फ़िल्में

द स्वान में वेस एंडरसन की सधी हुई फ्रेमें क्रूरता का ठंडा और सटीक चित्र बन जाती हैं

रोआल्ड डाल की कहानी पर वेस एंडरसन की 17 मिनट की लघु फ़िल्म, 2023, हेनरी शुगर से ज़्यादा गहरी और कसी हुई है।
Martha O'Hara
हमें Google पर जोड़ें

“द स्वान” वेस एंडरसन की 2023 की लघु फिल्म है। करीब 17 मिनट की इस फिल्म में बात एक ही है: पीछा। दो डील-डौल वाले, नासमझ धौंसिया एक छोटे लेकिन कहीं तेज़ दिमाग़ वाले बच्चे के पीछे पड़े हैं। बच्चे का नाम पीटर वॉटसन है और उसे आसा जेनिंग्स ने निभाया है। आधार रोआल्ड डाल की कहानी है, जो किशोर पाठकों के लिए लिखी गई थी। फिल्म सितंबर 2023 के अंत में नेटफ्लिक्स पर डाल की कहानियों पर बनी चार लघु फिल्मों के साथ आई। कहने का ढंग एंडरसन ने “द वंडरफुल स्टोरी ऑफ़ हेनरी शुगर” से आगे बढ़ाया है: कहानी एक सूत्रधार की आवाज़ में सुनाई जाती है।

पहले इसी आवाज़ की बात। रूपर्ट फ्रेंड कथावाचक हैं और वही वयस्क पीटर भी हैं। यानी पीछा किए जाने का क़िस्सा वह आदमी सुना रहा है जो उससे बचकर निकल आया। इसलिए परदे पर दिखने वाले डर के साथ-साथ यादों की एक दूरी भी चलती रहती है। फ्रेंड की आवाज़ भावुक होने की कोशिश नहीं करती। वह सधी हुई है, थोड़ी संकोच भरी, और उसी संकोच के चलते क्रूर बातें ज़्यादा सच्ची लगती हैं। राल्फ़ फ़ाइंस रोआल्ड डाल की भूमिका में हैं, यानी लेखक खुद अपनी कहानी के भीतर आ खड़ा होता है। कथावाचक के भीतर एक और कथावाचक रख देना दिखावटी हो सकता था। यहाँ मुझे यह खटका नहीं, क्योंकि लेखक की मौजूदगी कहानी के ऊपर एक बड़े की निगरानी जैसी बन जाती है, और पीटर की कहानी इसी निगरानी में सुनाई जाती है।

दृश्य-भाषा में एंडरसन को पहचानने में देर नहीं लगती: सममित फ्रेम, नपी-तुली बनावट और सोच-समझकर चुने गए रंग। मगर यह सधा हुआ सलीका एक बेरहम विषय के साथ रखा गया है। ब्रिटिश फिल्म वर्गीकरण संस्था बीबीएफ़सी ने इसमें हिंसा के संदर्भ, धौंस जमाने का विषय और ख़तरनाक बर्ताव दर्ज किया है। एक बच्चे को सताया जा रहा है, और वह इतने करीने से सजे फ्रेमों में है। इससे एक खटकने वाला फ़र्क बनता है, और मेरा अंदाज़ा है कि यह जानबूझकर है। जब फ्रेम इतना व्यवस्थित हो, तो बच्चे के भागने की जगहें भी तय-सी लगती हैं, और पीछा करने वालों की क्रूरता पहले से लिखी हुई दिखती है।

इस सजावट का एक नुक़सान भी मुझे दिखा। फिल्म ख़त्म होने के बाद मेरे मन में यह सवाल रह गया कि क्या कहीं बनावट कहानी पर भारी पड़ गई। जब हर फ्रेम बेदाग़ हो, तो दर्शक पीटर की फ़िक्र करने के बजाय फ्रेम निहारने लगता है। सत्रह मिनट में साँस लेने की जगह वैसे ही कम होती है, और कभी-कभी लगता है कि एंडरसन थोड़ा हाथ ढीला छोड़ें तो भावना अपना रास्ता खुद निकाल लेगी।

अभिनय के नाम पर फिल्म का बड़ा बोझ आसा जेनिंग्स पर है। उन्हें यक़ीन दिलाना है कि एक बच्चा डरा हुआ भी हो सकता है और चौकन्ना भी, और ज़रा-सा संतुलन बिगड़ा तो किरदार महज़ तस्वीर बनकर रह जाता है। कलाकारों की सूची के आख़िरी चार नाम, एलियल फ़ोर्ड, ट्रूमैन हैंक्स, बेनुआ एरलैं और ऑक्टावियो टैपिया, स्टेजहैंड के रूप में दर्ज हैं। इस किरदार-नाम से लगता है कि फिल्म रोज़मर्रा की ज़िंदगी का टुकड़ा दिखाने के बजाय मंच पर रची गई प्रस्तुति जैसी बनी है। यह बीती घटना को सुनाते वयस्क की आवाज़ से मेल खाता है।

विषय की बात करें तो नेटफ्लिक्स की एक समीक्षा के मुताबिक कहानी आज़ादी, सहनशक्ति और आस्था के इर्द-गिर्द घूमती है। मैं इससे काफ़ी हद तक सहमत हूँ। पीटर छोटा है और उसके पीछे पड़े लड़के बड़े हैं। ऐसे में फिल्म का ज़ोर जीत से ज़्यादा टिके रहने पर दिखता है। यह नज़रिया उन बाल-कहानियों से अलग है जो हर तकलीफ़ का हिसाब तुरंत चुकता कर देती हैं। यहाँ बड़ों की रूखी दुनिया के बीच खड़े बच्चे को मासूम बने रहने की रियायत नहीं मिलती, और फिल्म दर्शक को भी झूठी तसल्ली नहीं देती।

सबसे बड़ी कमज़ोरी इसकी लंबाई है। सत्रह मिनट में एक स्थिति, एक आवाज़ और दर्द का वादा खड़ा हो जाता है, पर इतना समय नहीं बचता कि हम उन दो धौंसियों के साथ या उनके किए के साथ देर तक ठहर सकें। वे “नासमझ” शब्द से परिभाषित खलनायक हैं, और उससे थोड़े ही ज़्यादा। इसी वजह से असर घटनाओं से कम और सुनाने वाले की आवाज़ से ज़्यादा आता है।

“हेनरी शुगर” के मुक़ाबले यह लघु फिल्म कम महत्वाकांक्षी है, पर ज़्यादा केंद्रित। फिल्म ख़त्म हुई तो मेरे साथ बड़े हो चुके पीटर की आवाज़ रह गई, उसका पीछा करने वालों के चेहरे नहीं। मुझे लगता है कि फिल्म को इतना ही चाहिए था, और इतनी छोटी फिल्म के लिए यह छोटी बात नहीं है।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

टैग: , , , , ,

हमें Google पर जोड़ें

चर्चा

0 टिप्पणियाँ हैं।