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खतरनाक खेल: स्पेस जैम की सस्ती नकल, जो सिर्फ़ अपनी सबसे बेतुकी घड़ियों में हँसाती है

मिच शॉयर की 2022 की एनिमेटेड फ़िल्म में ज़्लाटन, रैपिनो और "वीयर्ड अल" स्लाइम राक्षसों से भिड़ते हैं।
Martha O'Hara
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«खतरनाक खेल» की शुरुआत स्टेडियम से होती है। ज़लातान इब्राहिमोविच गोल करते हैं, भीड़ झूम उठती है और कमेंटेटर रॉब स्टोन उनकी तारीफ़ में जुट जाते हैं। फ़िल्म की बेतुकी दुनिया का पहला इशारा भी यहीं मिलता है। घोषणाकर्ता पूछता है कि “ऑल-स्टार कप के ऑल-स्टार ऑफ़ ऑल टाइम” का ख़िताब किसे मिलेगा। आर्ट्सफ़्यूज़ के समीक्षक के मुताबिक़ यह मज़ाक़ हर बार दोहराए जाने पर और ज़्यादा हँसाता है, और मुझे भी यह चलता हुआ गैग ठीक लगा। निर्देशक मिच शाउअर ने कहानी को इतने सीधे ढाँचे में रखा है कि पहले ही मिनट में साफ़ हो जाता है कि यह बच्चों की स्लैपस्टिक कॉमेडी है।

कहानी छोटी-सी है। सॉकर बॉल से हरे रंग के स्लाइम राक्षस निकलने लगते हैं। इसके पीछे एक दुष्ट वैज्ञानिक है, जिसे “वीयर्ड अल” यैंकोविक ख़ुद अपनी आवाज़ देते हैं। वह दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ियों की प्रतिभा चुराना चाहता है। उसके रास्ते में चार बच्चे आ खड़े होते हैं, जो इन सितारों के पक्के प्रशंसक हैं। हाईऑनफ़िल्म्स के ब्योरे के अनुसार वे “क्रीचर कैचर्स” नाम से कीट-नियंत्रण की सेवा चलाते हैं। उसी ब्योरे में लिखा है कि ज़लातान को ज़ाना की गोलकीपिंग और नौताई की गेंद को हवा में उछालते रहने की कला प्रभावित करती है। यहीं से ये बच्चे अपने आदर्श खिलाड़ियों को बचाने की मुहिम में शामिल हो जाते हैं।

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फ़िल्म का सबसे मज़बूत पहलू यैंकोविक हैं। डेसाइडर ने उन्हें इस पूरे तमाशे का असली सितारा कहा है और लिखा है कि वे बेतुकी स्थिति से भी पूरा मज़ा निचोड़ लेना जानते हैं। खलनायक बनकर वे एनिमेटेड दुनिया के दृश्यों को चबा जाने की हद तक अभिनय करते हैं। आर्ट्सफ़्यूज़ याद दिलाता है कि बेतुकापन अल की पुरानी पहचान है। उसके अनुसार वे ख़ुद का एक काल्पनिक संस्करण निभाने को हमेशा तैयार रहते हैं, और परदे का वैज्ञानिक अल असल कलाकार के किसी जवान संस्करण जैसा दिखता है। वह सबसे बड़ा ऑल-स्टार बनना चाहता है। क्यों चाहता है, यह फ़िल्म नहीं बताती। आर्ट्सफ़्यूज़ इस पर कंधे उचकाकर कहता है कि लूनी ट्यून्स जैसी दुनिया में कारण पूछना बेकार है। मैं इस दलील से आधा ही सहमत हूँ। प्रेरणा का यह ख़ालीपन खलनायक के हर दृश्य को थोड़ा हल्का कर देता है।

ज़लातान इब्राहिमोविच ख़ुद का मज़ाक़ बनाने में पीछे नहीं रहते। आर्ट्सफ़्यूज़ के अनुसार वे अपने काल्पनिक रूप को बेहद अहंकारी, दिखावा पसंद सितारे की तरह पेश करते हैं और इसमें उन्हें साफ़ मज़ा आता है। डेसाइडर ने जो क्षण पकड़ा है, वह इस हास्य को अच्छी तरह दिखाता है। ज़लातान तोहफ़े का डिब्बा खोलने से पहले ख़ुशी से कहते हैं, “तोहफ़ा! क्या है इसमें? उम्मीद है जेटपैक होगा!” डिब्बे से निकलता है एक उत्परिवर्तित स्लग, जो उनकी ताक़त सोख लेता है। तब वे घबराकर चीख़ते हैं, “अरे, यह क्या हो रहा है? यह तो नई यूनिफ़ॉर्म है!” पल भर पहले का भोला उत्साह और अगले ही पल की घबराहट एक ही दृश्य में आ जाते हैं, और हँसी उसी झटके से निकलती है। कॉमन सेंस मीडिया के मुताबिक़ आगे चलकर ज़लातान, मेगन रैपिनो और ख़ुद यैंकोविक भी विशाल हरे राक्षसों में बदल जाते हैं। उसी के ब्योरे में राक्षसी स्लग और एक जीवित हो उठी राक्षसी पोनीटेल का ज़िक्र है। कलाकारों की सूची में तो «म्यूटेंट ज़लातान» नाम का अलग किरदार भी दर्ज है, जिसे इयान जेम्स कॉर्लेट ने आवाज़ दी है। यानी परदे पर एक ही सितारे के दो रूप मिलते हैं: अपनी आवाज़ वाला असली खिलाड़ी और उसका राक्षसी हमशक्ल।

बच्चों वाला हिस्सा सबसे कमज़ोर है। आर्ट्सफ़्यूज़ ने खुलकर माना है कि ये बच्चे, जिनकी उम्र लगभग दस से बारह के बीच है, कहानी का सबसे नीरस हिस्सा हैं। उसकी दलील है कि किसी को तो सीधा-सादा साथी बनना ही पड़ता है। बात आंशिक रूप से सही है, पर चारों के पास हँसाने को बहुत कम है। ओ’डैंग, ज़ाना और नौताई जैसे किरदार अपनी अलग शख़्सियत मुश्किल से बना पाते हैं। जब सितारे इतने चटक रंग में मौजूद हों, तब बच्चों की यह साधारणता और खटकती है।

यह फ़िल्म किसके लिए है, इस पर भी सवाल उठता है। डेसाइडर की राय है कि इसका हास्य और लहजा दस साल या उससे छोटे बच्चों को ही भाएगा। फिर भी वह उन्हीं खिलाड़ियों और हस्तियों की जान-पहचान पर बहुत टिकी है, जिन्हें उस उम्र के ज़्यादातर बच्चे शायद उतना न जानते हों। उसने फ़िल्म को “स्पेस जैम” का फुटबॉल-संस्करण कहा है, जिसमें माइकल जॉर्डन की जगह फुटबॉल सितारे हैं और अंतरिक्ष के एलियनों की जगह एक सनकी वैज्ञानिक। मुझे यह मिलान सटीक लगता है। 73 मिनट की फ़िल्म में चुटकुलों और तकियाकलामों की भरमार है। आर्ट्सफ़्यूज़ इसी को फ़िल्म की ख़ूबी मानता है, जबकि डेसाइडर को इस ठूँसाठूँसी से थकान होती है।

डर के मामले में कॉमन सेंस मीडिया सबसे सख़्त है। उसके मुताबिक़ राक्षस बार-बार कैमरे की तरफ़ झपटते और गुर्राते हैं। एक दृश्य में एक आदमी घूमती हुई हड्डी-काटने वाली आरी लेकर हमला करता है। अंत का बड़ा दैत्य बिच्छू और मकड़ी का मेल जैसा है, जिसके खुले मुँह में दाँतों की दो क़तारें हैं और गले के पीछे हवा में लटकी एक आँख। कॉमन सेंस मीडिया की चिंता है कि यह सब छोटे दर्शकों के लिए ज़रूरत से ज़्यादा डरावना है। बच्चों को हँसाने के लिए बनी फ़िल्म उन्हीं को डराने वाले दृश्य भी परोस देती है।

एनिमेशन के रूप-रंग पर आर्ट्सफ़्यूज़ का कहना है कि इस पर और समय और ध्यान लगाया जा सकता था और लगाया जाना चाहिए था। फिर भी उसे लगता है कि फ़िल्म इतनी मज़ेदार है कि यह कमी उतनी नहीं अखरती। मुझे यह रियायत कुछ उदार लगती है। स्लैपस्टिक में चित्र की धार ही चुटकुले की धार बनती है, और यहाँ वह कई जगह भोथरी रह जाती है।

«खतरनाक खेल» से दो चीज़ें याद रहती हैं: ज़लातान का जेटपैक वाला संवाद और यैंकोविक की उमंग भरी अदाकारी। दूसरी तरफ़ फीके बच्चे, कमज़ोर एनिमेशन और कुछ हद से ज़्यादा डरावने दृश्य फ़िल्म का मज़ा घटाते हैं। दस साल से छोटे फुटबॉल-प्रेमी बच्चों के लिए यह एक शाम काट देने लायक फ़िल्म है। बड़ों को यैंकोविक की अदा पर कुछ मुस्कानें मिल जाएँगी, इससे ज़्यादा नहीं।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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