना नहीं आता। और जब किसी फ़िल्म का नायक ही उसकी गति का सबसे बड़ा सबूत हो, तो यह काफ़ी है।

Begoña Vargas का काम इससे कठिन था। Natalia कहानी के केंद्र में है, फिर भी उसे लगभग पूरी तरह दूसरों की प्रतिक्रियाओं से गढ़ा गया है। वह वह वजह है जिसके लिए Rafa दौड़ता है, पर वह खुद क्या चाहती है, किससे डरती है, यह फ़िल्म बहुत कम बताती है। Vargas ने जो मिला उसे ईमानदारी से निभाया है, पर किरदार की रूपरेखा धुँधली रह जाती है। यहाँ कमी पन्नों पर लिखे किरदार में है, उसे निभाने वाली अभिनेत्री में नहीं। एक बच्चे की माँ, जो ख़तरनाक लोगों के बीच फँसी है, को ज़्यादा ठोस ज़मीन मिलनी चाहिए थी। उसे बचाने की दौड़ तभी असरदार बनती है जब हम उसे बचाने लायक इंसान की तरह जानते हों। अभी वह कहानी की धुरी तो है, पर अपनी कहानी की नायिका नहीं बन पाती।

कलाकारों की फ़ेहरिस्त में इसके बाद भी कई नाम हैं। Carlos Bardem ने Boro की भूमिका निभाई है। उनके साथ Abraham Pérez Fernández (Mateo), Édgar Vittorino (Carlos), Sebastian Ciontescu (Jairo), Anderson Brian González Montoya (Tico), Dollar Selmouni (Cortés), Big Lois (Valderrama) और Patricia Vico (Regina Costas) हैं। इतने नामों के बीच Bardem का चेहरा सबसे पहले पहचान में आता है, पर किरदारों को लिखने में वह मेहनत नहीं दिखती जो इतनी बड़ी टोली माँगती है। ज़्यादातर पात्र कहानी की ज़रूरतें पूरी करके हट जाते हैं। उनके नाम और भूमिकाएँ अलग-अलग हैं, पर दर्शक के मन में उनकी अलग छवि बहुत कम बनती है। नब्बे मिनट से कम में इतने चेहरों को गढ़ना आसान भी नहीं, पर तब सवाल यह उठता है कि इतने चेहरे चाहिए ही क्यों थे।

संगीत के मोर्चे पर Spotify पर «Centauro» नाम का एक एल्बम Carlos Jean के नाम से मिलता है, जिसमें «Centauro’s Theme 1», «Deep Marseille» और «Riot + Behind Me» जैसे ट्रैक हैं। शीर्षकों से अंदाज़ा होता है कि संगीत इलेक्ट्रॉनिक और रात की सड़क के मिज़ाज की तरफ़ झुका है, पर इससे ज़्यादा कहना, यानी कौन-सा टुकड़ा किस दृश्य में बजता है, बिना सुने ईमानदारी नहीं होगी। इतना ज़रूर है कि जिस फ़िल्म की पूरी ऊर्जा गति में लगी हो, वहाँ संगीत का काम माहौल को कसना ही होता है।

अब कमज़ोरियों पर आते हैं। कहानी का सबसे बड़ा दोष उसकी सादगी है। एक पिता, एक संकट में फँसी माँ और उसके पीछे लगे ड्रग डीलर: यह सब हम पहले भी देख चुके हैं, और फ़िल्म इसमें कोई नया मोड़ नहीं जोड़ती। Rafa की लत और उसकी पितृत्व-भावना के बीच जो टकराव फ़िल्म का सबसे दिलचस्प विचार हो सकता था, वह रेखाचित्र बनकर रह जाता है। यह नशा उसे बचाता है या बरबाद करता है, इस सवाल को फ़िल्म कभी ठीक से नहीं उठाती। नतीजा यह कि दाँव ऊँचे दिखते हैं, पर महसूस कम होते हैं। परिवार को बचाने की बेचैनी परदे पर तो है, दर्शक की छाती तक नहीं पहुँचती।

दर्शकों की राय भी इसी असमंजस को दोहराती है। IMDb पर रेटिंग 5.4/10 है, लगभग 1,800 वोटों के आधार पर। यह आँकड़ा न फ़िल्म को ख़ारिज करता है, न उसकी तारीफ़ करता है; बीच की उस जगह पर ठहर जाता है जहाँ “देखी जा सकती है” और “याद नहीं रहेगी” दोनों सच लगते हैं। वहीं एक दर्शक ने लिखा है कि यह मनोरंजक फ़िल्म है, जिसे पृष्ठभूमि में चलाकर भी देखा जा सकता है। टिप्पणी कठोर है, पर पूरी तरह बेबुनियाद नहीं। फ़िल्म ऐसी बनी है कि आधे ध्यान से भी उसका सूत्र पकड़ में आ जाता है, और यही उसकी सबसे बड़ी सीमा है।

फिर भी इसे सिरे से ख़ारिज करना मुझे अनुचित लगता है। थ्रिलर का पहला कर्तव्य दर्शक को बाँधे रखना है, और छोटी अवधि का फ़ायदा यह है कि फ़िल्म कभी बोझिल नहीं होती। उसमें कोई दिखावटी महत्वाकांक्षा नहीं है। वह जो वादा करती है, उतना निभा देती है, और कभी-कभी यही ईमानदारी काफ़ी होती है। नब्बे मिनट से कम की फ़िल्म से आप अपेक्षा भी क्या रखेंगे, सिवाय इसके कि वह समय बरबाद न करे। स्ट्रीमिंग के इस दौर में, जहाँ हर हफ़्ते दर्जनों नई फ़िल्में कतार में खड़ी होती हैं, यह बात छोटी नहीं है।

अंत में, «Centauro» की कहानी उसकी गाड़ी से हल्की पड़ जाती है। Monner की मेहनत और छोटी, कसी हुई अवधि उसके पक्ष में जाती हैं। पतली पटकथा, अधूरे किरदार और रीमेक होने की छाया उसके ख़िलाफ़। जिस शाम आप Netflix पर कुछ तेज़ और बिना उलझन वाला देखना चाहें, उस शाम यह ठीक बैठेगी। जो किसी बड़े विचार या गहरे किरदारों की तलाश में हैं, उन्हें यहाँ कम मिलेगा, और उन्हें शायद पहले से पता भी होगा।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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