प्रौद्योगिकी

यान लेकन की अकादमिक शोधकर्ताओं को सलाह: “LLM पर बिल्कुल काम नहीं करना चाहिए”

Adrian Kessler
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यान लेकुन (Yann LeCun) कई सालों से AI उद्योग को कहते आए हैं कि बड़े भाषा मॉडल एक भटकाव हैं। X पर इन दिनों वायरल हो रही एक व्याख्यान-क्लिप में ट्यूरिंग पुरस्कार विजेता ने यह चेतावनी एक छोटे और अधिक असुरक्षित तबके—विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं में काम कर रहे शोधकर्ताओं—को दी है, और अपनी बात में कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी।

“आपको LLM पर काम नहीं करना चाहिए। कम-से-कम अगर आप अकादमिक क्षेत्र में हैं, तो आपको LLMs पर बिल्कुल काम नहीं करना चाहिए। इसमें आप कुछ भी योगदान नहीं दे सकते। अगर आपकी दिलचस्पी AI में वास्तविक प्रगति करने में है—ऐसे AI में जो वास्तविक दुनिया से जुड़ा हो—अगर आप भौतिक AI चाहते हैं, तो LLMs पर काम न करें, और जनरेटिव मॉडल पर भी नहीं।”

उन्होंने यह बात 29 मई को ETH Zurich में “World Models: Enabling the Next AI Revolution” शीर्षक वाले अपने व्याख्यान में कही। यह व्याख्यान Frontiers of Embodied AI लेक्चर शृंखला का हिस्सा था। AI पर टिप्पणी करने वाले रोहन पॉल (Rohan Paul) ने इस हफ्ते इस क्लिप को लेकुन का “नवीनतम व्याख्यान” बताकर पोस्ट किया, हालांकि इसे हुए चार महीने बीत चुके हैं। अगली बात पर श्रोताओं की हँसी छूट गई: “तो, जैसा कि आप अंदाज़ा लगा सकते हैं, इससे Silicon Valley में मेरी लोकप्रियता नहीं बढ़ती।” उनके पीछे लगी स्लाइड का शीर्षक था “Recommendations to my fellow AI scientists”; उसका समापन लाल अक्षरों में इस पंक्ति से होता है: “अगर आपकी दिलचस्पी मानव-स्तर के AI में है, तो LLMs पर काम न करें।”

पहली बात कंप्यूटिंग संसाधनों की है

उकसाने वाली भाषा को हटा दें, तो अकादमिक जगत के लिए उनकी सलाह का आधार अर्थशास्त्र है। बड़े भाषा मॉडलों में प्रगति उन क्लस्टरों पर प्रशिक्षण के जरिए हासिल होती है, जिनका खर्च मुट्ठी भर कंपनियाँ ही उठा सकती हैं। बजट से तय होने वाली इस दौड़ में पीएचडी का कोई विद्यार्थी बहुत कुछ नहीं जोड़ सकता—व्यावहारिक तौर पर “आप कुछ भी योगदान नहीं दे सकते” का यही मतलब है। लेकुन यह बात कुछ समय से कहते आए हैं: VentureBeat की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में पेरिस के VivaTech में उन्होंने AI की अगली पीढ़ी बनाने के इच्छुक विद्यार्थियों से कहा था कि LLMs बड़ी कंपनियों के हाथ में हैं।

स्लाइड में यह भी बताया गया है कि इसके बजाय वे शोधकर्ताओं को अपना समय किन चीज़ों पर लगाने की सलाह देते हैं। जनरेटिव मॉडल की जगह जॉइंट-एम्बेडिंग आर्किटेक्चर। प्रायिकता-आधारित मॉडलों की जगह ऊर्जा-आधारित मॉडल। कॉन्ट्रास्टिव तरीकों की जगह नियमितीकरण वाले तरीके। और रीइन्फोर्समेंट लर्निंग की जगह मॉडल-प्रीडिक्टिव कंट्रोल—जिसे वे सिर्फ तब योजना सुधारने के लिए अपनाएँगे, जब दुनिया अनुमान के मुताबिक व्यवहार न करे। इन विचारों को मामूली हार्डवेयर पर परखा जा सकता है, और यही वह क्षेत्र है जहाँ विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं को अब भी बढ़त हासिल है।

दूसरी बात ही असली चुनौती है

“जनरेटिव मॉडल पर भी काम न करें” कहना चैटबॉट के खिलाफ आम दलील से कहीं आगे जाता है। यह खुद जनरेशन के विचार को खारिज करता है—यानी अगले शब्द या पिक्सल का अनुमान लगाकर बुद्धिमत्ता विकसित करने की सोच को। इस वजह से लेकुन का रुख उस भौतिक-AI क्षेत्र के बड़े हिस्से से टकराता है, जिसे अक्सर उनके साथ ही रखा जाता है। पिछले हफ्ते AMD ने फेई-फेई ली (Fei-Fei Li) की World Labs को करीब 8.2 अरब डॉलर के मूल्य वाले पूरी तरह शेयरों के बदले सौदे में खरीदने पर सहमति जताई। The Register ने इसे इस आशंका से बचाव का कदम बताया कि कहीं LLMs बेकार रास्ता साबित न हों, और यह भी याद दिलाया कि लेकुन ऐसी बात पहले कह चुके हैं। फिर भी World Labs ऐसे मॉडल बनाती है जो 3D परिवेश तैयार और सिम्युलेट करते हैं। NVIDIA का Cosmos 3 भी एक जनरेटिव वर्ल्ड मॉडल है, और Physical Intelligence अपने रोबोट मॉडल विज़न-लैंग्वेज मॉडल के आधार पर बनाती है। “शब्दों की जगह दुनिया” की ओर जा रहा निवेश, ज्यादातर लेकुन के बताए रास्ते की ओर नहीं जा रहा।

अपनी कंपनी में हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्ति की सलाह

सलाह देने वाले की अपनी भूमिका का भी ध्यान रखना चाहिए। लेकुन Meta छोड़ चुके हैं और अब पेरिस की AMI Labs के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। कंपनी ने मार्च में 1.03 अरब डॉलर जुटाए थे और उसका मूल्यांकन 3.5 अरब डॉलर आंका गया था। LLMs के विकल्प के तौर पर वर्ल्ड मॉडल बनाने के लिए जुटाई गई यह रकम यूरोप का सबसे बड़ा सीड निवेश था। कंपनी पेरिस, न्यूयॉर्क, मॉन्ट्रियल और सिंगापुर में कर्मचारियों की भर्ती कर रही है। उनकी सलाह मानने वाला हर शोधकर्ता संभावित कर्मचारी भी बन सकता है।

इसका यह अर्थ नहीं कि उनकी सलाह निंदक सोच से प्रेरित है। AMI के अस्तित्व में आने से पहले भी वे इसी विचार पर कायम थे, और निवेशकों ने इसमें पैसा लगाने से बहुत पहले उन्हें इसकी कीमत अपनी प्रतिष्ठा से चुकानी पड़ी थी। लेकिन 2026 में शोध संबंधी उनकी सलाह और कारोबारी योजना बिल्कुल एक ही दिशा में जाती हैं, और विद्यार्थियों को इस बात को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए।

लेकुन ने मज़ाक में कहा कि इस बात की वजह से Silicon Valley में उनके दोस्त कम हो जाते हैं। थीसिस का विषय चुन रहे विद्यार्थी के लिए दाँव इससे कहीं बड़े हैं: ऐसी आर्किटेक्चर पर पीएचडी दाँव पर लगाना, जिसे साबित करने के लिए उन्होंने अभी-अभी एक अरब डॉलर जुटाए हैं।

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