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Love Tactics एक प्यारी नेटफ्लिक्स रोमकॉम है, मगर स्क्रिप्ट अपने कलाकारों पर भरोसा नहीं करती

एमरे काबाकुशाक की 2022 की तुर्की फिल्म दो आकर्षक कलाकारों की केमिस्ट्री पर टिकी है।
Martha O'Hara
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टैक्सी में छूटा एक कार्डिगन, और उसे अपने पास रख लेने वाला एक आदमी, जो इसे बात शुरू करने का बहाना मानता है। ‘Love Tactics’ की शुरुआत इसी छोटे-से रूमानी संयोग से होती है। शुरुआत भली लगती है, पर आगे फिल्म उसमें कुछ नया नहीं जोड़ पाती।

एम्रे काबाकुशाक की यह तुर्की फिल्म 11 फरवरी 2022 को नेटफ्लिक्स पर आई। तुर्की में इसका नाम ‘Aşk Taktikleri’ है। पेलिन करामेहमेतओग्लू की लिखी कहानी में अस्ली फैशन डिज़ाइनर है और ‘Love Tactics’ नाम से ब्लॉग भी चलाती है। केरेम विज्ञापन जगत में काम करता है। दोनों का प्रेम पर भरोसा नहीं है, इसलिए वे शर्त लगाते हैं कि दूसरे को पहले अपने प्यार में कौन गिराएगा, और इसके लिए अटपटे हथकंडे अपनाते हैं। अस्ली को डेमेत ओज़देमिर ने निभाया है, केरेम को शुक्रू ओज़ुयल्दिज़ ने। दोनों परदे पर सहज दिखते हैं। कमज़ोर पटकथा उन्हें ज़्यादा कुछ करने नहीं देती।

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विचार बुरा नहीं है। दो संशयी लोग एक-दूसरे पर चालें आज़माएँ और धीरे-धीरे अपनी ही चाल में उलझ जाएँ, यह रोमांटिक कॉमेडी का पुराना नुस्खा है। दिक्कत यह है कि फिल्म इसमें अपनी तरफ़ से कुछ मिलाती नहीं। शुरू की नोकझोंक मज़ेदार है। पार्टी में दोनों का एक-दूसरे को निशाना बना लेना और अगले दिन ‘संयोग से’ टकराने की तैयारी करना हँसाता भी है। फिर वही बात दोहराई जाने लगती है। जिन दृश्यों में दोनों साथ नहीं होते, उनमें फिल्म बारी-बारी से कभी इसके पास जाती है, कभी उसके पास, और दोनों के दिमाग़ में लगभग एक-सी योजनाएँ चलती दिखती हैं। समीक्षा-साइट डिसाइडर ने इसे उबाऊ बताया और लिखा कि सिर्फ़ 98 मिनट की होकर भी यह उससे लंबी खिंचती लगती है। एक और समीक्षा का निचोड़ है कि फिल्म का अंदाज़ा पहले से लग जाता है, फिर भी यह देखने में भली लगती है। ऊब वाली शिकायत मुझे ज़्यादा सही लगती है, हालाँकि भली लगने वाली बात भी पूरी तरह ग़लत नहीं।

फिल्म सबसे अच्छी तब लगती है जब कहानी कप्पादोकिया पहुँचती है। दोनों काम के सिलसिले में वहाँ जाते हैं। अस्ली की कंपनी का नया साझेदार सेरवेत उसमें दिलचस्पी लेता है और केरेम को यह खटकता है। सेरवेत की बेटी मेलतेम वही लड़की निकलती है जिससे केरेम पहले ही बचकर भागा था। रात्रिभोज में अस्ली और केरेम एक-दूसरे को जलाने के लिए इन दोनों का इस्तेमाल करते हैं, और बाप-बेटी इतने नशे में आ जाते हैं कि सो जाते हैं। यहाँ फिल्म की सबसे हल्की-फुल्की हँसी मिलती है। उसके बाद केरेम अस्ली को एक पुरानी जगह ले जाता है, जहाँ वह पहले आया करता था। वहीं अस्ली को पता चलता है कि केरेम के पिता बचपन में ही गुज़र गए थे। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले तहखाने में केरेम उसे एक छोटा-सा गुलदान देता है और अपना बर्तन गढ़ना सिखाता है। फिर गर्म हवा के गुब्बारे की सवारी आती है। केरेम नहीं जानता कि अस्ली को ऊँचाई से डर लगता है। वह घबरा जाती है, केरेम उसे सँभालता है, और फिर दोनों नज़ारे का मज़ा लेते हैं। इन दृश्यों में पहली बार दोनों शर्त से हटकर इंसान की तरह दिखते हैं। यह हिस्सा जल्दी निकल जाता है, और कहानी फिर शर्त की पटरी पर लौट आती है।

लौटकर केरेम अस्ली को घर खाने पर बुलाता है, खाना ख़ुद बनाता है और पिछवाड़े में प्रोजेक्टर पर फिल्म चलाता है। फिल्म में जब नायक-नायिका बारिश में चूमते हैं, तो केरेम स्प्रिंकलर चला देता है। विचार प्यारा है, पर उसमें वही बनावटी चतुराई है जो पूरी फिल्म में दिखती है। फिर पियानो आता है। केरेम की माँ उसके साथ पियानो बजाती थी। उनके चले जाने के बाद वह न पियानो हटा पाया, न किसी को छूने दिया, क्योंकि उसे डर था कि कहीं वह माँ को माफ़ न कर बैठे। फिल्म इस घाव को छूने की सबसे गंभीर कोशिश यहीं करती है। लेकिन लेखन इसे इतनी जल्दी समेट देता है कि किरदार के दर्द का वज़न महसूस ही नहीं होता।

काबाकुशाक का निर्देशन साफ़-सुथरा है, पर उसमें अपनी छाप नहीं दिखती। दृश्य सीधे एक-दूसरे से जुड़ते जाते हैं, कहीं कोई झटका नहीं, कोई अलग रंग नहीं। हास्य के क्षण कम हैं, और जो हैं उन्हें भी पहले से भाँपा जा सकता है। तूना, जानसू और दोस्तों की बाक़ी मंडली कहानी को कुछ आसपास की दुनिया ज़रूर देती है, पर उन्हें इतनी जगह नहीं मिली कि वे फिल्म को सँभाल सकें।

अंत की ओर कहानी वैसे ही चलती है जैसा अंदाज़ा था। चुंबन के बाद दोनों अपने-अपने दोस्तों को बताते हैं कि क्या हुआ। तूना भाँप लेता है कि केरेम प्यार में पड़ चुका है, और केरेम इनकार नहीं करता। अस्ली की सहेली जानसू भी यही कहती है, जब अस्ली ब्लॉग जारी रखने से मना कर देती है। मोड़ तर्कसंगत है, पर उसमें चौंकाने वाला कुछ नहीं।

मेरे लिए ‘Love Tactics’ में याद रखने लायक़ बस मिट्टी के बर्तन वाला तहखाना और आधी रात का पियानो है। शर्त वाला हिस्सा देखते ही भूल जाता है। हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी से शाम काटनी हो और अंदाज़ा लग जाने वाले मोड़ों से परहेज़ न हो, तो यह फिल्म चल जाएगी। शर्त वाली कहानी में कुछ नया खोजने वालों को निराशा ही मिलेगी।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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