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I Saw the TV Glow असमान है, पर किसी शो से प्यार करने के अकेलेपन को बेहद गहराई से पकड़ती है

जेन श्योनब्रुन की 2024 की फ़िल्म, जहाँ टीवी की कल्पना असली ज़िंदगी से ज़्यादा सच्ची लगने लगती है।
Martha O'Hara
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एक अकेला किशोर, देर रात आने वाला एक रहस्यमय टीवी शो और बड़े होने की बेचैनी। जेन शॉनब्रुन की I Saw the TV Glow इन्हीं तीन चीज़ों से बनी है और शुरू होते ही दर्शक को टेलीविज़न की फीकी रोशनी वाले कमरे में बिठा लेती है। 1996 के किसी उपनगर में ओवन (जस्टिस स्मिथ) स्कूल में मैडी (जैक हेवेन) से मिलता है। मैडी उसे “द पिंक ओपेक” नाम के शो से परिचित कराती है। यह किशोरों का शो है, जिसमें इज़ाबेल और टारा अपने मानसिक जुड़ाव के सहारे खलनायक मिस्टर मेलंकली से लड़ती हैं। मिस्टर मेलंकली समय और वास्तविकता को तोड़-मरोड़ सकता है। शो ओवन के सोने के समय के बाद आता है और उसके पिता को यह पसंद नहीं, इसलिए ओवन को चुपके से घर से निकलकर मैडी के यहाँ जाना पड़ता है। जो एपिसोड छूट जाते हैं, उनकी टेपें मैडी उसे दे देती है।

यहाँ तक फिल्म किसी कोमल दोस्ती की कहानी लगती है। फिर मैडी कहती है कि “द पिंक ओपेक” उसे अपनी असली ज़िंदगी से ज़्यादा असली लगता है, और यह वाक्य फिल्म के बाकी हिस्से पर भारी पड़ता रहता है। दो साल बाद, 1998 में, शो देखते हुए मैडी अचानक रोने लगती है। बाद में वह बताती है कि उसने घर छोड़ने का फ़ैसला कर लिया है और उम्मीद करती है कि ओवन भी साथ चलेगा। ओवन हिम्मत नहीं जुटा पाता और पीछे रह जाता है। फिर मैडी गायब हो जाती है, ओवन की माँ ब्रेंडा कैंसर से मर जाती है और पाँच सीज़न के बाद शो बंद हो जाता है। 2006 में ओवन अब भी अपने पिता फ्रैंक के साथ रहता है और एक स्थानीय सिनेमाघर में काम करता है। तभी एक रात मैडी लौट आती है।

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उसकी वापसी के बाद का हिस्सा फिल्म का सबसे बेचैन करने वाला हिस्सा है। मैडी का दावा है कि इन दो सालों में वह खुद शो के भीतर रही। बाद में वह ओवन को बताती है कि घर छोड़ने के बाद भी उसे चैन नहीं मिला, इसलिए उसने एक आदमी को पैसे देकर खुद को ज़िंदा दफनवाया। दम घुटने के बाद उसकी आँख “द पिंक ओपेक” में टारा के रूप में खुली। इस बयान को सच मानें, भ्रम मानें या किसी और चीज़ का रूपक, यह दर्शक पर छोड़ दिया गया है, और यहीं फिल्म सबसे मज़बूत है। मैडी के कहने पर ओवन शो का आखिरी एपिसोड दोबारा देखता है, टूट जाता है और टीवी के परदे में सिर घुसाने की कोशिश करता है, जब तक फ्रैंक उसे खींचकर बाहर नहीं निकाल लेता। मुझे यह दृश्य इसलिए याद रहा कि उसमें कोई तमाशा नहीं है। एक आदमी बस अपने ही कमरे में, अपने ही पिता के सामने, किसी और दुनिया में घुसने की कोशिश कर रहा है।

शॉनब्रुन कहानी जिस उलझन में चलती है, कैमरा भी उसी में टिका रहता है: टेलीविज़न की रोशनी में बनती-बिगड़ती असलियत। पर मुझ पर सबसे ज़्यादा असर उस सवाल का हुआ कि कोई दुनिया आख़िर कब “ज़्यादा असली” लगने लगती है। ओवन के लिए यह सवाल किताबी नहीं है। वह पिता की नापसंदगी के बीच चुपके से टीवी देखता है, और अपने बारे में उसके पास शब्द अभी नहीं हैं। शो उसके लिए बच निकलने की जगह भी है और खुद को पहचानने का ज़रिया भी। मैंने ऐसी फिल्में कम देखी हैं जो किसी टीवी शो के प्रति लगाव को इतनी गंभीरता से लेती हों, बिना उसका मज़ाक उड़ाए और बिना उसे ज़रूरत से ज़्यादा महान बनाए।

अभिनय में जस्टिस स्मिथ का ओवन चुप रहकर बहुत कुछ कहता है। वह ऐसा किरदार है जो हर बार कुछ कहने से पहले रुक जाता है, और स्मिथ इस झिझक को खींचते नहीं, बारीकी से पकड़ते हैं। जैक हेवेन की मैडी में बेसब्री और तकलीफ़ साथ-साथ चलती हैं, और यही मिलावट उसे भरोसे लायक भी बनाती है और डरावनी भी। हेलेना हावर्ड और लिंडसे जॉर्डन शो के भीतर इज़ाबेल और टारा बनी हैं। ब्रेंडा के रूप में डेनियल डेडवाइलर हैं और फ्रैंक के रूप में फ्रेड डर्स्ट, और पिता-पुत्र के बीच की ठंडी दूरी में फ्रैंक की मौजूदगी का वज़न महसूस होता है। एम्मा पोर्टनर कई भूमिकाओं में दिखती हैं, जिनमें खलनायक मिस्टर मेलंकली भी है।

जो दर्शक “हॉरर” का लेबल देखकर टिकट खरीदेंगे, उन्हें डर कम और उदासी ज़्यादा मिलेगी, और यह फ़र्क कुछ को खल सकता है। आख़िरी हिस्सा भी सबको संतुष्ट नहीं करेगा, क्योंकि शॉनब्रुन को जवाब देने से ज़्यादा सवाल खुले छोड़ने में दिलचस्पी है। मुझे यह रास्ता ईमानदार लगा, पर समझ आता है कि कुछ लोग खाली हाथ लौटेंगे।

विषय के स्तर पर फिल्म पहचान और प्रशंसक-संस्कृति के रिश्ते को टटोलती है। “द पिंक ओपेक” को ट्रांस अनुभव के रूपक की तरह पढ़ा गया है, और यह पढ़त फिल्म से मेल खाती है, क्योंकि ओवन और मैडी दोनों अपनी वास्तविकता और अपनी पहचान पर सवाल उठाते हैं। शॉनब्रुन इस पढ़त पर कोई मुहर नहीं लगाते। किरदारों की तरह दर्शक भी बेचैन रहता है, और फिल्म उसे उसी हाल में छोड़ देती है।

फिल्म का प्रीमियर 18 जनवरी 2024 को सनडांस फिल्म फेस्टिवल में हुआ। A24 ने इसे 3 मई को अमेरिका में सीमित सिनेमाघरों में उतारा, और 17 मई से यह कनाडा तथा पूरे अमेरिका में लगी। निर्माताओं में एम्मा स्टोन और डेव मैक्कैरी की कंपनी फ्रूट ट्री शामिल है। 40वें इंडिपेंडेंट स्पिरिट अवॉर्ड्स में फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फीचर समेत पाँच नामांकन मिले। यह शॉनब्रुन की “स्क्रीन ट्रिलॉजी” की दूसरी कड़ी है, जो We’re All Going to the World’s Fair (2021) के बाद आई और Teenage Sex and Death at Camp Miasma (2026) से पहले की है। उनके उपन्यास Public Access Afterworld से भी इसका विषयगत रिश्ता है।

फिल्म खत्म होने के बाद मेरे दिमाग़ में वही 1998 की रात अटकी रही, जब मैडी घर छोड़ने की बात कहती है और ओवन पीछे रह जाता है। मैडी का गायब होना, माँ की मौत और 2006 की सूनी रात, सब कुछ उसी एक रात से बँधा दिखता है।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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