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डरबन टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ्रीका को रौंदा, एशेज से बाहर रहे अनुभवी जोश हेजलवुड ने करियर के सर्वश्रेष्ठ आंकड़ों के साथ लिए छह विकेट

Jack T. Taylor
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किंग्समीड से सुर्खियाँ मैट रेनशॉ (Matt Renshaw) ले जाएंगे—और इसके हकदार भी हैं: पहली पारी में शानदार शतक, दूसरी पारी में भी खूब रन और प्लेयर ऑफ़ द मैच का पुरस्कार। लेकिन टेस्ट का फैसला आखिरी दोपहर उस तेज़ गेंदबाज़ ने किया, जिसके बिना ऑस्ट्रेलिया ने पूरा घरेलू सीज़न बिताया था। उन्होंने अपने टेस्ट करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके मैच का नतीजा तय किया।

जोश हेज़लवुड (Josh Hazlewood) ने कभी दिखावे के लिए गेंदबाज़ी नहीं की। उनकी कला लगातार एक ही चीज़ दोहराने में है: वही लेंथ, वही सीम—जब तक बल्लेबाज़ का धैर्य उनसे पहले जवाब न दे जाए। उन्होंने इस पिच को बेहद थकाऊ बताया था और कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि इसमें कुछ दरारें खुलेंगी। आखिरी सुबह दक्षिण अफ्रीका ने साबित कर दिया कि पिच वाकई थकाने वाली थी। और दरारें उन्होंने खुद पैदा कीं।

वह सुबह, जब दक्षिण अफ्रीका ने उनका सामना करते हुए टिके रहने की कोशिश की

लक्ष्य तक पहुँचने का दक्षिण अफ्रीका के पास कोई वास्तविक रास्ता नहीं था। उसका रास्ता बस टिके रहना था, और एक सत्र तक यह रणनीति काम भी आई। एडेन मार्करम (Aiden Markram) और वियान मुल्डर (Wiaan Mulder) ने पाँचवें विकेट के लिए 69 रन जोड़े, जिनमें लगभग सारे रन रक्षात्मक खेल से बने: मुल्डर ने अपने 29 रन के लिए 110 गेंदें खेलीं, जबकि मार्करम ने 75 रन बनाने के लिए 237 गेंदों का सामना किया।

हेज़लवुड ने लेग स्टंप की ओर आती गेंद से इस साझेदारी को तोड़ा। मुल्डर के बल्ले का हल्का किनारा लगा और एलेक्स केरी ने कैच लपक लिया। चार गेंद बाद रेनशॉ ने—जो अंशकालिक स्पिन गेंदबाज़ के तौर पर भी हाथ आज़मा रहे थे—काइल वेरेन (Kyle Verreynne) को बिना खाता खोले स्लिप में स्टीव स्मिथ (Steve Smith) के हाथों कैच करा दिया। लंच तक दक्षिण अफ्रीका के छह विकेट गिर चुके थे और वह अब भी लक्ष्य से 255 रन दूर था; मार्करम की ढाल बनने के लिए सिर्फ़ निचले क्रम के बल्लेबाज़ बचे थे।

दूसरी नई गेंद से किया गया एक ओवर

फिर नई गेंद आई, और उसके साथ वह ओवर भी, जिसने दिखाया कि इतने धैर्य से गेंदबाज़ी करने का मकसद क्या होता है। मार्को यानसन (Marco Jansen) दक्षिण अफ्रीका के इकलौते बल्लेबाज़ थे, जो प्रहार करके दबाव से निकलने की कोशिश कर रहे थे; उन्होंने 54 गेंदों पर 35 रन बनाए थे। हेज़लवुड ने उन्हें बोल्ड किया—गेंद ऑफ स्टंप को छूकर निकली। ABC की लाइव कमेंट्री ने इसे बेहतरीन गेंद बताया। उसी ओवर में साइमन हार्मर (Simon Harmer) के दस्ताने से एक तेज़ गेंद टकराई और केरी ने कैच ले लिया। दो विकेट, एक ओवर, और बिना किसी फालतू हरकत के।

मिचेल स्टार्क (Mitchell Starc) ने मार्करम को आउट किया। रिव्यू में अंदरूनी किनारे की पुष्टि होने के बाद वह विकेट के पीछे लपके गए। फिर हेज़लवुड ने खुद पारी का अंत किया: एनरिक नॉर्खिया (Anrich Nortje) को शॉर्ट गेंद पर फँसाया और शॉर्ट मिडविकेट पर नाथन लायन (Nathan Lyon) ने कैच लपका। दक्षिण अफ्रीका ने तीन ओवर में पाँच रन पर अपने आखिरी चार विकेट गंवा दिए और चाय से पहले ही ऑस्ट्रेलिया जीत चुका था।

वह घरेलू सीज़न जो उनके हाथ से निकल गया

उनके प्रदर्शन का महत्व इस बात से और बढ़ जाता है कि वह पिछले कुछ समय से कहाँ थे। हैमस्ट्रिंग की चोट के कारण हेज़लवुड पिछले घरेलू एशेज़ के पहले टेस्ट से बाहर हुए, फिर दूसरे टेस्ट से भी, और उसके बाद अकिलीज़ की चोट ने उन्हें पूरी सीरीज़ से दूर रखा। चोट के चलते वह इस साल के T20 विश्व कप में भी नहीं खेल पाए। ऑस्ट्रेलिया ने उनके बिना एशेज़ 4-1 से जीत ली—और यही 30 की उम्र के मध्य में पहुँच चुके किसी भी तेज़ गेंदबाज़ के सामने खड़ी खामोश चुनौती है: टीम ने दिखा दिया कि वह उनके बिना भी काम चला सकती है।

अगस्त तक वह लौट आए और बांग्लादेश के खिलाफ अपना 300वाँ टेस्ट विकेट लिया—इस मुकाम तक पहुँचने वाले नौवें ऑस्ट्रेलियाई बने। डरबन में उनका जवाब कहीं ज़्यादा दमदार था। 35 साल की उम्र में उन्होंने 49 रन देकर छह विकेट लिए—यह उनके टेस्ट करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था—और मैच में कुल आठ विकेट झटके। उन्होंने दोनों पारियों में रयान रिकेल्टन (Ryan Rickelton) को आउट किया और चौथे दिन डेविड बेडिंघम (David Bedingham) को 46 रन पर एलबीडब्ल्यू किया।

किंग्समीड में ऐसा पहले भी हो चुका है। 2018 में जब ऑस्ट्रेलिया ने यहाँ टेस्ट दौरे की शुरुआत की थी, तब हेज़लवुड ने 118 रन की जीत में आखिरी विकेट लिया था। आठ साल बाद: वही मैदान, वही आखिरी वार—बस अब उनके पैरों में आठ साल की और थकान जुड़ चुकी है।

सीरीज़ के लिए इसका क्या मतलब है

2025 में लॉर्ड्स में हुए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में दक्षिण अफ्रीका की ऑस्ट्रेलिया पर जीत के बाद दोनों टीमों की यह पहली भिड़ंत थी। कप्तान के तौर पर पहली बार हारने वाले तेम्बा बावुमा (Temba Bavuma) ने मेहमान टीम की तारीफ़ की: “उन्होंने अपना अनुभव दिखाया, अपना कौशल दिखाया।” कोच शुक्री कॉनराड (Shukri Conrad) ने टीम में जंग लगने की बात कही। दक्षिण अफ्रीका नवंबर के बाद अपना पहला टेस्ट खेल रहा था और कगिसो रबाडा (Kagiso Rabada) अब भी टीम से बाहर थे। उन्होंने कहा: “मुझे नहीं पता कि यह चिंताजनक है या नहीं, लेकिन फिक्र की बात तो है। आठ महीने के ब्रेक के बाद वापसी करना आसान नहीं होता।”

रेनशॉ के 190 और 82 रनों की बदौलत मिली 214 रन की जीत के बाद ऑस्ट्रेलिया तीन टेस्ट मैचों की सीरीज़ में 1-0 से आगे है। ऑस्ट्रेलिया ने 390 और छह विकेट पर 314 रन बनाकर पारी घोषित की, जबकि दक्षिण अफ्रीका ने 284 और 206 रन बनाए; उसे 421 रन का लक्ष्य मिला था। 2025-27 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र का हिस्सा दूसरा टेस्ट ग्केबेरहा में खेला जाएगा।

दक्षिण अफ्रीका के पास एक हफ्ते से भी कम समय है, ताकि वह उस गेंदबाज़ के खिलाफ रन बनाने का तरीका खोज सके जिसने अभी दिखाया है कि वह उन्हें धैर्य की परीक्षा में भी हरा सकता है। डरबन में उनकी योजना बस उसके सामने टिके रहने की थी। वह योजना दूसरी नई गेंद के एक ओवर तक ही चली।

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