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डोंट लुक अप जानबूझकर मोटी धार वाला व्यंग्य है, और यही इसकी ताकत है

एडम मैके (2021) ने धूमकेतु को जलवायु संकट और महामारी का रूपक बना दिया।
Martha O'Hara
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डोंट लुक अप की कहानी एक सीधी-सी बात पर टिकी है: दो खगोलशास्त्री पूरी दुनिया को बताना चाहते हैं कि एक धूमकेतु पृथ्वी की ओर आ रहा है, और दुनिया कंधे उचकाकर आगे बढ़ जाती है। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी की डॉक्टरेट छात्रा केट डिबियास्की (जेनिफर लॉरेंस) इस धूमकेतु को खोजती है। उसके सलाहकार डॉ. रैंडल मिंडी (लियोनार्डो डिकैप्रियो) हिसाब लगाकर बताते हैं कि यह लगभग छह महीने में पृथ्वी से टकराएगा और पूरे ग्रह पर जीवन का अंत कर सकता है। प्लैनेटरी डिफेंस कोऑर्डिनेशन ऑफिस के प्रमुख डॉ. टेडी ओग्लथॉर्प (रॉब मॉर्गन) जाँच के बाद इस नतीजे की पुष्टि करते हैं और तीनों इसे लेकर व्हाइट हाउस पहुँचते हैं। वहाँ राष्ट्रपति जैनी ओर्लीन (मेरिल स्ट्रीप) और उनके बेटे व चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जेसन (जोनाह हिल) का रवैया उदासीनता का है। यहीं से फ़िल्म का असली विषय खुलता है: समस्या खगोल विज्ञान की नहीं, सुनने की है।

एडम मैके ने डेविड सिरोटा के साथ मिलकर यह कहानी लिखी, और धूमकेतु को जलवायु संकट का रूपक बनाया। द गार्डियन की समीक्षा के मुताबिक़ समस्या रूपक में नहीं है। अख़बार लिखता है कि ग्लोबल वार्मिंग का ख़तरा अब इतना साफ़ है कि उसकी तुलना उलुरु जितनी बड़ी जलती चट्टान से करना खिंचा हुआ नहीं लगता। वही समीक्षा धूमकेतु को माउंट एवरेस्ट के आकार का बताती है, यानी पर्वत जितना बड़ा पत्थर आसमान से सीधे हमारी ओर आ रहा है। फ़िल्म कोविड-19 महामारी के दौरान विज्ञान के प्रति समाज के रवैये की भी याद दिलाती है, और स्क्रीन रैंट की समीक्षा इन दोनों संकटों को एक साथ जोड़कर पढ़ती है। मैके का निशाना कोई एक पार्टी या एक संस्था नहीं है। राजनीति, बड़ी कंपनियाँ, मशहूर हस्तियाँ और मीडिया, सब इस व्यंग्य की ज़द में आते हैं।

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मीडिया वाला हिस्सा फ़िल्म के सबसे धारदार हिस्सों में गिना जा सकता है। ओग्लथॉर्प के कहने पर डिबियास्की और मिंडी यह ख़बर एक लोकप्रिय सुबह के शो पर देते हैं। वैरायटी के अनुसार, ‘द डेली रिप’ पर केबल टॉक-शो का प्रोड्यूसर उन्हें सलाह देता है: “हल्का रखिए, मज़ेदार रखिए।” होस्ट जैक ब्रेमर (टायलर पेरी) और ब्री इवांटी (केट ब्लैंशेट) धरती के अंत की ख़बर को भी उसी हल्केपन से परोसते हैं, और केट आपा खोकर गुस्से में फट पड़ती है, फिर स्टूडियो छोड़ देती है। नतीजा यह कि जनता की प्रतिक्रिया फीकी रहती है और घबराई हुई वैज्ञानिक ही तमाशा बन जाती है। यह दृश्य तकलीफ़ इसलिए देता है कि उसमें अतिशयोक्ति कम है। हम सबने ऐसी चर्चाएँ देखी हैं जहाँ गंभीर विषय विज्ञापनों के बीच की भराई बन जाता है।

अभिनय पर समीक्षाओं की नज़र सबसे ज़्यादा जेनिफर लॉरेंस और मेरिल स्ट्रीप पर टिकती है। फ़िल्म प्रोब की समीक्षा में लॉरेंस सबसे अलग दिखती हैं: वहाँ लिखा है कि उन्होंने केट को गर्मजोशी, नाज़ुकता और अपनेपन के साथ निभाया, और वही अकेला किरदार था जो सचमुच असली लगा। वैरायटी केट की छवि पर भी ध्यान देता है: नाक की नथ और रेड वेलवेट केक जैसे रंग के बाल। उसी पत्रिका की नज़र में डिकैप्रियो के मिंडी का हुलिया बेढंगा-सा है। फ़िल्म प्रोब के अनुसार डिकैप्रियो मज़बूत हैं, पर मिंडी के अजीब और सनकी चुनाव उनके अभिनय पर भारी पड़ जाते हैं। द गार्डियन उनके किरदार को इंसानों से घबराने वाला और ज़ैनैक्स का आदी बताता है। वैरायटी का कहना है कि स्ट्रीप ने साफ़ तौर पर बाक़ियों से ज़्यादा मज़ा लिया, जबकि द गार्डियन उनकी राष्ट्रपति को ‘पैंटोमाइम की खलनायिका’ कहता है। मार्क राइलेंस टेक जगत के पीटर इशरवेल बने हैं, जिन्हें गार्डियन एक डरावना ब्रिटिश टेक मुग़ल बताता है।

रोजर एबर्ट की समीक्षा की एक टिप्पणी ग़ौर करने लायक़ है: अगर इस फ़िल्म को कोई पुरस्कार मिलना चाहिए तो वह कास्टिंग डायरेक्टर फ़्रांसीन मैस्लर को, क्योंकि नेटफ़्लिक्स की इस फ़िल्म में बड़े और महँगे नाम ठूँसे हुए हैं। यह वाक्य कास्टिंग की दाद भी देता है और उसकी भीड़ पर चुटकी भी लेता है। इतना बड़ा जमावड़ा फ़िल्म में रंग भरता है, पर कई जगह ध्यान भी बाँट देता है। फ़िल्म प्रोब की समीक्षा के अनुसार ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल हुए कैमियो खटकते हैं, हालाँकि टिमोथी शालामे का किरदार उन्हें दूसरी बार देखने पर पसंद आया। पहली नज़र में यह कास्टिंग उन्हें सबसे बेतुकी लगी थी, पर दोबारा देखने पर वही किरदार दिलचस्प निकला।

हास्य के सवाल पर राय बँटी हुई है। स्क्रीन रैंट के मुताबिक़ मैके कॉमेडी और ड्रामे का संतुलन कमाल का साधते हैं, और फ़िल्म का हर मज़ाक़ भीतर कहीं बेचैनी लिए रहता है। समीक्षा सरकारी अफ़सर के उस बार-बार दोहराए जाने वाले मज़ाक़ का ज़िक्र करती है जिसमें वह मुफ़्त चीज़ों के बारे में झूठ बोलता है, और इसे ठहाके वाला दृश्य मानती है। द गार्डियन की राय उलटी है। उसके लिए यह 145 मिनट के सैटरडे नाइट लाइव स्केच जैसी, मेहनत से गढ़ी हुई और कुछ ज़्यादा सचेत व्यंग्य-रचना है, जिसमें न ‘सक्सेशन’ की चमकदार कॉमेडी है और न विषय की माँग के मुताबिक़ गंभीरता। गार्डियन इसमें ‘डॉ. स्ट्रेंजलव’, ‘नेटवर्क’ और ‘वैग द डॉग’ की झलक देखता है। वैरायटी तो इसे घमंडी और आसान निशानों पर वार करने वाला व्यंग्य कहता है, जिसका सार यही है कि इंसान बेवक़ूफ़ हैं और किसी बात पर एकमत नहीं हो सकते। मेरी अपनी राय में ये आपत्तियाँ बेवजह नहीं हैं। जहाँ व्यंग्य सीधा उपदेश बन जाता है, वहाँ उसकी धार कुंद हो जाती है।

फिर भी असहमत समीक्षक एक जगह आकर मिलते हैं: किसी ने इस फ़िल्म को हल्के में नहीं लिया। फ़िल्म प्रोब की समीक्षा में पहली बार देखने पर इसे ऊँची-नीची, उपदेशी और भारी-भरकम पाया गया, पर दोबारा देखने पर राय बदल गई और इसे एक तीखा व्यंग्य माना गया जो हल हो सकने वाले संकट को नकारने की समस्या से सीधे टकराता है। यानी जिस फ़िल्म ने पहली बार चिढ़ाया था, उसी ने दूसरी बार अपने संदेश से जोड़ लिया। समीक्षा यह भी चेताती है कि यह आसान देखने वाली फ़िल्म नहीं है, और ज़्यादा सोचने वाले दर्शक को कहानी अस्तित्व के सवालों तक ले जा सकती है।

फ़िल्म के बनने का सफ़र भी इसके संदर्भ को समझाता है। इसकी घोषणा नवंबर 2019 में हुई थी। शुरू में इसे पैरामाउंट पिक्चर्स के साथ सिनेमाघरों में आना था, पर कुछ महीनों बाद वितरण अधिकार नेटफ़्लिक्स ने ले लिए। जेनिफर लॉरेंस सबसे पहले जुड़ीं और डिकैप्रियो पटकथा में बदलावों पर मैके से बातचीत के बाद शामिल हुए। शूटिंग मूल रूप से अप्रैल 2020 में मैसाचुसेट्स में शुरू होनी थी, पर कोविड-19 की वजह से टल गई। वह नवंबर 2020 में शुरू हुई और फ़रवरी 2021 में पूरी हुई। फ़िल्म 10 दिसंबर 2021 को सीमित सिनेमाघरों में आई और 24 दिसंबर को नेटफ़्लिक्स पर। यानी इसे महामारी के बीच शूट किया गया और महामारी के दौर में ही दर्शकों के सामने रखा गया, जब दुनिया विज्ञान और सरकारी चेतावनियों पर बहस कर रही थी। फ़िल्म का विषय उसी माहौल से सीधा जुड़ता है।

आलोचकों के बीच बँटी राय के बावजूद संस्थाओं ने इसे अपनाया। अभिनय और संगीत की सराहना हुई। नेशनल बोर्ड ऑफ़ रिव्यू और अमेरिकन फ़िल्म इंस्टीट्यूट ने इसे 2021 की दस सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों में रखा। इसे चार ऑस्कर नामांकन मिले, जिनमें सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म भी शामिल है। इसके अलावा चार गोल्डन ग्लोब और छह क्रिटिक्स चॉइस नामांकन मिले, और राइटर्स गिल्ड ऑफ़ अमेरिका के 74वें समारोह में इसने सर्वश्रेष्ठ मौलिक पटकथा का पुरस्कार जीता। नेटफ़्लिक्स पर एक हफ़्ते में सबसे ज़्यादा देखे गए घंटों का रिकॉर्ड भी इसने बनाया, और रिलीज़ के 28 दिनों में यह प्लैटफ़ॉर्म की दूसरी सबसे ज़्यादा देखी गई फ़िल्म बनी। द गार्डियन की डोना लू ने लिखा कि फ़िल्म को कई समीक्षकों से ठंडा स्वागत मिला, जबकि जलवायु कार्यकर्ताओं ने इसे दिल खोलकर सराहा।

मेरे लिए इस फ़िल्म का सबसे यादगार क्षण वही है जहाँ हँसी और घबराहट एक साथ आते हैं: सुबह के शो का वह स्टूडियो, जहाँ धरती के अंत की ख़बर ‘हल्का और मज़ेदार’ रखने की सलाह के साथ परोसी जाती है। कैमियो की भरमार, कुछ जगह ज़बरदस्ती खींचा गया हास्य और उपदेशी लहजा फ़िल्म को बोझिल करते हैं, यह गार्डियन और वैरायटी की शिकायतों से मेल खाता है। लेकिन लॉरेंस की सहजता, स्ट्रीप की मौज और मीडिया की चमक-दमक पर सटीक चोट फ़िल्म को बहस के लायक़ बनाए रखती है। जिन्हें सुघड़ और संयत फ़िल्म चाहिए, उन्हें मैके यहाँ निराश करेंगे। जो ऐसे व्यंग्य को पर्दे पर देखना चाहते हैं जो चेतावनी को चुटकुला बनते दिखाए, वे इसे अपनी राय बनाने के लिए एक बार ज़रूर देखें।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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