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Backpackers जंगल का ऐसा थ्रिलर है जो अपने आधार से आगे नहीं बढ़ पाता

बोंग बोर्डोन्स की फ़िलिपीनी एडल्ट थ्रिलर (2022) युवा यात्रियों को जंगल में भेजती है, जहाँ एक हत्यारा उनके पीछे है।
Martha O'Hara
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जंगल की पगडंडी पर चलते कुछ लोग, और उनके पीछे एक ऐसा आदमी जिसकी उन्हें खबर नहीं। Backpackers (2022) का पूरा ढाँचा इसी एक स्थिति पर खड़ा है। बोंग बोर्डोनेस की यह फिलिपीनी थ्रिलर एक लड़के और दो लड़कियों की जंगल यात्रा से शुरू होती है। सफ़र में एक हत्यारा भी साथ चल रहा है, और पूरा तनाव इसी बात से बनता है।

फिल्म को एनिग्मैटिक फिल्म प्रोडक्शन ने प्रस्तुत किया है, यानी यह उनकी ‘एनिग्मैटिक ओरिजिनल’ है। DW17 एंटरटेनमेंट प्रोडक्शंस इसके सहयोग में हैं, और HDLAB पोस्ट प्रोडक्शन भी इससे जुड़ा है। बजट या शूटिंग के हालात के बारे में इन क्रेडिट्स से कुछ पता नहीं चलता, इसलिए मैं उन पर एक शब्द नहीं लिखूँगा।

कलाकारों की सूची में चार नाम हैं। केविन डाय डैग्स बने हैं, रोई नेरी वेल, सलोमे सल्वी कारा, और आयलीन वेलास्को मिच। फिल्म के परिचय में एक लड़के और दो लड़कियों की बात है, जबकि मुख्य कलाकार चार हैं, इसलिए यह साफ़ नहीं कि मिच कहानी में किस जगह खड़ी है। यह सवाल अपने आप में फिल्म के लिए एक हुक बन सकता है। किरदारों के पेशे, उनके आपसी रिश्ते या उनके सामान के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं है, इसलिए उन पर टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा। अभिनय के बारे में इतना कहा जा सकता है कि ऐसी फिल्म में चार चेहरों को एक-दूसरे से अलग पहचान दिलाना ही सबसे बड़ी चुनौती होती है, और कलाकारों का असली इम्तिहान वहीं होता है।

पीछा करने वाली थ्रिलर में डर दर्शक और किरदार के बीच जानकारी के फ़ासले से बनता है: दर्शक जितना ज़्यादा जानता है, किरदार उतना कम। यहाँ किरदार नहीं जानते कि कोई उनका पीछा कर रहा है, और दर्शक की बेचैनी इसी अंतर से पैदा होती है। जंगल यात्रा की मंज़िल भी है और छिपने की जगह भी। जहाँ आसपास कोई बस्ती न हो, वहाँ मदद की गुहार का कोई मतलब नहीं रह जाता, और यह ख़याल ही डर जगाने के लिए काफ़ी है। फिल्म इस माहौल का कितना फायदा उठाती है, यह निर्देशक के हाथ में है।

एक बात और। परिचय कहता है कि हत्यारा यात्रियों के ‘पीछे’ है, यानी ख़तरा शुरू से मौजूद है, वह अचानक कहीं से आ नहीं टपकता। ऐसे में निर्देशक के पास दो रास्ते होते हैं। वह हत्यारे को लंबे समय तक परदे के बाहर रखकर शक और अंदेशे से काम चलाए, या उसे जल्दी सामने लाकर पीछा-भाग का सीधा खेल रचे। पहला रास्ता ज़्यादा धैर्य माँगता है, दूसरा ज़्यादा रफ्तार। इनमें से कौन-सा चुना गया, यह मुझे नहीं मालूम। पर इसी चुनाव से फिल्म का मिज़ाज तय होता है।

कमज़ोरी की आशंका भी यहीं से पैदा होती है। जिस कहानी का सार दो वाक्यों में समा जाए, उसे पूरी फिल्म की लंबाई तक खींचना आसान नहीं। ऐसी फिल्मों में अक्सर तीन ही पड़ाव होते हैं: यात्रा, ख़तरे का एहसास और आख़िरी टकराव। बीच में कोई नया मोड़ न आए तो रफ्तार ढीली पड़ जाती है। मेरी शिकायत यही रहेगी कि परिचय में ऐसे किसी मोड़ का संकेत नहीं मिलता।

यह भी याद रखना चाहिए कि Backpackers को फिलिपीनी वयस्क फिल्म के रूप में पेश किया गया है। यानी थ्रिलर के साथ कामुक आकर्षण का सौदा भी जुड़ा है, और परिचय दोनों लड़कियों को ‘सेक्सी’ कहकर ही सामने रखता है। इस शैली में दो अपेक्षाएँ आपस में खींचतान करती हैं: एक तरफ़ डर का धीमा निर्माण, दूसरी तरफ़ दर्शक की देह-केंद्रित उत्सुकता। अच्छी फिल्म वही होगी जो दोनों को एक-दूसरे के ख़िलाफ़ नहीं, एक-दूसरे के सहारे चलाए। लड़कियों का परिचय सबसे पहले उनके रूप से देना इस संतुलन के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

फिलहाल इस फिल्म के बारे में जो पक्का कहा जा सकता है, वह इतना है: एक यात्रा, चार कलाकार, जंगल और एक अदृश्य पीछा करने वाला। सामग्री कम है, इसलिए बोर्डोनेस की परीक्षा इसी में है कि वे इसे कितनी कसावट से बाँधते हैं। जिन्हें जंगल की पृष्ठभूमि वाली छोटी, सीधी थ्रिलर पसंद है, वे इसे आज़मा सकते हैं। जिन्हें कहानी में कई परतें चाहिए, उन्हें परिचय में ऐसी किसी चीज़ का इशारा नहीं मिलेगा।

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