खेल

मॉरीसियो पोचेटिनो: हैरी केन को गढ़ने वाले कोच अब 2030 तक अमेरिका के साथ

Penelope H. Fritz
हमें Google पर जोड़ें
मॉरीसियो पोचेटिनो
मॉरीसियो पोचेटिनो
Photo: Bryan Berlin / CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons
जन्म2 मार्च 1972
Santa Fe Province
पेशाफ़ुटबॉल कोच
खिताबLigue 1 2021 · फ्रांस कप 2020 · Copa del Rey ×2 · अर्जेंटीना कप 1990 · चैंपियन्स ट्रॉफी
व्यक्तिगत पुरस्कारलंदन फुटबॉल अवार्ड्स वर्ष का प्रबंधक · ट्रफ़े डेस चैंपियन्स · अर्जेंटीना प्राइमरा डिभिजन प्लेयर ऑफ द ईयर

सिएटल में जब बेल्जियम स्कोरबोर्ड पर आगे निकलता जा रहा था और घरेलू विश्व कप हाथ से फिसल रहा था, तब मॉरीसियो पोचेटिनो साइडलाइन पर खड़े थे और NBC के शब्दों में उलझन में दिख रहे थे। एक महीने से भी कम समय बाद अमेरिकी फ़ुटबॉल महासंघ ने फिर भी उन्हें नया अनुबंध दे दिया, जो पहले से लंबा है और जिसका दायरा अब युवा फ़ुटबॉल और प्रशिक्षकों की पढ़ाई तक फैला है। जिस कोच की पहचान ऐसी टीमों से बनी जो मंज़िल से एक क़दम पहले रुक गईं, उसके लिए यह हस्ताक्षर ही असली मोड़ है: एक देश अपने निर्माता से कह रहा है कि इमारत पूरी होने तक रुको।

निर्माता की यह पहचान उन्होंने ख़ुद नहीं गढ़ी। यह अर्जेंटीना के सांता फ़े प्रांत के छोटे से खेतिहर क़स्बे मर्फी से उनके साथ चली आ रही है, जहाँ उनके दादा क़स्बे के शेरिफ़ थे। “एल शेरिफ़” उपनाम वहीं से आया, जिसे बाद में स्पेन के ड्रेसिंग रूम ने अपना लिया। उनका जन्म वहीं हुआ और किशोर उम्र में वे रोसारियो के क्लब न्यूवेल्स ओल्ड बॉयज़ की युवा अकादमी में पहुँचे, जहाँ उस समय मार्सेलो बिएल्सा स्थानीय लड़कों के एक समूह को चैंपियन टीम में बदल रहे थे।

उस टीम में वे सेंटर-बैक थे। उन्होंने 1990-91 का अर्जेंटीनी ख़िताब जीता और 1992 के कोपा लिबर्टाडोरेस फ़ाइनल तक पहुँचे। इसके बाद वे बार्सिलोना के क्लब एस्पेनयॉल गए, जहाँ करियर का बड़ा हिस्सा बिताया और 2000 तथा 2006 में कोपा डेल रे जीता। बीच में वे पेरिस सेंट-जर्मेन और बोर्डो के लिए भी खेले। अर्जेंटीना के लिए उन्होंने 20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। अंग्रेज़ प्रशंसक जिस पल को आज भी दोहराते हैं, वह 2002 विश्व कप में जापान के सैप्पोरो का है: उन्होंने पेनल्टी क्षेत्र में माइकल ओवेन को गिराया और डेविड बेकहम ने वह पेनल्टी गोल में बदली, जिसने मैच का फ़ैसला किया।

कोचिंग करियर संकट के बीच शुरू हुआ। जनवरी 2009 में एस्पेनयॉल ने उन्हें पहली टीम सौंपी ताकि टीम निचली लीग में न गिरे। उन्होंने टीम को बचाया और लगभग चार साल रहे, फिर नवंबर 2012 में तब विदा हुए जब टीम ला लीगा तालिका में सबसे नीचे थी। दो महीने बाद साउथेम्प्टन ने उन पर दांव लगाया, जबकि तब तक वे संवाददाता सम्मेलन दुभाषिये के ज़रिए करते थे। ऊँचे दबाव वाली उनकी टीम 2013-14 में आठवें स्थान पर रही, जो प्रीमियर लीग में क्लब के सबसे अच्छे प्रदर्शन के बराबर था। इसके बाद टॉटनहम हॉटस्पर का बुलावा आया।

टॉटनहम के पाँच साल ही वह वजह हैं जिससे दुनिया उनका नाम जानती है। उन्होंने कई बार उधार पर भेजे जा चुके स्ट्राइकर हैरी केन को इंग्लैंड का मुख्य सेंटर-फ़ॉरवर्ड बना दिया, डेले अली को मंच दिया और सन ह्युंग-मिन को आगे से दबाव बनाने वाली टीम का स्थायी हिस्सा बनाया। 2016-17 में टीम दूसरे स्थान पर रही और 2019 में एम्स्टर्डम में अयाक्स के ख़िलाफ़ उस वापसी के बाद चैंपियंस लीग फ़ाइनल में पहुँची, जिसकी चर्चा आज भी होती है। मैड्रिड में लिवरपूल ने फ़ाइनल 2-0 से जीत लिया। पाँच महीने बाद, जब टीम 14वें स्थान पर थी, उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया गया।

फिर आया पेरिस सेंट-जर्मेन, और उसके साथ उनके कोचिंग करियर की इकलौती बड़ी ट्रॉफ़ियाँ: फ़्रांसीसी सुपर कप, 2020-21 का फ़्रेंच कप और 2021-22 का लीग 1 ख़िताब, जो लियोनेल मेस्सी, किलियन एम्बापे और नेमार वाली टीम के साथ जीता गया। चेल्सी में 2023-24 का इकलौता सीज़न छठे स्थान, अतिरिक्त समय में लिवरपूल से हारे लीग कप फ़ाइनल और आपसी सहमति से विदाई के साथ ख़त्म हुआ।

जल्दी में पढ़ें तो यह रिकॉर्ड उन्हें “बस थोड़ा-सा चूक जाने वाले” कोच की श्रेणी में डाल देता है। ध्यान से पढ़ें तो एक ज़्यादा असहज बात सामने आती है: ख़िताब उस क्लब में आए जहाँ टीम पर उनका असर सबसे कम था, और बेहद क़रीबी हारें उन टीमों में मिलीं जिन्हें उन्होंने सबसे ज़्यादा गढ़ा। अमेरिका की ज़िम्मेदारी ने यह सवाल पहले ही साल में और तीखा कर दिया। मार्च 2025 में पनामा ने उनकी टीम को कॉनकाकैफ़ नेशंस लीग से बाहर कर दिया और उन्होंने ख़ुद इसे बड़ी नाकामी कहा। जून में उन्होंने क्रिश्चियन पुलिसिक को गोल्ड कप से पहले के दोस्ताना मैचों की टीम से भी बाहर रखा, क्योंकि इस फ़ॉरवर्ड ने टूर्नामेंट से छुट्टी माँगी थी। उन्होंने साफ़ शब्दों में फ़ैसले का बचाव किया: “खिलाड़ी योजना तय नहीं कर सकते”, और जोड़ा कि वे मुख्य कोच हैं, “कोई पुतला नहीं”। पुलिसिक ने जवाब दिया कि उनकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाने वाले “पूरी तरह ग़लत” हैं। अमेरिका तुर्किये और स्विट्ज़रलैंड से दोनों दोस्ताना मैच हार गया, और गोल्ड कप फ़ाइनल मेक्सिको ने 2-1 से जीता।

घरेलू विश्व कप ने इस सवाल का कुछ जवाब दिया। अमेरिका ने ग्रुप डी में पहला स्थान पाया: लॉस एंजेलिस में पैराग्वे को 4-1 से और फिर ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराया, जिसके बाद बदली हुई टीम तुर्किये से 3-2 से हार गई। राउंड ऑफ़ 32 में बोस्निया और हर्ज़ेगोविना पर 2-0 की जीत 2002 के बाद विश्व कप के नॉकआउट दौर में अमेरिका की पहली जीत थी, और यह वही टूर्नामेंट था जिसमें पोचेटिनो अर्जेंटीना के लिए खेले थे। इससे पहले किसी अमेरिकी कोच ने एक ही विश्व कप में तीन मैच नहीं जीते थे। फिर 6 जुलाई 2026 को सिएटल आया: शार्ल डे केटेलारे ने शुरुआती गोल किया, मलिक टिलमैन ने 31वें मिनट में बराबरी की, डे केटेलारे ने मुश्किल से एक मिनट बाद फिर गोल दागा और बेल्जियम 4-1 से जीत गया।

3 अगस्त 2026 को महासंघ ने उनका अनुबंध 2030 तक बढ़ा दिया। उनके पुराने सहायक हेसुस पेरेज़, मिगेल डी’अगोस्टिनो और टोनी हिमेनेज़ बने रहेंगे, और बेटे सेबास्तियानो फ़िटनेस कोच के रूप में स्टाफ़ में शामिल हुए हैं। नए दौर की पहली अंतरराष्ट्रीय खिड़की चार में से चार जीतों के साथ ख़त्म हुई: पेरू पर 4-1, चिली पर 4-2, ग्लेनडेल में मेक्सिको पर 3-0 और 6 अक्टूबर को सेंट पॉल में कनाडा पर 1-0, जिसमें इकलौता गोल 19 साल के जस्टिन एलिस ने किया। कप्तानी अब टायलर एडम्स के पास है, और किशोर खिलाड़ी कैवन सुलिवन और मैथिस अल्बर्ट पदार्पण कर चुके हैं। कनाडा के ख़िलाफ़ मैच के बाद पोचेटिनो ने कहा कि वे सिर्फ़ इसलिए ख़ुश नहीं हैं कि टीम जीत गई।

मैदान से बाहर की बात करें तो उनका जन्म 2 मार्च 1972 को हुआ था। उनकी शादी करीना ग्रिपाल्डी से हुई है और उनके पास अर्जेंटीना और स्पेन दोनों की नागरिकता है। छोटे बेटे मॉरिज़ियो अंडोरा में इंटर क्लब द’एस्काल्डेस के लिए खेलते हैं।

नवंबर में कॉनकाकैफ़ नेशंस लीग का क्वार्टर फ़ाइनल है। असली समय-सीमा उससे आगे है: 2030 का विश्व कप, उनके कोचिंग जीवन की पहली ऐसी अंतिम रेखा जो ख़ास तौर पर इसलिए खींची गई है कि उसे वही पार करें।

टैग: , , , , , ,

हमें Google पर जोड़ें

चर्चा

0 टिप्पणियाँ हैं।