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Mr. Car and the Knights Templar में अच्छा विचार है, पर रफ्तार, खतरा और दमदार नायक की कमी खलती है

एंटोनी निकोव्स्की की 2023 की पारिवारिक एडवेंचर फिल्म रोमांच और हास्य के बीच भटकती रहती है।
Martha O'Hara
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तोमाश, जिसे ‘Samochodzik’ यानी मिस्टर कार कहा जाता है, जाना-माना कला इतिहासकार और खज़ाने का शिकारी है। उसकी अनोखी कार ही उसके नाम का दूसरा हिस्सा है। Mr. Car and the Knights Templar में उसके हाथ टेम्पलर खज़ाने का सुराग लगता है। यह खज़ाना एक बड़ी ताक़त की कुंजी है, और वह ताक़त दुनिया में अच्छाई और बुराई का संतुलन बिगाड़ सकती है। फिर शुरू होती है वक़्त से और एक दुश्मन संगठन से होड़, जिसमें दाँव पर नाइट-संप्रदायों की विरासत है। तोमाश इस दौड़ में अकेला नहीं है। उसके साथ स्काउट हैं।

निर्देशक अंतोनी निकोव्स्की (Antoni Nykowski) की यह 2023 की फ़िल्म साहसिक, ड्रामा और पारिवारिक श्रेणी में आती है, और इसकी अवधि क़रीब एक घंटा पचास मिनट है। सामग्री जानी-पहचानी है: इतिहास की पहेली, रहस्यमय खज़ाना, एक दुश्मन और साथ देने वाली टोली। ऐसी सूची बनाना आसान है। मुश्किल यह है कि इन चीज़ों को एक कसी हुई कहानी में बाँधा जाए, जहाँ पहेली चुस्त हो और दर्शक के पास उसके पीछे भागने की ठोस वजह हो। मैंने फ़िल्म को इसी कसौटी पर देखा, और यहीं वह मुझे कमज़ोर लगी।

तोमाश की भूमिका में मातेउश यानीत्स्की (Mateusz Janicki) हैं, और पूरी फ़िल्म का बोझ उन्हीं पर है। सबसे बड़ी दिक़्क़त भी यहीं है। माता-पिता के लिए लिखी गई एक समीक्षा कहती है कि इस किरदार में वह आकर्षण नहीं, जो ऐसी कहानी के नायक में होना चाहिए। मुझे यह बात काफ़ी हद तक सही लगी। खज़ाने की खोज पर निकले आदमी से हम जिज्ञासा और थोड़ी शरारत की उम्मीद करते हैं। हम ऐसा कुछ चाहते हैं जो दर्शक से कहे कि चलो, इस आदमी के साथ चलते हैं। तोमाश मुझे अक्सर घटनाओं के साथ बहता हुआ दिखा, उन्हें आगे धकेलता हुआ नहीं। हमें बताया जाता है कि वह कला इतिहासकार है और नामी खोजी, पर यह बात देखने वाले को महसूस नहीं कराई जाती। उसकी विद्वत्ता और उसकी शोहरत संवादों में रह जाती है, स्क्रीन पर नहीं पहुँचती।

शीर्षक में ही उसकी अनोखी कार का ज़िक्र है, इसलिए उम्मीद बँधती है कि वह कहानी की धुरी बनेगी। मुझे वह उतनी केंद्रीय नहीं लगी। जो चीज़ किरदार को अलग पहचान दे सकती थी, वह नाम में तो है, पर कथानक को आगे बढ़ाने में उसकी भूमिका मुझे याद नहीं रही। शीर्षक जिस चीज़ का वादा करता है, फ़िल्म उसे पूरा करती नहीं दिखती।

साथी कलाकारों में सांद्रा ड्ज़िमाल्स्का (Sandra Drzymalska) अनका मोद्ज़ेलेव्स्का बनी हैं और मारिया देंबस्का (Maria Dębska) कारेन। उनके आसपास उपनामों वाले किरदारों की भीड़ है: Jacek Beler ‘Adios’ हैं, Anna Dymna ‘Łajma’, Olgierd Blecharz ‘Sokole Oko’, Kalina Kowalczuk ‘Wiewióra’ और Piotr Sega ‘Mentorek’। पीटरसन की भूमिका में Przemysław Bluszcz हैं और गिएरिम्स्का (Gierymska) की भूमिका में Ewa Błaszczyk। इतने जाने-पहचाने चेहरे और इतने उपनाम एक ही कहानी में हों, तो हर किरदार को अपनी पहचान गढ़ने की जगह कम मिलती है। दर्शक को बार-बार रुककर सोचना पड़ता है कि कौन किसके साथ है और क्यों। Anna Dymna और Ewa Błaszczyk जैसी अनुभवी अभिनेत्रियों के नाम देखकर उम्मीद बढ़ती है। पर इतनी भीड़ में उनके लिए कितनी जगह निकली, यह सवाल बना रहता है।

कथानक की उलझन इसी भीड़ से जुड़ी है। माता-पिता वाली उसी समीक्षा ने फ़िल्म को भ्रमित करने वाला कहा है, जिसकी कहानी और किरदार जटिल हैं। ‘Stream It Or Skip It’ की टिप्पणी और तीखी है। उसके मुताबिक़ फ़िल्म सत्तर के दशक के माहौल को भी ठीक से खड़ा नहीं कर पाती, और बिना ज़ोर और लगभग बिना सस्पेंस के घिसटती रहती है। मैं इस आकलन से सहमत हूँ। पीछा करने और सुराग जोड़ने वाली कहानी में तनाव धीरे-धीरे चढ़ना चाहिए, और हर सुराग के साथ दाँव थोड़ा ऊँचा होना चाहिए। मुझे यहाँ घटनाएँ लगभग एक-से वज़न के साथ आती-जाती दिखीं, इसलिए कोई मोड़ अलग से याद नहीं रहा। सत्तर के दशक की बात भी इसी से जुड़ती है। दौर का रंग और बनावट दर्शक को कहानी के भीतर खींचते हैं। वे कमज़ोर हों तो कहानी ज़मीन से कटी लगती है।

फ़िल्म की श्रेणी पर भी एक बात कहनी ज़रूरी है। इसे साहसिक, ड्रामा और पारिवारिक, तीनों खानों में रखा गया है, और तीनों को साधना आसान नहीं। साहसिक कथा को गति चाहिए, ड्रामा को किरदारों की भीतरी हलचल, और पारिवारिक फ़िल्म को ऐसी सहजता जिसमें बड़े और बच्चे दोनों बैठ सकें। मुझे लगा कि फ़िल्म तीनों के बीच खड़ी रह गई और किसी एक की ओर पूरी तरह नहीं झुकी। ड्रामा के लिए किरदारों की जो गहराई चाहिए थी, वह भीड़ में दब गई। साहसिक कथा की रफ़्तार ठहरी हुई लगी। पारिवारिक पहलू का सबसे अच्छा हिस्सा साथ चलती टोली में है।

कुछ बातें फिर भी काम करती हैं। कथा-सार के मुताबिक़ स्काउट मिस्टर कार के मददगार हैं, और पारिवारिक साहसिक कहानी के लिए यह ढाँचा सही दिशा में है। एक वयस्क खोजी की अकेली बहादुरी के बजाय पूरी टोली का साथ चलना बच्चों को कहानी में घुसने का रास्ता देता है। टेम्पलर विरासत की पृष्ठभूमि अपने आप में दिलचस्प है, और इतिहास की पहेली को बच्चों के सामने रखने की कोशिश भली है। खोज का मज़ा ही असली इनाम हो, ऐसी कहानी की संभावना फ़िल्म के विचार में मौजूद है। मेरी शिकायत यह है कि यह संभावना देखने में बहुत कम खुलती है।

असल कमी अमल में है। फ़िल्म चाहती है कि हम खज़ाने की ताक़त को गंभीरता से लें, लेकिन दुश्मन संगठन मेरे लिए इतना ठोस नहीं बना कि जीत-हार की फ़िक्र हो। जिसे वक़्त से होड़ कहा गया है, वह देखने में काफ़ी ठहरी हुई लगती है। ख़तरा महसूस न हो तो दुनिया के संतुलन के बिगड़ने की बात भी बस एक संवाद बनकर रह जाती है। न किरदारों को कुछ खोने का डर दिखता है, न दर्शक को। बच्चों की फ़िल्म हो तब भी जोखिम असली लगना चाहिए, वरना खोज की सारी भागदौड़ सैर जैसी लगने लगती है।

Mr. Car and the Knights Templar का आधार मज़ेदार है और उसके पीछे नेक नीयत दिखती है। लेकिन नायक फीका है, किरदार ज़रूरत से ज़्यादा हैं और चाल सुस्त है। बच्चों के साथ कुछ हल्का-फुल्का देखने बैठे परिवारों को यह शायद खलेगी नहीं। जिन्हें कसी हुई पहेली और सचमुच का रोमांच चाहिए, उन्हें यह फ़िल्म खिंची हुई लगेगी।

कलाकार

तस्वीरें: The Movie Database (TMDB)

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