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रेमंड एंड रे दो भाइयों के लिए अच्छी कब्र खोदती है, फिर उसे बहुत सारे मेहमानों से भर देती है

रोड्रिगो गार्सिया की रूखी ट्रैजिकॉमेडी (2022) ईवान मैकग्रेगर और एथन हॉक के कंधों पर टिकी है।
Martha O'Hara
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बारिश वाली एक देर रात रेमंड गाड़ी चलाकर एक सुनसान केबिन तक पहुँचता है। उसे अपने आधे भाई रे को बताना है कि उनके पिता बेन हैरिस नहीं रहे। पिता एक ही था, माँएँ अलग। रोड्रिगो गार्सिया की फ़िल्म “रेमंड एंड रे” इसी ख़बर से शुरू होती है, और इसके बाद सवाल सीधा है: जिस आदमी ने बचपन में दोनों बेटों को चोट पहुँचाई, उसके मर जाने पर वे क्या महसूस करें? फ़िल्म इसका जवाब बाहर से नहीं थमाती। वह भाइयों को पिता की ही कब्र खोदने भेज देती है।

दोनों की ज़िंदगियाँ अलग राहों पर निकल गईं। रेमंड (ईवान मैकग्रेगर) एक नीरस दफ़्तरी नौकरी में है, उसका तलाक़ चल रहा है, और शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोप में पकड़े जाने के बाद उसका ड्राइविंग लाइसेंस भी छिन चुका है। रे (एथन हॉक) हेरोइन की लत से उबर रहा है। कभी वह ट्रंपेट बजाता था, पर पिता उस पर यह साज़ सीखने का दबाव डालते थे, इसलिए उसने पिता को चिढ़ाने के लिए ही बजाना छोड़ दिया। दोनों भाई क़रीब पाँच साल से नहीं मिले थे, और इस दूरी की जड़ में वही ज़्यादतियाँ थीं जो पिता ने उन पर बचपन में की थीं। रे जाने से हिचकता है। तब रेमंड कबूल करता है कि लाइसेंस जाने के कारण वह अकेले नहीं जा सकता, और रे साथ चलने को राज़ी हो जाता है। एक छिना हुआ लाइसेंस पाँच साल बाद दो भाइयों को एक ही गाड़ी में बिठा देता है। इस छोटे-से मोड़ में उनका पूरा रिश्ता झलक जाता है। ख़राब पिता की छाया में पले दोनों आदमियों के पास हास्यबोध अब भी बचा है, और पूरी फ़िल्म में वही उनका सबसे भरोसेमंद सहारा है।

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असली झटका अंतिम संस्कार वाली जगह पर लगता है। हैरिस की आख़िरी इच्छा थी कि उन्हें निर्वस्त्र दफ़नाया जाए और कब्र उनके बेटे अपने हाथों से खोदें। मरा हुआ पिता अब भी हुक्म चला रहा है। उसकी माँग इतनी बेतुकी है कि हँसी छूटती है, पर उसके पीछे की चोट इतनी असली है कि हँसी गले में अटक जाती है। फ़िल्म इन दोनों के बीच चलने की कोशिश करती है। गार्सिया ने पटकथा भी ख़ुद लिखी है, और कई जगह मज़ाक अगले ही पल मातम में घुल जाता है और बीच का जोड़ दिख जाता है। कहीं लगता है कि निर्देशक हँसाना चाहता है, कहीं रुलाना, और दर्शक को हर बार ठहरकर तय करना पड़ता है कि वह क्या करे। मुझे यह लड़खड़ाहट निर्देशन की चूक से ज़्यादा विषय की अपनी बनावट लगती है। ऐसे पिता के लिए कोई एक सुर शायद बना ही नहीं।

पिता के घर में उनकी नर्स और प्रेमिका लुसिया (मारिबेल वेर्दू) दोनों बेटों को एक-एक डिब्बा देती है। रेमंड के डिब्बे से गुड़ियाँ, आइस स्केट्स और कंडोम निकलते हैं। इन चीज़ों का आपस में कोई साफ़ रिश्ता नहीं बनता, और ये पिता के बारे में कुछ बताने के बजाय पहेली को और उलझा देती हैं। रे के डिब्बे में वही ट्रंपेट है जिसके बारे में उसे लगता था कि पिता ने किशोरावस्था में उसे तोड़ डाला था। लुसिया बताती है कि पिता ने कुछ हफ़्ते पहले उसकी मरम्मत करवाई थी। फ़िल्म का सबसे असरदार पल यही है, क्योंकि यहाँ कोई किरदार कुछ समझाने नहीं बैठता; बस एक मरम्मत किया हुआ साज़ रखा है। रे जिस चीज़ से नफ़रत करता आया, वह अब उसके हाथ में माफ़ीनामे जैसी कोई चीज़ बनकर लौटी है। पर पिता सफ़ाई देने के लिए मौजूद नहीं हैं, इसलिए रे का ग़ुस्सा हवा में टँगा रह जाता है। वह ट्रंपेट लौटाए तो किसे, और रख ले तो किस हक़ से? एथन हॉक इस उलझन को ऊँचे सुर में नहीं खेलते। उनका रे इसे चुपचाप अपने साथ ढोता है, और इसी सादगी की वजह से उसकी दुविधा पर यक़ीन होता है।

लुसिया का हिस्सा फ़िल्म में सबसे कमज़ोर ढंग से जुड़ता है। अंतिम दर्शन के समय वह हैरिस की कमीज़ की जेब में अपनी एक नग्न तस्वीर रख जाती है, और उसके जाने के बाद रेमंड वह तस्वीर चुपचाप उठा लेता है। बाद में रेमंड उसके साथ उसके घर जाता है, दोनों एक-दूसरे को चूमते हैं, और तस्वीर मिलने पर लुसिया दरवाज़े की ओर बढ़ती है, पर फिर दरवाज़ा बंद कर देती है और दोनों के बीच संबंध बनता है। इस प्रसंग में एक अजीब, लगभग अनकही तकलीफ़ है। फिर भी यह फ़िल्म की रफ़्तार तोड़ देता है। कहानी भाइयों और पिता से हटकर एक ऐसे रिश्ते की ओर मुड़ जाती है जिसे पनपने की जगह ही नहीं मिलती। वेर्दू अपने हिस्से की गरिमा बनाए रखती हैं, पर किरदार इतना हल्का लिखा गया है कि वह रेमंड की कहानी को आगे बढ़ाने का ज़रिया ज़्यादा लगता है, अपने आप में एक पूरा इंसान कम।

खुदाई की जगह पर फ़िल्म का दायरा फैलता है। रे की मुलाक़ात किएरा (सोफ़ी ओकोनेडो) से होती है, जिसने अस्पताल में हैरिस के आख़िरी दिनों में उनकी मदद की थी। वह बताती है कि हैरिस मन शांत करने के लिए एक ही वाद्य-धुन सुना करते थे, और रे उसे अंतिम संस्कार में आने का न्योता देता है। खुदाई के दौरान रे और रेवरेंड वेस्ट (वोंडी कर्टिस-हॉल) के बीच हैरिस की धार्मिक आस्था पर बात होती है। फिर लुसिया अपने बेटे साइमन के साथ पहुँचती है और बताती है कि साइमन भी इन दोनों का भाई है। रे उस धुन का नाम जानने के लिए हैरिस के फ़ोन के बारे में पूछता है, तो साइमन कहता है कि उसने फ़ोन की मेमोरी मिटा दी है। एक सुराग यहीं बुझ जाता है। इसके बाद दो जुड़वाँ भाई आते हैं और बताते हैं कि वे भी हैरिस के बेटे हैं। सारे भाई बारी-बारी से कब्र खोदते हैं।

यह दृश्य बिना एक भी भारी संवाद के बहुत कुछ कह देता है। जिस पिता के कारण दो बेटे बरसों एक-दूसरे से कटे रहे, उसके छिपे हुए बेटे एक-एक करके सामने आते जाते हैं, और आपस में अजनबी ये सब लोग अब एक ही गड्ढे में फावड़ा चला रहे हैं। एक, दो, फिर और बेटे। गिनती ही पिता के बारे में सब बता देती है, और यहाँ फ़िल्म की हँसी और उसकी कड़वाहट एक साथ काम करती हैं। इसी समारोह में रे किएरा से अपनी दिवंगत पत्नी के अंतिम संस्कार की बात भी करता है, और कुछ पल के लिए फ़िल्म पिता से हटकर रे के अपने शोक की ओर मुड़ती है।

दफ़नाने के बाद रेवरेंड वेस्ट रेमंड से कुछ शब्द कहने को कहते हैं। रेमंड बोल नहीं पाता। वह दौड़कर गाड़ी तक जाता है और बंदूक निकाल लाता है। पहले वह उसे अपनी ओर तानता है, फिर ज़मीन में उतर चुके ताबूत पर गोली चला देता है। लुसिया बाद में उसे सँभालती है। इस पूरे हिस्से में ईवान मैकग्रेगर का काम सबसे भरोसेमंद है। वे रेमंड को चीखते-चिल्लाते आदमी की तरह नहीं निभाते। उनके रेमंड ने बरसों सब कुछ दबाकर रखा है और फिर एक पल में वह बिखर जाता है; बिखरने से ठीक पहले उसके चेहरे की थकान सबसे ज़्यादा कहती है। रे का जवाब अलग है। वह अपना ट्रंपेट उठाता है और अंतिम संस्कार में एक धुन बजाता है। एक भाई शब्दों में अटककर बंदूक तक पहुँच जाता है, दूसरा बरसों से छूटे साज़ पर होंठ रख देता है। दोनों कलाकार मुझे तब सबसे अच्छे लगते हैं जब ये भाई बिना कुछ कहे एक ही क़तार में खड़े दिखते हैं, एक हथियार के साथ और दूसरा साज़ के साथ, पर दोनों एक ही बोझ उतारते हुए। आख़िर में रेवरेंड हर बेटे को पिता का लिखा एक ख़त देते हैं।

106 मिनट की अवधि के बावजूद बीच का हिस्सा खिंचा हुआ लगता है। गति धीमी है, पर यह धीमापन हमेशा गहराई नहीं देता, कई बार सिर्फ़ ठहराव बनकर रह जाता है। रे का ट्रंपेट बजाना अपनी जगह ठीक बैठता है, लेकिन उसके बाद कहानी को कोई ठोस ठिकाना नहीं मिलता। ख़त और कब्र पर चली गोली जैसे बड़े क्षणों को उतनी जगह नहीं मिलती जितनी उन्हें चाहिए थी। टॉड लूइसो (कैनफ़ील्ड), टॉम बॉवर (हैरिस) और बाकी सहायक कलाकारों के हिस्से छोटे हैं, और फ़िल्म उन्हें इतना नहीं देती कि वे याद में टिकें। पिता की गैरमौजूदगी ही फ़िल्म का विषय है, इसलिए आसपास के लोगों को थोड़ा और ठोस, थोड़ा और अपना होना चाहिए था।

फ़िल्म का विश्व प्रीमियर 12 सितंबर 2022 को टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में हुआ। 14 अक्टूबर को यह चुनिंदा सिनेमाघरों में लगी और 21 अक्टूबर को Apple TV+ पर आ गई। समीक्षाएँ एक-सी नहीं रहीं। एक ब्रिटिश समीक्षा ने इसे मैकग्रेगर और हॉक की प्रतिभा के साथ न्याय न करने वाली हल्की कॉमेडी-ड्रामा कहा, जबकि रॉजर एबर्ट की साइट पर ब्रायन टैलेरिको ने उस सवाल पर ध्यान दिया जो फ़िल्म के मूल में है: जब बस इतना बदला हो कि जिसने ज़िंदगी बिगाड़ी वह अब जीवित नहीं है, तो मन को चैन कैसे मिले। मेरी राय इन दोनों के बीच कहीं ठहरती है। फ़िल्म बड़ी नहीं है, पर जिस सवाल को वह उठाती है, उससे बचकर निकलना आसान नहीं।

“रेमंड एंड रे” आपको भीतर तक हिला देने वाली फ़िल्म नहीं है। फिर भी मैकग्रेगर और हॉक की जोड़ी, ट्रंपेट वाला डिब्बा और कब्र खोदते भाइयों की क़तार इसे देखने लायक बनाते हैं। जो दर्शक किसी ऐसे रिश्ते से गुज़रे हैं जिसमें माफ़ी माँगने वाला पहले ही जा चुका हो, उन्हें इसमें अपनी झलक मिलेगी। बाक़ी लोगों को एक असमान, पर ईमानदार और जगह-जगह सच्ची फ़िल्म मिलेगी।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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