फ़िल्में

Lou एक साधारण तूफ़ानी थ्रिलर है, जिसे अकेली Allison Janney बचा लेती हैं

अन्ना फ़ॉर्स्टर की 2022 की यह पीछा-फ़िल्म पटकथा से ज़्यादा अभिनय के दम पर टिकी है।
Martha O'Hara
हमें Google पर जोड़ें

1986 का वाशिंगटन राज्य, ऑर्कस द्वीप, सिर पर मँडराता बड़ा तूफ़ान, और एक रात जिसमें एक छोटी बच्ची ग़ायब हो जाती है। अन्ना फ़ॉर्स्टर की “Lou” (2022) इसी ढाँचे पर खड़ी है। माँ हैना की बेटी वी का अपहरण हो जाता है, और अपहरणकर्ता का पीछा करने में उसका साथ देती है बगल के घर में अकेली रहने वाली, कम बोलने वाली लू, जो उसकी मकान-मालकिन भी है। फ़िल्म 23 सितंबर 2022 को नेटफ़्लिक्स पर आई। शुरुआत सीधी-सादी लगती है, पर जल्दी साफ़ हो जाता है कि लू वैसी नहीं है जैसी दिखती है।

पहला हिस्सा कहानी को धीरे और सलीक़े से जमाता है। लू अपने कुत्ते जैक्स के साथ रहती है और गाँव में सामान लेने जाती है। शेरिफ़ उसे गठिया के लिए तांबे का कंगन आज़माने की सलाह देता है। उधर हैना बेटी के साथ घर के बाहर आँख-मिचौली खेल रही है, और लू लौटते हुए उसे याद दिला जाती है कि किराया कल देना है। ये छोटे दृश्य बाद में काम आते हैं, क्योंकि इन्हीं से दोनों औरतों का रिश्ता बनता है। फिर तूफ़ान आता है। सामान लाने निकला हैना का दोस्त क्रिस रास्ते में मारा जाता है, घर की बिजली कटती है, और हैना बिजली ठीक करने बाहर जाती है तभी वी उठा ली जाती है। यहाँ से फ़िल्म रफ़्तार पकड़ लेती है।

YouTube video

हैना भागकर लू के दरवाज़े पहुँचती है और उसे ऐसे क्षण में रोकती है जो बहुत निजी है। लू उस वक़्त अपनी जान लेने की कोशिश में थी। फ़िल्म इसे ज़्यादा खींचती नहीं, और यही अच्छा है। कुछ ही देर में लू का ट्रक बम से उड़ जाता है और दोनों को पैदल, रात और बारिश में निकलना पड़ता है। इतनी जल्दी दो किरदारों की हालत और ख़तरे की हद एक साथ सामने आ जाती है।

एलिसन जैनी फ़िल्म की सबसे बड़ी ताक़त हैं। वे लू को न तो कठोर नायिका की तरह खेलती हैं, न थकी हुई बुढ़िया की तरह। उनके यहाँ झिझक है, चुप्पी है, और ऐसा बोझ है जो पूरी तरह खुलता नहीं। जब लू बताती है कि वह 26 साल सीआईए की फ़ील्ड एजेंट रही है, तो बात चौंकाती है, पर उससे पहले के दृश्यों में भी उसके हाव-भाव में कुछ ऐसा रहता है जो साधारण पड़ोसन से मेल नहीं खाता। इसका श्रेय काफ़ी हद तक जैनी को जाता है। दूसरी ओर, पटकथा उन्हें हमेशा बराबर का सहारा नहीं देती।

जर्नी स्मोलेट-बेल के पास हैना के रूप में कम गुंजाइश थी, फिर भी वे घबराहट और ज़िद को एक साथ थामे रखती हैं। उनकी हैना डरती है, लेकिन रुकती नहीं। दोनों अभिनेत्रियों के बीच की केमिस्ट्री इस फ़िल्म की रीढ़ है। मकान-मालकिन और किराएदार के बीच का औपचारिक रिश्ता पीछा करने की भागदौड़ में धीरे-धीरे भरोसे में बदलता दिखता है। फिलिप के रूप में लोगन मार्शल-ग्रीन का काम सधा हुआ है। हैना बताती है कि अपहरणकर्ता वी का पिता है, पूर्व ग्रीन बेरे, जिसे वह मरा हुआ मान चुकी थी। उसके किरदार को उतनी परतें नहीं मिलतीं जितनी मिल सकती थीं, पर उसकी मौजूदगी में सचमुच ख़तरा महसूस होता है।

फ़िल्म का बड़ा मोड़ यह है कि फिलिप दरअसल लू का बेटा है। लू ने उसे बचपन में छोड़ दिया था ताकि ईरान में उसका गुप्त मिशन ख़तरे में न पड़े, और बाद में उसी ने फिलिप को क़ानून के हवाले किया, ताकि हैना और वी महफ़ूज़ रहें। काग़ज़ पर यह माँ और बेटे, अपराध-बोध और बदले की मज़बूत कहानी है। पर पर्दे पर यह मोड़ थोड़ा सुविधाजनक लगता है। जिस पड़ोसन से नायिका मदद माँगने जाती है, वही अपहरणकर्ता की माँ निकले, यह संयोग कुछ ज़्यादा ही सधा हुआ है। बाद में आने वाला अतीत का खुलासा भी किरदारों की भावनाओं को उतनी गहराई नहीं देता जितनी उम्मीद बँधती है।

अंतिम हिस्सा बड़े पैमाने का है। लाइटहाउस विस्फोटकों से भरा है, लू उसे दूर से उड़ा देती है ताकि आते हुए सीआईए हेलीकॉप्टर तक संकेत पहुँचे, और समुद्र तट पर माँ-बेटे की भिड़ंत होती है जिसका अंत पानी के नीचे होता है। इस मोड़ पर फ़िल्म का मिज़ाज बदलता है। अब तक की निजी, तनी हुई कहानी अचानक किसी बड़े एक्शन-थ्रिलर जैसी लगने लगती है, और यह बदलाव सहज नहीं बैठता। आख़िरी दृश्य ज़रूर दिलचस्प है। फ़ेरी पर जैक्स की नज़र ऊपरी डेक की ओर जाती है, और कैमरा एक औरत की बाँह पर ठहरता है, जिस पर लू जैसा निशान और तांबे का कंगन है। फ़िल्म यहाँ जवाब नहीं देती, सवाल छोड़ देती है। किसी को यह चतुर अंत लगेगा, किसी को अधूरा।

रिलीज़ के बाद आलोचकों की राय बँटी रही। जैनी के काम की तारीफ़ हुई, जबकि पटकथा को कमज़ोर कड़ी माना गया। मुझे यह बँटवारा सही लगता है, क्योंकि फ़िल्म के सबसे असरदार क्षण संवादों या मोड़ों से नहीं, कलाकारों की मौजूदगी से निकलते हैं: लू की चुप्पी, हैना की ज़िद, तूफ़ान में भीगते दो चेहरे।

कहानी की असली धुरी मातृत्व है। एक माँ बेटी के लिए सब कुछ दाँव पर लगा देती है, और दूसरी माँ वर्षों पहले अपने बेटे को छोड़ गई थी और अब उस फ़ैसले का हिसाब चुका रही है। हैना और लू इसी भावना के दो सिरे हैं, और जब फ़िल्म इन्हें आमने-सामने रखती है तो पीछा करने की कहानी के पीछे एक पुरानी, चुभती हुई गलती दिखने लगती है। यह हिस्सा पटकथा की ढील के बावजूद टिकता है।

मेरी राय में “Lou” एक औसत थ्रिलर है जिसे जैनी और स्मोलेट-बेल अपने कंधों पर चलाती हैं। तूफ़ानी रात और अतीत की गठरी वाली कहानी आपको खींचती है तो इसे देखा जा सकता है, ख़ासकर जैनी के लिए। पर संयोग पर टिकी पटकथा और आख़िरी हिस्से का भारी-भरकम एक्शन इसे अपनी श्रेणी की यादगार फ़िल्मों की क़तार में नहीं पहुँचने देते।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

  • Ridley Asha Bateman — Vee

टैग: , , , , , Lou

हमें Google पर जोड़ें

चर्चा

0 टिप्पणियाँ हैं।