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शैतानी रात अमेरिकी हॉरर सिनेमा की अजेय ऊंचाई है — और यह बात बहस से परे है

विलियम फ्रीडकिन की 1973 की यह कृति आज भी डराती है, उत्तेजित करती है और आस्था के सवालों को अनुत्तरित छोड़ देती है।
Martha O'Hara
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शैतानी रात की शुरुआत एक ऐसे दृश्य से होती है जो देखने वाले को उसकी जगह जमा देता है — एक युवा लड़की का चेहरा पलटता है, आँखें उलट जाती हैं और होठों से एक गहरी, अनजानी आवाज़ निकलती है। यह महज़ एक भयावह प्रसंग नहीं, बल्कि उस सिनेमाई त्रासदी की शुरुआत है जो विलियम फ्राइडकिन की शैतानी रात (1973) का आधार बनती है। फिल्म एक माँ के डर और यातना की कहानी है जब उसकी बेटी एक रहस्यमय शक्ति के चंगुल में फँसने लगती है।

शैतानी रात एक साधारण घर में शुरू होती है, जहाँ अभिनेत्री क्रिस मैकनील (एलन बर्स्टिन) अपनी बारह साल की बेटी रेगन (लिंडा ब्लेयर) के साथ रहती है। रेगन एक स्पिरिट बोर्ड खेलने लगती है और अनजाने में एक दुष्ट शक्ति का द्वार खोल देती है। फिल्म की असली ताकत इस बात में निहित है कि यह केवल एक भयानक कहानी नहीं — यह एक माँ के असहाय होते जाने की कहानी है। क्रिस के डर और बेबसी को एलन बर्स्टिन ने इस तरह जिया है कि दर्शक उनके साथ हर पल काँपता है।

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फिल्म की सबसे मजबूत बात उसकी दृश्य संरचना है। जब रेगन पहली बार बदलती है, तो फ्राइडकिन का कैमरा बड़ी सावधानी से उसके चेहरे पर टिकता है — हर छोटी-सी हलचल भयानक हो उठती है। यह भय का मात्र एक बाहरी प्रतीक नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक युद्ध का दृश्य संकेत है जो पूरी फिल्म में गूँजता रहता है।

हालाँकि, फिल्म के कुछ पहलू कमजोर भी हैं। शुरुआती दृश्यों में रेगन के परिवर्तन की प्रक्रिया को इतना समय दिया गया है कि कुछ दर्शकों का ध्यान भटक सकता है। इसके अलावा, धार्मिक संदेश कुछ जगहों पर इतने खुले हैं कि वे उन दर्शकों के लिए रुकावट बन सकते हैं जो इस पृष्ठभूमि से नहीं आते।

लेकिन इन कमियों के बावजूद, शैतानी रात देखने वाले पर अपनी पकड़ नहीं छोड़ती। फिल्म का अंतिम दृश्य, जहाँ रेगन की आँखें फिर से सामान्य हो जाती हैं और वह अपनी माँ के पास लौटती है, एक साथ गहरी राहत और एक अनकही उदासी जगाता है। भय सिर्फ बाहरी शक्तियों से नहीं आता — यह उस खोने के डर से भी आता है जो हर माँ-बेटी के रिश्ते की तह में दबा होता है।

एलन बर्स्टिन और लिंडा ब्लेयर के अभिनय ने फिल्म को एक अलग ऊँचाई दी है, जबकि फ्राइडकिन के निर्देशन ने हर दृश्य को दर्शक के ज़हन में इस तरह बिठाया है कि वह बरसों तक नहीं भूलता।

फिल्म की निर्माण प्रक्रिया उसकी कहानी जितनी ही परीक्षा लेती रही। विलियम पीटर ब्लैटी और फ्राइडकिन को एलन बर्स्टिन, लिंडा ब्लेयर और जेसन मिलर — तीनों कम-जाने-पहचाने चेहरों — को चुनने के लिए वार्नर ब्रदर्स के कार्यकारियों से लड़ना पड़ा। यही जिद सही साबित हुई: इन्हीं अपरिचित चेहरों की वजह से परदे पर जो घटता है वह वास्तविक लगता है, न कि किसी स्टार की परिचित उपस्थिति। मुख्य शूटिंग कठिन रही — कलाकार और स्टाफ घायल हुए, कुछ की मृत्यु हुई, और अप्रत्याशित दुर्घटनाओं ने समय-सारणी को तोड़ दिया। उत्पादन का समय दोगुना हो गया और लागत लगभग तीन गुना तक जा पहुँची। इन तमाम हादसों ने “फिल्म पर अभिशाप है” जैसी अफवाह जन्म दी।

26 दिसंबर 1973 को अमेरिका में रिलीज़ के बाद आलोचनाएँ मिली-जुली रहीं, पर दर्शकों ने कड़कड़ाती ठंड में थियेटर के बाहर लंबी कतारें लगाईं। हाउसफुल शो वार्नर ब्रदर्स के लिए असाधारण रूप से लाभदायक रहे क्योंकि इसे चार-दीवार वितरण समझौतों के तहत बुक किया गया था — किसी बड़े स्टूडियो के लिए यह पहला मौका था। कुछ दर्शकों को सेरेब्रल एंजियोग्राफी जैसे दृश्य देखकर बेहोशी हो गई या उल्टी आई। मोशन पिक्चर एसोसिएशन ऑफ अमेरिका पर आरोप लगे कि उसने ‘एक्स’ की जगह ‘आर’ रेटिंग देकर परेशानियों से जूझती इस निर्माण को व्यावसायिक राह दी।

सांस्कृतिक परिदृश्य में शैतानी रात की जगह बेमिसाल है। यह पहली हॉरर फिल्म थी जो अकादमी अवार्ड में बेस्ट पिक्चर के लिए नामांकित हुई — और कुल दस श्रेणियों में दावेदार रही। ब्लैटी ने बेस्ट एडैप्टेड स्क्रीनप्ले जीता, जबकि साउंड इंजीनियर्स ने बेस्ट साउंड। 2010 में अमेरिका के राष्ट्रीय फिल्म रजिस्टर ने इसे “सांस्कृतिक, ऐतिहासिक या सौंदर्यात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण” मानते हुए संरक्षित किया।

फिल्म का असली केंद्र फादर कारस (जेसन मिलर) की उलझन में है — एक पुजारी जो खुद आस्था के किनारे पर खड़ा है। जब वह रेगन के कमरे में पहली बार कदम रखता है तो यह केवल एक भूत भगाने की प्रक्रिया नहीं — यह एक ऐसे संशयवादी की अग्निपरीक्षा है जिसे अब उसी आस्था की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। फ्राइडकिन इस अंतर्द्वंद्व को कभी सुलझाते नहीं, बस उसे उघाड़ते हैं। यही बात शैतानी रात को एक साधारण डरावनी फिल्म से अलग करती है।

दशकों बाद भी यह फिल्म उसी सघनता से असर करती है। उसका कारण केवल भयानक दृश्य नहीं हैं — यह वह खालीपन है जो फादर मेरिन (मैक्स वॉन सिडो) और कारस के बीच की चुप्पी में है, वह असमंजस है जो क्रिस के चेहरे पर तब होता है जब डॉक्टर उसे कोई जवाब नहीं दे पाते। फ्राइडकिन ने यथार्थवाद को ऐसे इस्तेमाल किया कि भय परदे से निकलकर देखने वाले की साँसों में उतर आता है।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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