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Fenced In: शोर को हँसी समझ बैठी ब्राज़ीलियाई कॉमेडी

2022 में रॉबर्टो सैंटुची की फ़िल्म, जिसमें लिएंद्रो हासुम ढोल बजाते पड़ोसियों से जूझते हैं।
Martha O'Hara
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रॉबर्टो सैंटुसी की ब्राज़ीली कॉमेडी «Fenced In» (पुर्तगाली मूल नाम «Vizinhos», यानी «पड़ोसी») वॉल्टर की खोपड़ी के भीतर से शुरू होती है। Decider के समीक्षक के अनुसार वहाँ नसें चिंगारियाँ छोड़ती हैं और कान की नन्ही हड्डियाँ टूटकर दिमाग चीर देने को तैयार लगती हैं। इस दृश्य से दर्शक को शुरुआत में ही वॉल्टर की चुभन समझ आ जाती है। पर समीक्षक यह भी कहते हैं कि फ़िल्म वॉल्टर की शोर-संवेदनशीलता की इससे ठोस वजह कभी नहीं देती। शुरुआत में ही फ़िल्म आवाज़ बहुत ऊँची कर देती है और फिर पूरे समय उसे नीचे नहीं लाती।

नाम बदलने की वजह भी फ़िल्म के बारे में कुछ कहती है। Decider के अनुसार «Fenced In» नाम इसलिए पड़ा कि «Vizinhos» का सीधा अनुवाद «Neighbors» होता, और इस नाम की फ़िल्में पहले ही बहुत बन चुकी हैं। समीक्षक गिनाते हैं: सेठ रोगन और रोज़ बर्न वाली दो कॉमेडी, बस्टर कीटन की क्लासिक और बेलुशी-एक्रॉयड की फ़िल्म। उसी समीक्षक ने इस कहानी को एक घिसा-पिटा ढाँचा कहा है: नेड और मॉड फ़्लैंडर्स जैसा शांत जोड़ा पड़ोस की चीख़-पुकार वाली अफ़रा-तफ़री में आ गिरता है। ऐसे ढाँचे से वे बस दो-तीन ताज़ा हँसियों की उम्मीद रखते हैं।

नर्वस ब्रेकडाउन के बाद वॉल्टर (लेआंद्रो हासुम) शहर छोड़कर देहात में बसता है। Decider के मुताबिक़ डॉक्टर ने साफ़ कह दिया था कि शहर नहीं छोड़ा तो उसकी जान को ख़तरा है। उसके साथ उसकी पत्नी जोआना (जूलिया रबेलो) है। Decider के वर्णन में दोनों बाग़ लगाते हैं और मुर्ग़ियाँ पालते हैं, पर बग़ल में कौन रहता है, यह पहले नहीं जाँचते, और यहीं से फ़िल्म का पूरा खेल शुरू होता है। पड़ोस में टोनीन्यो (मौरीसियो मानफ्रिनी) रहता है, जो सांबा संगीतकार है। film-rezensionen.de के मुताबिक़ वह सांबा स्कूल चलाता है। Decider के अनुसार उसके घर दर्जनों ढोलकिये घंटों रियाज़ करते हैं, और यह रियाज़ 125 डेसिबल तक पहुँचता है। उसकी पत्नी केली (मार्लेई सेवादा) पूर्व सौंदर्य-रानी है, और Decider उसकी तीखी आवाज़ के सामने Peg Bundy को भी शालीनता की मिसाल बताता है। एक तरफ़ 125 डेसिबल का रियाज़, दूसरी तरफ़ वह आदमी जिसे अपनी खोपड़ी के भीतर नसें चटकती महसूस होती हैं। फ़िल्म का सारा हास्य इसी टकराव से निकलता है, और इसके अलावा उसके पास कोई दूसरा साधन नज़र नहीं आता।

विचार पुराना है। बेचैन, सलीक़ेदार आदमी को हुल्लड़बाज़ पड़ोसी के सामने खड़ा करने वाली कॉमेडी दुनिया भर में बनती रही है। film-rezensionen.de के समीक्षक ने नोट किया कि यहाँ किरदार जान-बूझकर अतिरंजित रखे गए हैं: एक तरफ़ चिड़चिड़ा, नियम-पसंद वॉल्टर और दूसरी तरफ़ शोर मचाता, दिलदार टोनीन्यो। दोनों का टकराना तय है, और फ़िल्म उसे छिपाने की कोशिश भी नहीं करती। टकराव की बुनियाद ठीक है, पर उस पर खड़ी फ़िल्म उससे आगे नहीं बढ़ती। वही समीक्षक मानता है कि इस सबसे मज़ा आना चाहिए था, और फ़िल्म ठीक यहीं लड़खड़ाती है।

सबसे कमज़ोर कड़ी चुटकुलों की बनावट है। Decider के मुताबिक़ पड़ोसियों से शिकायत करने गया वॉल्टर बिल्ली की गंदगी में लथपथ हो जाता है, तोता उसकी जीभ पर जा चिपकता है, और आस-पास कई ढोल-टोलियाँ बजती रहती हैं। Common Sense Media के अनुसार तोते के काटने से जीभ बेतुकी हद तक खिंच जाती है और सब घबराकर चीख़ते हैं। उसी स्रोत में दर्ज है कि वॉल्टर के हाथों तोते की गर्दन टूटी मान ली जाती है और फिर ज़रूरत से तगड़े ईकेजी झटके से वह जी उठता है, और परिवार की मुखिया वॉल्टर की ट्रैंक्विलाइज़र बंदूक़ से मरी मान ली जाती है। ये सब स्लैपस्टिक हैं, और स्लैपस्टिक अपने आप में बुरी चीज़ नहीं है। पर Decider की टिप्पणी है कि फ़िल्म उसी तरह रंगीन है जैसे सिर पर पेंट की बाल्टी उँडेल दी जाए, और वह इसे चीख़ती-चिल्लाती और खीझ पैदा करने वाली फ़िल्म कहता है।

फ़िल्म का बोझ लेआंद्रो हासुम के कंधों पर है, और film-rezensionen.de के समीक्षक ने भी लिखा कि उन पर यह इल्ज़ाम नहीं लग सकता कि उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दिया। वे बार-बार आपे से बाहर होते हैं और पड़ोसी की हर चूक को निजी युद्ध-घोषणा की तरह लेते हैं। Letterboxd पर एक दर्शक ने उन्हें «हमारा एडम सैंडलर» कहा है। पर वॉल्टर का ज़्यादातर चित्रण झुँझलाहट के इर्द-गिर्द घूमता है, और उसकी घबराहट शोर के बीच कम ही सुनाई देती है। दर्शक उसके दर्द से कम और उसके ग़ुस्से से ज़्यादा परिचित हो पाता है। जोआना के साथ दवा वाला प्रसंग भी इसी तरह बरता गया है। Decider के मुताबिक़ वह वॉल्टर से और शामक दवाएँ लेने को कहती है, तो वॉल्टर चेताता है कि उनसे वह यौन रूप से अक्षम हो जाएगा। Common Sense Media दर्ज करता है कि नसों की जिस दवा पर वॉल्टर है, उसके इरेक्टाइल डिसफ़ंक्शन वाले असर पर फ़िल्म में मज़ाक़ चलते हैं। यह मज़ाक़ पति-पत्नी के रिश्ते का नाज़ुक कोना छूता है, पर फ़िल्म उसे एक और हँसी की गुंजाइश की तरह इस्तेमाल करती है।

फ़िल्म में एक संदेश की झलक भी है। ReadySteadyCut के समीक्षक का पढ़ना है कि वॉल्टर ख़ुद को तनाव से निपटने में नाकाबिल मानकर बाहरी आवाज़ों को ही अपनी मुसीबत ठहराता है। कहानी यह सबक़ देना चाहती है कि हम ख़ुद पर काम करके बाहरी चीज़ों को दोष दिए बिना तनावमुक्त जी सकते हैं। पर वही समीक्षक साफ़ मानता है कि इस विषय को लेकर वह ख़ुद भी उदारता बरत रहा है, क्योंकि संदेश मुश्किल से उभर पाता है। मेरी राय भी यही है। जब पूरी फ़िल्म ढोल के शोर और अफ़रा-तफ़री पर चलती है, तो अंत में «ख़ुद को बदलो» की सीख खोखली लगती है। ReadySteadyCut के शब्दों में निर्देशक ने कहानी और संवाद की जगह अराजकता चुनी है।

कुछ मज़ाक़ अपने ही किरदारों पर हँसते हैं। Common Sense Media के अनुसार एक रात्रिभोज में वॉल्टर को ग़लतफ़हमी हो जाती है कि टोनीन्यो इशारा कर रहा है कि वे पति-पत्नी साथी बदलने वाले जोड़े हैं और वॉल्टर और जोआना के साथ सोना चाहते हैं। एक और जगह पड़ोसियों के बाहर संबंध बनाने की आवाज़ों से वह रात भर जागता रहता है। Decider ने उस दृश्य को भारी बताया है जिसमें पड़ोसी उसे «वैली» कहकर बुलाते हैं और एक दादी बार-बार उसे «सीधा-सादा» ठहराती है। ऐसे मज़ाक़ों का निशाना वॉल्टर का स्वभाव नहीं, उसकी बीमारी बन जाती है। और जिस आदमी की नसें पहले ही दृश्य में तार की तरह खिंची दिखाई गई थीं, उसके साथ फ़िल्म का यह बर्ताव देखकर दर्शक का उससे लगाव घटने लगता है।

चीख़ पर हँसी तब आती है जब उससे ठीक पहले कुछ पल सन्नाटा रहा हो, पर यहाँ हर दृश्य एक ही ऊँचाई पर चलता है और ऊँचाई बदले बिना कुछ भी जल्दी थका देता है। शुरुआती खोपड़ी वाले दृश्य में शोर को वॉल्टर के शरीर पर चोट की तरह दिखाया गया था, लेकिन उसके बाद फ़िल्म उस विचार को आगे नहीं बढ़ाती और सिर्फ़ आवाज़ का स्तर चढ़ाती जाती है। ReadySteadyCut के समीक्षक ने इसे ऐसी फ़िल्म कहा है जिसे घर में पृष्ठभूमि-शोर के तौर पर चला दिया जाए, और यह बात उन्होंने शिकायत के लहजे में कही है। पड़ोसी-झगड़े की इस कहानी में ऐसा कुछ नहीं जो इसी विषय की दूसरी फ़िल्मों में पहले न दिख चुका हो, और Decider ने तो शीर्षक की बहस में ही उन फ़िल्मों के नाम गिना दिए थे। तोते की खिंची जीभ, ईकेजी का झटका और ट्रैंक्विलाइज़र वाला हादसा फ़िल्म ख़त्म होने के बाद भी याद रहते हैं, और Decider जिसे चीख़ती-चिल्लाती फ़िल्म कहता है, उसकी छवि ज़्यादातर इन्हीं दृश्यों से बनती है।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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