विज्ञान

एक प्रोटीन को ब्लॉक करने से इम्यून सेल्स कैंसर से लड़ने में बेहद शक्तिशाली हो जाती हैं

Peter Finch

हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में कैंसर से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता होती है। समस्या यह है कि T-सेल्स ट्यूमर के वातावरण में पहुंचते-पहुंचते ऊर्जा खो देती हैं और अपनी ताकत गंवा बैठती हैं। जेरूसलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी, मार्बर्ग यूनिवर्सिटी और MD एंडरसन कैंसर सेंटर के अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने इस समस्या का एक हैरान करने वाला हल खोजा है — Ant2 नाम के एक प्रोटीन को ब्लॉक करने से T-सेल्स का पूरा ऊर्जा तंत्र खुद को नए सिरे से संगठित कर लेता है और ये कैंसर से लड़ने में कहीं अधिक शक्तिशाली हो जाती हैं।

Ant2 को ब्लॉक करने से सेल्स कमज़ोर नहीं, बल्कि और मज़बूत हो गईं

Ant2 प्रोटीन माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर ऊर्जा के आदान-प्रदान को नियंत्रित करता है। जब शोधकर्ताओं ने इसे ब्लॉक किया, तो T-सेल्स सामान्य तरीके से ऊर्जा नहीं बना पाईं। लेकिन उम्मीद के विपरीत, ये कमज़ोर नहीं हुईं। बल्कि इन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा प्रणाली को खुद से पुनर्गठित कर लिया और एक अधिक सक्रिय व आक्रामक “युद्ध की तैयारी” वाली अवस्था में प्रवेश कर गईं।

इस तरह से पुनः प्रोग्राम की गई T-सेल्स ने ट्यूमर को ज़्यादा सटीकता से पहचाना, तेज़ी से बढ़ीं और देर तक सक्रिय रहीं। त्वचा ट्यूमर वाले चूहों पर किए गए प्रयोग में, Ant2-रहित T-सेल्स से इलाज किए गए चूहों में ट्यूमर का आकार स्पष्ट रूप से छोटा हो गया।

जीन एडिटिंग की ज़रूरत नहीं, दवाई से भी होगा काम

इस शोध की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यही असर दवाओं से भी हासिल किया जा सकता है। जब शोधकर्ताओं ने Ant2 को दबाने वाले छोटे अणुओं से सामान्य T-सेल्स को उपचारित किया, तो जेनेटिक बदलाव जैसा ही परिणाम मिला। इसका मतलब यह है कि मरीज़ की T-सेल्स को शरीर से निकालकर, दवाई से अस्थायी रूप से उपचारित करके वापस शरीर में डाला जा सकता है — एक सुरक्षित और व्यावहारिक उपचार पद्धति जो जल्द ही अस्पतालों तक पहुंच सकती है।

यह खोज मौजूदा CAR-T सेल थेरेपी के साथ मिलकर और भी प्रभावशाली हो सकती है, क्योंकि Ant2 का अवरोध उस मूल कमज़ोरी को दूर करता है जिससे ट्यूमर के भीतर T-सेल्स थक जाती हैं।

इंसानों पर इलाज तक पहुंचने में लग सकते हैं 5 से 10 साल

यह शोध अभी प्री-क्लिनिकल स्तर पर है। इंसानों पर प्रयोग से पहले सुरक्षा परीक्षण और खुराक का निर्धारण ज़रूरी है, और विशेषज्ञ अनुमान लगाते हैं कि वास्तविक उपचार तक पहुंचने में 5 से 10 साल लग सकते हैं। हिब्रू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल बर्गर की टीम अभी Ant2 अवरोधक यौगिकों के सुरक्षा परीक्षण और मौजूदा उपचारों के साथ संयोजन पर काम कर रही है। यह शोध Nature Communications में प्रकाशित हुआ है।

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