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Knives Out क्लासिक मर्डर मिस्ट्री को नई धार देती है: तेज़ हास्य और अमीरी पर करारा तंज़

रायन जॉनसन की 2019 की यह फ़िल्म एगाथा क्रिस्टी की परंपरा को सितारों भरी कास्ट के साथ लौटाती है।
Martha O'Hara
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रियान जॉनसन की “Knives Out” देखते हुए सबसे पहले यह महसूस होता है कि हॉलीवुड ऐसी फ़िल्में अब कम बनाता है: एक बड़े सितारों वाली, खुलकर मज़ा देने वाली हत्या-रहस्य कथा। “स्टार वॉर्स: द लास्ट जेडी” (2017) के बाद जॉनसन उस ज़मीन पर लौटे हैं जहाँ से उनका सफ़र शुरू हुआ था। द गार्जियन ने इसे “deliciously entertaining” कहा है और याद दिलाया है कि जॉनसन की पहली फ़िल्म “Brick” (2005) भी पुराने नॉयर को आधुनिक स्कूल के माहौल में रखकर यही खेल खेलती थी। यह फ़िल्म अगाथा क्रिस्टी की व्होडनिट परंपरा को नए ज़माने में उतारती है, और उन फ़िल्मी रूपांतरणों की याद दिलाती है जिनमें पीटर उस्तीनोव सितारों से भरी टोली को उलझी हुई हत्या की गुत्थी के बीच से निकालते थे।

कहानी न्यू इंग्लैंड की एक पुरानी, गॉथिक हवेली में शुरू होती है। मशहूर अपराध-उपन्यासकार हार्लन थ्रोम्बी (क्रिस्टोफ़र प्लमर) अपना 85वाँ जन्मदिन मनाते हैं और अगली सुबह उनकी लाश मिलती है, गला कटा हुआ। लेफ़्टिनेंट इलियट (लाकीथ स्टैनफ़ील्ड) और ट्रूपर वैगनर (नोआ सीगन) को मामला आत्महत्या का लगता है। लेकिन एक अनजान पक्ष ने निजी जासूस बेनोआ ब्लैंक को जाँच के लिए बुलाया है, और ब्लैंक को लगता है कि इस मौत के पीछे कुछ और है। गार्जियन के मुताबिक़ बूढ़े लेखक ने उस शाम पुराने हिसाब चुकाए थे और घर की “सफ़ाई” की थी। इसलिए परिवार के लगभग हर सदस्य के पास कोई न कोई वजह निकल आती है। फ़िल्म इसी जाल को बड़े सलीक़े से बुनती है।

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इस जाल का सबसे दिलचस्प धागा हार्लन की नर्स मार्टा कैब्रेरा (एना डे आर्मास) है। गार्जियन ने लिखा है कि उसे झूठ बोलने पर उल्टी आ जाती है। यह एक सनकी-सी शर्त लगती है, पर पटकथा इसे लगातार तनाव की तरह इस्तेमाल करती है। जब सवाल-जवाब होते हैं, मार्टा सच बोलती है पर अधूरा सच, और दर्शक हर वाक्य पर साँस रोके रहता है कि अब कौन-सा शब्द उसे धोखा देगा। वसीयत खुलने पर यह तनाव और गहरा हो जाता है, क्योंकि हार्लन की पूरी दौलत और जायदाद मार्टा के नाम निकलती है और थ्रोम्बी परिवार सन्न रह जाता है। इसके बाद हार्लन का पोता रैंसम ड्राइसडेल मार्टा की “मदद” को आगे आता है, और अब सवाल यह है कि इस मदद के पीछे उसका अपना मतलब क्या है।

अभिनय में डैनियल क्रेग सबसे ज़्यादा ध्यान खींचते हैं, और अच्छे कारण से। गार्जियन उन्हें सिगार पीने वाला, सिक्का उछालने वाला, बाहर से आया जासूस बताता है जो अमेरिका के दक्षिणी लहजे की अति कर देता है। रैंसम उसे “CSI-KFC” कहकर चिढ़ाता है, और यह मज़ाक़ फ़िल्म की शरारती भावना को ठीक पकड़ता है। केसी मूवीमेनिया को इस किरदार में हरक्यूल पोआरो की झलक दिखी, हालाँकि समीक्षक को इस लहजे की आदत डालने में थोड़ा वक़्त लगा। क्रिस एवन्स रैंसम के रूप में परिवार के बिगड़ैल, काली भेड़ जैसे वारिस हैं, जिनके बारे में गार्जियन लिखता है कि उनसे विशेषाधिकार टपकता है। केसी मूवीमेनिया के अनुसार वे इस “नालायक” पोते को निभाते हुए साफ़ मज़ा ले रहे हैं।

अब बाक़ी परिवार की बात। गार्जियन के अनुसार माइकल शैनन अपनी आम छवि से हटकर वॉल्ट के रूप में थोड़े गिड़गिड़ाते बेटे हैं, जिसकी प्रकाशन-दौलत पिता की मेहरबानी पर टिकी है। टोनी कॉलेट विधवा जोनी बनी हैं, एक “लाइफ़स्टाइल गुरु” जिसमें गार्जियन को ग्वेनेथ पाल्ट्रो की झलक मिली। डॉन जॉनसन दामाद रिचर्ड हैं, जिन्हें वही समीक्षा “ट्रंप-जैसा” नापसंद करने लायक़ आदमी कहती है, और जोनी व रिचर्ड दोनों के पास, गार्जियन के शब्दों में, भुनाने को पुराने हिसाब थे। जेमी ली कर्टिस बड़ी बेटी लिंडा के रूप में गार्जियन की नज़र में अपना सर्वश्रेष्ठ काम करती दिखती हैं। वॉल्ट का दाँव पिता की मेहरबानी पर टिका है, रैंसम की बहस दादा से हो चुकी है, जोनी और रिचर्ड के अपने हिसाब हैं; कहानी इन्हीं टकराती वजहों से आगे बढ़ती है, किसी एक सितारे के कंधे पर नहीं।

लेकिन इसी भीड़ में फ़िल्म की सबसे साफ़ कमज़ोरी भी दिखती है। केसी मूवीमेनिया ने ठीक यही बात उठाई है: जेमी ली कर्टिस, डॉन जॉनसन, टोनी कॉलेट और माइकल शैनन जैसे नाम कई बार “विस्तारित कैमियो” से ज़्यादा नहीं लगते। समीक्षक को उम्मीद थी कि सबको बराबर स्क्रीन-समय मिलेगा, पर जॉनसन ने कहानी का भार मार्टा पर रखा। मेरी राय में यह चुनाव कहानी के लिहाज़ से सही है, क्योंकि मार्टा ही वह धुरी है जिसके चारों ओर रहस्य घूमता है। फिर भी दर्शक को लगता है कि इतने तगड़े कलाकारों को और खुलकर खेलने का मौक़ा मिल सकता था। उसी समीक्षक ने यह भी माना कि एना डे आर्मास ने उम्मीद से बेहतर काम किया और “ब्लेड रनर 2049” (2017) के बाद यह उनकी सबसे अच्छी भूमिका है।

फ़िल्म को वर्ग-संघर्ष, आर्थिक असमानता, आप्रवासन और नस्ल के आईने में भी पढ़ा गया है, और यह पठन मनगढ़ंत नहीं लगता। एक अमीर परिवार जो अपने आपको “खुद के दम पर बने” लोग कहता है, उस वक़्त बिखर जाता है जब सारी दौलत उस नर्स के हिस्से में आ जाती है जो परिवार की सदस्य नहीं थी। वसीयत वाला क्षण इसी वजह से इतना असरदार है: परिवार की सारी श्रेणियाँ एक झटके में उलट जाती हैं। यहाँ कोई भाषण नहीं है। यह बात वसीयत वाले दृश्य के भीतर, कहानी की चाल के साथ ही कह दी जाती है।

फ़िल्म की बनावट के पीछे लंबी तैयारी थी। जॉनसन को इसका विचार 2000 के दशक के मध्य में आया था, और “द लास्ट जेडी” पूरी करने के बाद उन्होंने छह से सात महीनों में पटकथा लिखी। निर्माण में उनके पुराने साथी राम बर्गमैन थे। पैसा MRC से आया और मैसाचुसेट्स राज्य की कर-रियायतों से। शूटिंग अक्टूबर 2018 में शुरू हुई और दिसंबर में ख़त्म हुई, 4 करोड़ डॉलर के बजट पर, बोस्टन के उपनगरों में। नाथन जॉनसन का शास्त्रीय संगीत उन सिंफ़ोनिक फ़िल्म-स्कोर से प्रेरित है जो उन्हें और रियान को पसंद हैं, और वह कहानी की पुरानी चाल के साथ ठीक बैठता है।

फ़िल्म का प्रीमियर 7 सितंबर 2019 को टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में हुआ और 27 नवंबर को लायंसगेट ने इसे अमेरिकी सिनेमाघरों में उतारा। बॉक्स ऑफ़िस पर इसने लगभग 31.2 करोड़ डॉलर कमाए। नेशनल बोर्ड ऑफ़ रिव्यू और अमेरिकन फ़िल्म इंस्टिट्यूट ने इसे साल की बेहतरीन फ़िल्मों में चुना। इसे तीन गोल्डन ग्लोब नामांकन, एक बाफ़्टा नामांकन और सर्वश्रेष्ठ मौलिक पटकथा के लिए ऑस्कर नामांकन मिला। बाद में यह एक फ़िल्म-शृंखला की पहली कड़ी साबित हुई, जिसमें “Glass Onion” (2022) और “Wake Up Dead Man” (2025) आती हैं।

“Knives Out” अपने नियम जानती है और उन्हें तोड़ने में मज़ा भी लेती है। मार्टा की उल्टी वाली शर्त, क्रेग का बेतुका लहजा और एवन्स की बिगड़ी हुई अकड़ ऐसे ब्योरे हैं जो इसे किसी भी दूसरी हत्या-पहेली से अलग पहचान देते हैं। खटकता यही है कि कुछ बड़े नाम कहानी के किनारे पर रह जाते हैं। पर पटकथा की चुस्ती और अमीरों पर चुभता व्यंग्य इस कमी को काफ़ी हद तक भर देते हैं।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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