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The Takeover डीपफेक को तेज़ पीछा करने वाले इंजन में बदलती है, पर अपना सबसे अच्छा सवाल अधूरा छोड़ देती है

2022 की डच हैकर थ्रिलर, निर्देशक एनमारी फान दे मोंड, मुख्य भूमिका में होली मे ब्रूड।
Martha O'Hara
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मेल बैंडिसन ख़ुद को एथिकल हैकर कहती है, यानी वह जो सेंध लगाने का हुनर दूसरों की हिफ़ाज़त में इस्तेमाल करता है। ‘The Takeover’ की कहानी तब शुरू होती है जब वह एक हाई-टेक, सेल्फ़-ड्राइविंग बस पर होने वाली डेटा चोरी रोक देती है। काम सही था, पर उसका असर बस तक ही नहीं रुकता। उसी कार्रवाई से एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क ठप हो जाता है, और उसके बाद मेल ख़ुद निशाने पर आ जाती है।

इसके बाद मामला डीपफेक पर आ टिकता है। मेल को फँसाने के लिए एक वीडियो बनाया जाता है, जिसमें वह किसी की हत्या करती ‘दिखती’ है। वीडियो झूठा है, पर देखने में सच जैसा है, और आरोप की पूरी ताक़त इसी में है। किसी पर हत्या का इल्ज़ाम लगे तो सबसे पहले सबूत माँगा जाता है, और यहाँ सबूत ही गढ़ा हुआ है। जिस पर इल्ज़ाम है, उसे अब यह साबित करना है कि जो सामने चल रहा है, वह हुआ ही नहीं। यह काम वीडियो बनाने वाले के काम से कहीं मुश्किल है। हम सब मान बैठे हैं कि जो आँख से दिखा, वह सच है, और यह आदत यहाँ मेल के ख़िलाफ़ काम करती है।

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कहानी की कड़ियाँ गिनें तो पहले एक चोरी रुकती है, फिर एक नेटवर्क बंद होता है, फिर मेल निशाने पर आती है और आख़िर में उसे हत्यारी दिखाने वाला वीडियो सामने आता है। हर कड़ी पिछली से निकलती है। मेल ने शुरू में कुछ भी ग़लत नहीं किया था, फिर भी हर मोड़ पर उसकी हालत पहले से बदतर होती जाती है। ऐसी कहानियों में दर्शक शुरू से नायिका के साथ खड़ा होता है, क्योंकि उसकी ग़लती ढूँढ़ने पर भी नहीं मिलती। इस बनावट में सहानुभूति पहले दृश्य से ही मेल के खाते में जमा है, इसलिए फ़िल्म को उसे कमाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। मुश्किल दूसरी तरफ़ है: उसे टिकाए रखने के लिए कहानी को नए मोड़ देते रहने पड़ेंगे, वरना सहानुभूति आदत बन जाती है।

मेल का पेशा दूसरों के सिस्टम की कमज़ोरियाँ खोजना है। जो पराए सिस्टम की ख़ामियाँ गिनाती थी, उसे अब अपनी ही ज़िंदगी में लगी सेंध का हिसाब लगाना है, और इस बार जाँच उसी की हो रही है। ‘ख़ुद को एथिकल हैकर कहने वाली’ यह पहचान भी यहाँ नया अर्थ पाती है। कोई भी ख़ुद को नेक कह सकता है। असली परीक्षा तब आती है जब कुछ बिगड़ता है और उस दावे को साबित करना पड़ता है। मेल के हाथ में अपनी बात के सिवा कुछ नहीं है, और सामने एक वीडियो उलटी बात कह रहा है। एक और बात खटकती है: हैकिंग का हुनर और अपराध का हुनर बाहर से एक जैसे दिखते हैं, इसलिए जो मेल की नीयत पर शक करना चाहे, उसके पास बहाने की कमी नहीं होगी।

यह 2022 की फ़िल्म है और इसकी निर्देशक अनेमारी वान डे मोंड हैं। इसे एक्शन, क्राइम और थ्रिलर, तीनों खानों में रखा गया है। हैकिंग वाली कहानियों में नायक अक्सर स्क्रीन के सामने बैठा रह जाता है, और एक्शन का ठप्पा उम्मीद जगाता है कि यहाँ मेल को कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। जिसके पीछे एक पूरा आपराधिक नेटवर्क और एक गढ़ा हुआ वीडियो हो, वह चुपचाप बैठ भी कहाँ सकता है। डेटा ब्रीच और डीपफेक जैसे शब्द तकनीकी लगते हैं, पर कहानी समझने के लिए कोड की समझ नहीं चाहिए। किसी पर झूठा इल्ज़ाम लगा है और सबूत उसके ख़िलाफ़ दिखता है, इतना काफ़ी है।

फ़िल्म का ज़्यादातर बोझ हॉली मे ब्रूड पर है, क्योंकि कहानी मेल की है और बाक़ी किरदार उसी के इर्द-गिर्द घूमते हैं। उनके सामने एक मुश्किल संतुलन है। उन्हें एक ऐसी औरत निभानी है जिसे अपने हुनर पर पूरा भरोसा है, और फिर उसी औरत को उस भरोसे के हिलने के बीच खड़ा करना है। जो दूसरों के सिस्टम की कमज़ोरी भाँप लेती है, उसे अपनी साख पर पड़ी चोट के सामने घबराहट और फुर्ती, दोनों दिखानी हैं। असली सवाल यह है कि मेल का आत्मविश्वास और उसकी बेबसी एक ही किरदार में विश्वसनीय लगते हैं या नहीं। अगर यह मेल नहीं बैठता, तो बाक़ी सब कमज़ोर पड़ जाता है।

मेल के आसपास कलाकारों की अच्छी-ख़ासी क़तार है। गेज़ा वाइस थॉमस डीन बने हैं, सूज़न रैडर रोस, फ्रैंक लैमर्स बडी, नूर्टये हेर्लार लिंडे वान एर्प, वालिद बेनबरेक इदरीस, लॉरेंस शेल्डन रोजर्स और माइक वाइडेनबॉश रॉबिन। जेनी शिया टीम-सदस्य की भूमिका में हैं, और फे किमिज़र ‘यंग मेल’ यानी मेल के कम उम्र वाले रूप में। हर किरदार का कहानी में ठीक-ठीक क्या काम है, उस पर यहाँ बात करना ठीक नहीं, क्योंकि इस तरह की फ़िल्म में कौन किसकी तरफ़ है, यही देखने का मज़ा है। इतना ज़रूर है कि ‘यंग मेल’ का क्रेडिट बताता है कि पर्दे पर मेल का पुराना रूप भी आता है। जिसकी साख पर सवाल उठा हो, उससे पूछा जाता है कि तुम असल में कौन हो, और उस सवाल का जवाब अक्सर अतीत में मिलता है।

शीर्षक ‘The Takeover’ का सीधा मतलब क़ब्ज़ा या अधिग्रहण है। कहानी के सार से पहला पाठ यही निकलता है कि बस का डेटा और आपराधिक नेटवर्क का धंधा क़ब्ज़े की लड़ाई के दो मैदान हैं। पर एक दूसरी पढ़त भी मुमकिन है। डीपफेक में मेल के रूप का इस्तेमाल उसके ख़िलाफ़ किया जाता है, यानी कोई और उसकी छवि पर क़ब्ज़ा कर लेता है। इस नज़र से देखें तो क़ब्ज़ा केवल बस के सिस्टम तक सीमित नहीं है; मेल का अपना चेहरा और नाम भी किसी और के हाथ में चला जाता है।

मुझे एक आशंका भी है। झूठे इल्ज़ाम में फँसा नायक जो अपनी बेगुनाही साबित करने भागता है, यह ढाँचा पुराना है, और हैकिंग और डीपफेक इस ढाँचे में आए नए औज़ार हैं। थ्रिलर जैसे-जैसे बड़ा होता है, उसमें शुरुआती सवाल के धुँधले पड़ने का ख़तरा रहता है, यानी यह कि भला करने वाले को सज़ा क्यों मिले।

बस पर हुई सेंध रोककर मेल ने किसी का डेटा बचाया, और बदले में अपनी साख गँवाने के कगार पर पहुँच गई। भलाई की यह सज़ा थ्रिलर के लिए अच्छा आधार है, क्योंकि दर्शक को शुरू से पता है कि नाइंसाफ़ी हो रही है और वह उसके पलटने का इंतज़ार करता है। मुझे इस फ़िल्म का आधार पसंद आता है। देखना यह है कि हत्या वाले वीडियो का झूठ अंत तक कहानी पर दबाव बनाए रखता है या बीच में ढीला पड़ जाता है, और डीपफेक सचमुच कहानी के केंद्र में रहता है या महज़ मुसीबतें जोड़ने का साधन बनकर रह जाता है।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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