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The Last Mercenary: वैन डैम का बेतरतीब मगर दिलचस्प एक्शन-कॉमेडी तमाशा, जो तकनीक से नहीं, मस्ती से जीतता है

डेविड शारहोन की 2021 की फ्रेंच एक्शन कॉमेडी तर्क की जगह हंसी और पेसमेकर वाले बेतुके मज़ाक पर टिकी है।
Martha O'Hara
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एक बुज़ुर्ग जासूस बरसों की गुमनामी छोड़कर फ्रांस लौटता है, क्योंकि जिस बेटे से वह कभी मिला ही नहीं, उसे मुसीबत से निकालना है। The Last Mercenary की कहानी बस इतनी है, और पहली नज़र में इससे ज़्यादा की उम्मीद भी नहीं बनती। डेविड शार्होन की यह फ्रेंच एक्शन कॉमेडी 30 जुलाई 2021 को नेटफ्लिक्स पर आई। पटकथा शार्होन ने इस्माइल सी सावाने के साथ लिखी है।

रिचर्ड ब्रुमेर (जीन-क्लॉड वैन डैम) सरकारी खुफ़िया सेवा का पुराना एजेंट है। एक पुराने अभियान के दौरान उसका रिश्ता अपने दोस्त जूआर की पूर्व पत्नी से बना था। उसी से बेटा आर्चिबाल्ड अल महमूद (समीर देकाज़ा) पैदा हुआ। माँ ने सरकार से दो चीज़ें माँगी थीं: बेटे के लिए पैसा और उसकी देखभाल करने वाला कोई इंसान। यह ज़िम्मा एजेंट फ़र्नां को मिला। आर्चिबाल्ड बरसों उसी को अपना पिता मानता रहा। असली पिता का नाम तक उसने कभी नहीं सुना था।

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संकट तब शुरू होता है जब मंत्री सिवार्दिये को पता चलता है कि एक फ़र्ज़ी कर्मचारी सालों से आर्चिबाल्ड को पैसा भेज रहा है। वे भुगतान बंद करवा देती हैं। पैसे के साथ आर्चिबाल्ड की सुरक्षा भी चली जाती है, और सरकारी एजेंट उसके पीछे पड़ जाते हैं। काग़ज़ों में उसे हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी का वांछित अपराधी बता दिया जाता है। जब रिचर्ड को इसकी ख़बर मिलती है, वह बेटे को छुड़ाने निकल पड़ता है। इस हिस्से में हँसी और ख़तरा एक साथ चलते हैं, और फ़िल्म यहीं सबसे ज़्यादा जीवंत है।

वैन डैम यहाँ अपनी पुरानी छवि के साथ हल्का मज़ाक करते हैं। वे अपनी उम्र और अपनी शोहरत, दोनों को पर्दे पर काम में लाते हैं। रिचर्ड बेटे को बचा लेता है, पर अपना असली परिचय नहीं देता और जॉर्ज नाम की आड़ ले लेता है। जो आदमी एजेंटों की पूरी टोली से भिड़ सकता है, वही पिता कहलाने के सामने झिझक जाता है। फ़िल्म का सबसे मानवीय क्षण यही है। वैन डैम के पुराने प्रशंसकों को यह देखकर अच्छा लगेगा कि ठहरे हुए, थोड़े थके किरदार में भी वे पर्दे पर वज़न रखते हैं।

«बिग मैक» नाम का उपकरण कहानी की धुरी है। शुरू में उसी की वजह से फ़र्नां का पेसमेकर बिगड़ता है और उसे दिल का दौरा पड़ता है। आख़िर में रिचर्ड उसी उपकरण से इमारत की बिजली गुल कर देता है और निकल भागता है। जो चीज़ शुरुआत में हादसे की वजह बनती है, वही अंत में बच निकलने का औज़ार बन जाती है। पटकथा का यह सबसे साफ़-सुथरा जोड़ है, और इसमें कॉमेडी व थ्रिलर का मेल सबसे अच्छी तरह बैठता है।

आर्चिबाल्ड के किरदार में समीर देकाज़ा पर भावनाओं का सबसे ज़्यादा बोझ है। एक झटके में उस नौजवान की पूरी दुनिया उलट जाती है। जिसे वह पिता मानता था, उसे दिल का दौरा पड़ चुका है। जो असली पिता है, वह झूठे नाम के पीछे छिपा बैठा था। सच खुलने पर उसे धोखा महसूस होता है, और यह प्रतिक्रिया बनावटी नहीं लगती। रिचर्ड की यादों में पत्नी का उँगली पर लॉकेट घुमाना और अंतिम संस्कार में किसी अजनबी का उसे ढाढ़स बँधाना, ये दोनों प्रसंग पिता-पुत्र के रिश्ते को पहली बार ठोस ज़मीन देते हैं। आर्चिबाल्ड समझता है कि उस दिन उसे सँभालने वाला आदमी रिचर्ड ही था, यानी उसे कभी पूरी तरह छोड़ा नहीं गया था।

सहायक कलाकारों की सूची लंबी है। अल्बान इवानोव अलेक्सांद्र लाज़ार बने हैं, असा सिला दलीला, एरिक जूडोर पोल लज़ूर, पैट्रिक तिमसित कमांडेंट जूआर, म्यू-म्यू मार्गरीट और वालेरी कैप्रिस्की मंत्री सिवार्दिये। फ्रेंच सिनेमा के इतने जाने-पहचाने चेहरे एक ही फ़िल्म में देखकर फ़िल्म का मिज़ाज हल्का रहता है। पर कई किरदारों को कहानी में इतनी जगह नहीं मिलती कि उनके कलाकार अपनी छाप छोड़ सकें। कमांडेंट जूआर को ही लीजिए। रिचर्ड के बचकर निकलने के बाद भी वह अड़ा रहता है कि पुराने अभियान «कप-एंड-बॉल» के हिसाब के लिए रिचर्ड को पकड़ना ही पड़ेगा। इस टकराव में दो पुराने दोस्तों के बीच की खटास भरी जा सकती थी, पर फ़िल्म उसे कुछ दृश्यों में निपटा देती है।

सबसे बड़ी कमज़ोरी पटकथा की है। रिचर्ड का राज़ खुलने वाला भावनात्मक मोड़ बहुत जल्दी निकल जाता है। यहाँ रुककर दोनों के बीच की दूरी को महसूस कराया जा सकता था। इसके बजाय कहानी सीधे अगले पीछा करने वाले दृश्य की ओर दौड़ पड़ती है। सरकारी साज़िश का ढाँचा भी पहचाना हुआ है: भ्रष्ट मंत्री, दबी हुई फ़ाइलें, बेक़सूर नौजवान। ऐसी कहानियाँ हम पहले भी देख चुके हैं। रिचर्ड का एक राज़ी मंत्री को साथ ले जाना इस पुराने ढाँचे में थोड़ी ताज़गी लाता है, पर वह भी ज़्यादा दूर तक नहीं चलता।

एजेंटों से रिचर्ड की लंबी भिड़ंत कई जगह खिंच जाती है। एक्शन के बीच चुटकी अच्छी लगती है, पर एक ही ढंग का मज़ाक बार-बार आए तो हँसी चुक जाती है। रफ़्तार इससे गिरती है, और मैं कुछ जगह घड़ी देखने लगा।

आलोचकों की राय भी बँटी रही। रॉटन टोमैटोज़ पर 26 समीक्षाओं में से 58 प्रतिशत सकारात्मक हैं और औसत रेटिंग 10 में 5.3 है। मेटाक्रिटिक पर 9 आलोचकों के आधार पर फ़िल्म को 100 में 48 अंक मिले हैं, यानी «मिली-जुली या औसत» समीक्षाएँ। मेरा अनुभव भी इन्हीं के आसपास बैठता है।

आख़िरकार The Last Mercenary छुट्टी की किसी शाम बिना ज़्यादा उम्मीद के देखने लायक फ़िल्म है। वैन डैम की मौजूदगी, फ्रेंच कलाकारों की बेफ़िक्र रंगत और «बिग मैक» वाला शरारती विचार इसे देखने की वजह देते हैं। मुझे सबसे ज़्यादा खटका यह कि पिता और बेटे का जो रिश्ता फ़िल्म की जान बन सकता था, पटकथा उसे आधा-अधूरा छोड़कर आगे बढ़ जाती है।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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