कला

Eugène Delacroix, वह चित्रकार जिसकी पेंटिंग फ्रांस ने गोदाम में छिपाई और फिर उसे नोट पर छापा

Penelope H. Fritz
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Eugène Delacroix
Eugène Delacroix
Photo: Eugène Delacroix / Public domain, via Wikimedia Commons
जन्म26 अप्रैल 1798
Saint-Maurice
निधन13 अगस्त 1863 (65)
पेशाचित्रकार
पुरस्कारसम्मान की सेना के शूरवीर · सम्मान की सेना के अधिकारी · सम्मान की सेना के कमांडर

कुछ महीनों तक फ्रांसीसी सरकार के पास अपनी ही क्रांति की सबसे मशहूर तस्वीर थी, लेकिन उसे दिखाने की हिम्मत नहीं थी। लुई-फिलिप की सरकार ने Liberty Leading the People को 3,000 फ़्राँक में खरीदा, कुछ समय के लिए प्रदर्शित किया और फिर नज़रों से दूर रख दिया। उसे डर था कि बैरिकेड पर चढ़ती, फ़्रीजियाई टोपी पहने उघड़ी छाती वाली स्त्री कहीं अगले दंगे को हवा न दे दे। जून विद्रोह के बाद कैनवस उसके चित्रकार को लौटा दिया गया। डेढ़ सदी बाद फ्रांस ने उसी चित्रकार का चेहरा 100-फ़्राँक के नोट पर छापा।

यूजीन डेलाक्रुआ (Eugène Delacroix) के जीवन की पूरी कहानी मानो इसी में समाई है। वह फ्रांसीसी रोमांटिकतावाद के अग्रणी चित्रकार थे—ऐसे रंग-साधक, जिन्हें सेज़ान, वान गॉग, सिग्नाक और पिकासो ने अपना पूर्वज माना। फिर भी उनके करियर के ज़्यादातर हिस्से में कला-जगत के आधिकारिक हलकों ने उन्हें एक ऐसी समस्या समझा, जिसे काबू में रखना हो। Académie des Beaux-Arts ने उन्हें सात बार ठुकराया। आलोचक उनकी पेंटिंगों को भूल बताते थे। इसके बावजूद सरकार उन्हें खरीदती रही।

मंत्री के बेटे और तलैरां से जुड़ी अफ़वाह

फर्दिनां-विक्तोर-यूजीन डेलाक्रुआ का जन्म 26 अप्रैल 1798 को पेरिस के ठीक बाहर शारांतोँ-सैं-मौरिस में हुआ था। उनकी माँ, विक्त्वार ओबेन, लुई पंद्रहवें के कैबिनेट-निर्माता झाँ-फ्रांस्वा ओबेन की बेटी थीं। उनके कानूनी पिता शार्ल-फ्रांस्वा डेलाक्रुआ ने डिरेक्टरी के शासनकाल में विदेश मंत्री के रूप में काम किया था और बाद में प्रीफेक्ट बने। मंत्रालय में उनके उत्तराधिकारी शार्ल-मौरिस द तलैरां परिवार के मित्र थे। तलैरां ही चित्रकार के असली पिता थे—यह अफ़वाह तब से डेलाक्रुआ के साथ जुड़ी रही है। कुछ चिकित्सकीय कारणों से संदेह था कि शार्ल-फ्रांस्वा उस समय संतान पैदा कर सकते थे या नहीं, और कहा जाता था कि वयस्क यूजीन के चेहरे और स्वभाव में तलैरां की झलक थी। इस बारे में कभी कोई बात साबित नहीं हुई।

उनके पिता की मृत्यु 1805 में और माँ की 1814 में हो गई। पीछे रह गई शास्त्रीय शिक्षा और बहुत कम धनराशि। उन्होंने पेरिस के Lycée Louis-le-Grand और रूआँ के lycée में पढ़ाई की, जहाँ उन्हें चित्रांकन के लिए पुरस्कार मिले। 1815 में उन्होंने पियेर-नार्सिस गे़रां के स्टूडियो में प्रवेश लिया। गे़रां ने जैक्स-लुई डेविड की नवशास्त्रीय शैली में प्रशिक्षण पाया था। यहीं उनकी मुलाक़ात उनसे सात साल बड़े थियोडोर जेरिको से हुई, जो पहले ही उस विराट महत्वाकांक्षा के पैमाने पर काम कर रहे थे, जिससे The Raft of the Medusa बनी। डेलाक्रुआ ने उस बेड़े पर मौजूद एक आकृति के लिए मॉडलिंग की। जेरिको का प्रभाव उन पर तत्काल पड़ा और जीवन भर बना रहा।

1822: सलोन में पहली पेंटिंग, जिसे सरकार ने फिर भी खरीद लिया

यूजीन डेलाक्रुआ की The Death of Sardanapalus
यूजीन डेलाक्रुआ, The Death of Sardanapalus (1827), Musée du Louvre, पेरिस

डेलाक्रुआ ने सलोन में अपनी पहली पेंटिंग के लिए विषय का चुनाव देर से, जनवरी 1822 के मध्य में किया और अप्रैल तक उसे पूरा करने के लिए तेज़ी से काम किया। The Barque of Dante, जिसे Dante and Virgil in Hell के नाम से भी जाना जाता है, में दो कवि Inferno के आठवें सर्ग में स्टिक्स नदी पार करते दिखते हैं और शापित आत्माएँ नाव को नोच रही हैं। रंग जल्दी सुखाने के लिए उन्होंने ऐसे वार्निश इस्तेमाल किए, जिनसे बाद में कैनवस को नुकसान पहुँचा। आलोचक बुरी तरह बँटे हुए थे, लेकिन सरकार ने पेंटिंग को 2,000 फ़्राँक में खरीद लिया—उनके माँगे 2,400 फ़्राँक से कुछ कम में—और उसे Musée du Luxembourg भेज दिया। उनके पूरे करियर का ढर्रा इसी पहले सौदे में तय हो गया था: ज़ोरदार विरोध और चुपचाप सरकारी खरीद।

दो साल बाद उन्होंने और आगे बढ़कर काम किया। 1824 के सलोन में दिखाई गई Scenes from the Massacres at Chios का विषय 1822 में खियोस द्वीप पर ओटोमन सैनिकों द्वारा यूनानी नागरिकों की हत्या और उन्हें ग़ुलाम बनाना था—एक ताज़ा अत्याचार, जिसकी ख़बरें यूरोप के अख़बारों में छप रही थीं। डेलाक्रुआ ने पीड़ितों को किसी वीर मुद्रा में नहीं दिखाया; वे थके-हारे और दम तोड़ते हुए अग्रभूमि में बैठे हैं, जबकि एक घुड़सवार एक स्त्री को घसीटकर ले जा रहा है। मृत माँ के स्तन तक पहुँचने की कोशिश करते शिशु का चित्रण पेंटिंग के लिए अनुचित कहकर निंदा का शिकार हुआ। उसी सलोन में जॉन कॉन्स्टेबल की कृतियाँ भी प्रदर्शित थीं। बताया जाता है कि उन्हें देखने के बाद डेलाक्रुआ ने अपने कैनवस के आकाश और दूर के भू-दृश्य को अधिक मुक्त, टूटे-फूटे ब्रश-स्ट्रोक से दोबारा बनाया। पेंटिंग को द्वितीय श्रेणी का पदक मिला और सरकार ने उसके लिए 6,000 फ़्राँक दिए।

1825 में उन्होंने कई महीने इंग्लैंड में बिताए। वहाँ वे थॉमस लॉरेंस और अपने मित्र रिचर्ड पार्क्स बोनिंगटन से मिले और शेक्सपियर का नाटक देखने थिएटर गए। अंग्रेज़ी साहित्य उनके लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बन गया: बायरन, वॉल्टर स्कॉट और शेक्सपियर से उन्हें जीवन भर के लिए विषय मिलते रहे। उन्होंने गोएथे के Faust के लिए पत्थर पर छपाई की मशहूर चित्र-श्रृंखला भी बनाई, जो 1828 में प्रकाशित हुई।

The Death of Sardanapalus और ‘भूल’ का आरोप

1827–28 के सलोन में डेलाक्रुआ ने अपना सबसे उग्र कैनवस प्रदर्शित किया। बायरन के नाटक पर आधारित The Death of Sardanapalus में घेराबंदी में फँसा असीरियाई राजा एक विशाल लाल पलंग पर लेटा है। वह निर्विकार भाव से अपने पहरेदारों को अपनी उपपत्नियों, सेवकों और घोड़ों को मारते देख रहा है, ताकि उसकी कोई भी चीज़ उसके बाद बची न रहे। रचना में देह, जवाहरात और मांस का ऐसा बवंडर है कि नज़र टिकाने के लिए कोई स्थिर बिंदु नहीं मिलता। आलोचक एतियेन-झाँ देलेक्लूज़ ने Journal des débats में लिखा कि आँख रेखाओं और रंगों की उलझन को सुलझा नहीं सकती, और इस चित्र को “चित्रकार की भूल” कहा। आलोचना लगभग सर्वसम्मत थी। डेलाक्रुआ ने वर्षों तक कैनवस अपने स्टूडियो में रखा, फिर 1845 में उसे अमेरिकी संग्रहकर्ता जॉन विल्सन को 6,000 फ़्राँक में बेच दिया। यह 1921 में ही लौवर पहुँचा।

1830: बैरिकेड पर स्वतंत्रता

यूजीन डेलाक्रुआ की Liberty Leading the People
यूजीन डेलाक्रुआ, Liberty Leading the People (1830), Musée du Louvre, पेरिस

27–29 जुलाई 1830 की जुलाई क्रांति—वे “तीन गौरवशाली दिन”, जिनमें चार्ल्स दशम को सत्ता से हटाया गया—ने डेलाक्रुआ को उनके जीवन का विषय दिया। वे बैरिकेड पर नहीं लड़े, लेकिन उन्होंने अपने भाई को लिखा कि अगर उन्होंने अपने देश के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, तो कम-से-कम उसके लिए चित्र तो बनाएँगे। Liberty Leading the People में तिरंगा थामे, उघड़ी छाती वाली एक प्रतीकात्मक स्त्री असली पेरिसवासियों के बीच दिखाई देती है: तलवार लिए एक मज़दूर, बंदूक थामे ऊँची टोपी पहना एक आदमी, दोनों हाथों में पिस्तौल लिए एक सड़क का लड़का और अग्रभूमि में मृत लोग। प्रतीक और यथार्थ-रिपोर्ताज के इस मेल ने आलोचकों को बेचैन कर दिया; कुछ को स्वतंत्रता की आकृति अश्लील लगी। पेंटिंग 1831 के सलोन में दिखाई गई और उसी साल डेलाक्रुआ को Légion d’honneur का शूरवीर बनाया गया।

इसके बाद क्या हुआ, यही इस लेख की शुरुआत में बताई गई कहानी है। सरकार ने पेंटिंग खरीद तो ली, लेकिन नए शासन को उसके संदेश से डर था, इसलिए उसे रखवा दिया। 1848 में उसे कुछ समय के लिए फिर प्रदर्शित किया गया और 1874 में ही वह लौवर की स्थायी प्रदर्शनी का हिस्सा बनी। तब से फ्रांसीसी गणराज्य की कल्पना करते ही ज़्यादातर लोगों के मन में यही तस्वीर आती है। इसमें दिखाई गई स्वतंत्रता, मारीआन की शुरुआती छवियों में सबसे मशहूर बनी; 1978 से जारी 100-फ़्राँक के नोट पर इस पेंटिंग की नक्काशी छपी और 2008 में कोल्डप्ले ने इसे अपने Viva la Vida or Death and All His Friends एल्बम के कवर के रूप में इस्तेमाल किया।

सितंबर 2023 से अप्रैल 2024 के बीच लौवर ने पेंटिंग की बहाली वहीं की। संरक्षकों ने पीले पड़ चुके वार्निश और गंदगी की आठ परतें हटाईं, जिससे चमकीले सफ़ेद बादल और धुआँ फिर उभर आए। उन्हें यह भी पता चला कि स्वतंत्रता की पोशाक, जिसे लंबे समय से पीला माना जाता था, असल में हल्की धूसर थी और उस पर सुनहरी झलक थी। कुछ महीने बाद, पेरिस 2024 ओलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में कलाकारों ने कॉन्सियर्जरी में इस पेंटिंग को जीवंत झाँकी के रूप में फिर से रचा।

मोरक्को में सात महीने

यूजीन डेलाक्रुआ की Convulsionists of Tangier
यूजीन डेलाक्रुआ, Convulsionists of Tangier (1838), Minneapolis Institute of Art

1832 में डेलाक्रुआ उस राजनयिक मिशन में शामिल हुए, जिसे लुई-फिलिप ने चार्ल्स-एडगर, कोंत द मोर्ने के नेतृत्व में मोरक्को के सुल्तान मौले अब्द अर-रहमान के पास भेजा था। फ्रांस ने अभी-अभी अल्जीरिया पर विजय अभियान शुरू किया था और मोर्ने का काम सुल्तान तथा अंग्रेज़ों को आश्वस्त करना था। यह मिशन क़रीब सात महीने चला और तंगेर तथा मेकनेस के साथ-साथ आंदालूसिया और अल्जीयर्स से होकर गुज़रा। डेलाक्रुआ ने लोगों, घोड़ों, पोशाकों, आँगनों और रोशनी के चित्रों तथा जलरंगों से अपनी नोटबुकें भर दीं। उत्तर अफ्रीका की यह उनकी एकमात्र यात्रा थी, लेकिन अगले तीस वर्षों तक उन्हें यहीं से विषय मिलते रहे: वहाँ जो कुछ देखा, उसके आधार पर उन्होंने अंततः सौ से अधिक पेंटिंग और ड्रॉइंग बनाईं।

इनमें सबसे मशहूर Women of Algiers in their Apartment (1834) है। यह तब बनी, जब उन्हें अल्जीयर्स के एक निजी घर में जाने की अनुमति मिली—एक यूरोपीय पुरुष के लिए ऐसा कर पाना लगभग असंभव था। उन्होंने 1849 में इसका दूसरा संस्करण बनाया, जो अब मॉंपेलिये में है। इसके बाद The Fanatics of Tangier (1838), Jewish Wedding in Morocco (1839) और The Sultan of Morocco and his Entourage आईं, जिसे 1845 के सलोन में दिखाया गया था और जो अब टूलूज़ में है। घोड़ों पर सवार लड़ाकों और शेर के शिकार के दृश्य भी इसी अनुभव से निकले; 1850 के दशक के आख़िर तक वे बार-बार ऐसे चित्र बनाते रहे। इन कृतियों ने उन्हें फ्रांसीसी प्राच्यवाद का एक केंद्रीय कलाकार बना दिया, हालाँकि उनके उत्तर अफ्रीका में कल्पना का हरम कम और गरिमा के साथ देखे गए लोग अधिक हैं।

यूजीन डेलाक्रुआ की Collision of Moorish Horsemen
यूजीन डेलाक्रुआ, Collision of Moorish Horsemen (1843–44), Walters Art Museum, बाल्टीमोर

दीवारें, छतें और एक चैपल

1833 से डेलाक्रुआ को सरकारी इमारतों के लिए लगातार काम मिलने लगा, जिसने उनके शेष कामकाजी जीवन का बड़ा हिस्सा घेर लिया। 1833 से 1837 के बीच उन्होंने Palais Bourbon के Salon du Roi को सजाया। यही भवन Chamber of Deputies का ठिकाना था। इसके बाद उन्होंने क़रीब एक दशक Palais Bourbon और Palais du Luxembourg—दोनों की लाइब्रेरियों पर काम किया। Saint-Denis-du-Saint-Sacrement चर्च के लिए उन्होंने एक बड़ी Pietà बनाई और 1848 से 1850 के बीच लौवर की Galerie d’Apollon की केंद्रीय छत पर Apollo Slaying the Serpent Python चित्रित किया। Hôtel de Ville के Salon de la Paix के लिए बनाई गई उनकी सजावट 1871 में इमारत में लगी आग में नष्ट हो गई।

उनका आख़िरी बड़ा प्रोजेक्ट Saint-Sulpice चर्च का Chapelle des Saints-Anges था। उसके नज़दीक रहने के लिए वे 1857 में 6 rue de Furstenberg स्थित ऐसे अपार्टमेंट में चले गए, जहाँ बगीचे में स्टूडियो था। वहाँ उन्होंने Jacob Wrestling with the Angel, Heliodorus Driven from the Temple और Saint Michael Defeating the Demon बनाए। इनका काम 1861 में पूरा हुआ, जब उनकी सेहत ख़राब थी। वे नियमित रूप से धर्म का पालन नहीं करते थे, फिर भी उन्होंने सैकड़ों धार्मिक कृतियाँ बनाईं। Saint-Sulpice के भित्तिचित्रों को अपने समय की सर्वश्रेष्ठ दीवार-पेंटिंगों में गिना गया है।

शोपाँ, जर्नल और आंग्र से होड़

सलोन के बाहर डेलाक्रुआ गहरी दोस्तियाँ निभाने वाले इंसान थे। वे फ़्रेदेरिक शोपाँ और जॉर्ज सैंड के क़रीबी थे और 1838 में उन्होंने दोनों का एक संयुक्त चित्र बनाया। चित्रकार की मृत्यु के बाद कैनवस के दो हिस्से कर दिए गए: शोपाँ का हिस्सा अब लौवर में है और सैंड का कोपेनहेगन के पास Ordrupgaard संग्रहालय में। संगीत उनके लिए लगभग हर चीज़ से अधिक मायने रखता था; 1855 में उन्होंने लिखा कि संगीत से पैदा होने वाले भाव की तुलना किसी और चीज़ से नहीं की जा सकती।

वे लेखक भी थे। उनका Journal 1822 में शुरू हुआ, 1824 में रुक गया और 1847 में फिर शुरू होकर उनकी मृत्यु तक चलता रहा। उन्नीसवीं सदी की कला से जुड़े अहम दस्तावेज़ों में इसकी गिनती होती है; इसमें रंग, तकनीक, कविता, संगीत और पेरिस के सामाजिक जीवन पर टिप्पणियाँ भरी हैं। यह पहली बार 1893 में प्रकाशित हुआ और 2009 में मिशेल हन्नूश ने इसका संपूर्ण आलोचनात्मक संस्करण तैयार किया। नए माध्यमों में भी उनकी दिलचस्पी थी: 1851 में वे Société héliographique के संस्थापक सदस्यों में थे और 1854 में उन्होंने फ़ोटोग्राफ़र यूजीन दुरियू से नग्न मॉडलों के अध्ययन-चित्र बनवाए, जिनके आधार पर उन्होंने बाद में ड्रॉइंग कीं।

अपने जीवन के अधिकांश समय में उनके प्रतिद्वंद्वी झाँ-ऑगुस्त-डोमिनिक आंग्र रहे। आंग्र रेखा, परिष्कृत चित्रण और शास्त्रीय परंपरा के पक्षधर थे, जबकि डेलाक्रुआ रंग, गति और रूबेन्स की ओर झुकते थे। 1855 की Exposition Universelle में दोनों की कृतियाँ आमने-सामने थीं: आंग्र ने चालीस पेंटिंग और डेलाक्रुआ ने पैंतीस—अपने श्रेष्ठतम कैनवस की एक पुनरावलोकन प्रदर्शनी—दिखाईं। डेलाक्रुआ को प्रदर्शनी का सर्वोच्च सम्मान-पदक मिला और Légion d’honneur का कमांडर बनाया गया। 1846 में उन्हें अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया जा चुका था। आंग्र जिस Académie des Beaux-Arts में उनके विरोधी थे, उसने सात असफल कोशिशों के बाद आखिरकार 10 जनवरी 1857 को पॉल दलेरोश की खाली हुई जगह पर उन्हें चुन लिया। वे 1851 से 1861 तक पेरिस की नगर परिषद के सदस्य भी रहे।

यूजीन डेलाक्रुआ की Rider Attacked by a Jaguar
यूजीन डेलाक्रुआ, Rider Attacked by a Jaguar (1855), National Gallery Prague

वसीयत में अपने ही चेहरे पर रोक

1862–63 की सर्दियाँ उनके लिए कठिन रहीं। उनका गला लंबे समय से कमज़ोर था और वसंत के दौरान बीमारी बढ़ती गई। जुलाई के मध्य तक डॉक्टर ने उन्हें बता दिया कि अब कुछ नहीं किया जा सकता। डेलाक्रुआ ने वसीयत लिखी, अपने हर मित्र के लिए कुछ न कुछ छोड़ा और कई वर्षों से उनकी देखभाल कर रही गृह-प्रबंधक जेनी ले गियू को गुज़ारे लायक़ धन दिया। उन्होंने एक असामान्य शर्त भी जोड़ी: उनकी मृत्यु के बाद उनके चेहरे की कोई छवि न बनाई जाए—न मृत्यु-मुखौटा, न चित्र और न फ़ोटोग्राफ़—और इस पर उन्होंने “स्पष्ट रूप से” पाबंदी लगाई। 13 अगस्त 1863 की शाम 65 वर्ष की उम्र में rue de Furstenberg के अपार्टमेंट में, जेनी के पास रहते हुए, उनका निधन हो गया। उन्हें Père-Lachaise कब्रिस्तान में दफ़नाया गया। उसी साल शार्ल बोदलेर ने The Life and Work of Eugène Delacroix प्रकाशित की। बोदलेर 1840 के दशक से सलोन पर अपनी समीक्षाओं में उनका बचाव करते आए थे।

आधुनिक चित्रकारों का अपना कलाकार

यूजीन डेलाक्रुआ की Women of Algiers in their Apartment
यूजीन डेलाक्रुआ, Women of Algiers in their Apartment (1834), Musée du Louvre, पेरिस

जिस कलाकार का विरोध Académie ने किया था, उसे उनके बाद आने वाले चित्रकारों ने लगभग तुरंत अपना लिया। 1864 में हेनरी फ़ैंटिन-लातूर ने Homage to Delacroix प्रदर्शित की—एक सामूहिक चित्र, जिसमें माने, व्हिस्लर, बोदलेर और दूसरे लोग दिवंगत चित्रकार के चित्र के चारों ओर खड़े हैं। रेनुआर और माने ने उनके कैनवस की नकल की; देगाँ ने लुई-ऑगुस्त श्विटर का उनका चित्र खरीदा। सेज़ान ने उनके फूलों और Medea की नकल की, Apotheosis of Delacroix बनाई और Women of Algiers के बारे में कहा: “हम सब उसी डेलाक्रुआ में हैं।” विन्सेंट वान गॉग ने 1889 में Pietà का अपना संस्करण बनाया। पॉल सिग्नाक ने From Eugène Delacroix to Neo-Impressionism नाम की किताब लिखी, जिसमें अपनी पीढ़ी के रंग-सिद्धांत की जड़ें डेलाक्रुआ तक खोजीं। 1950 के दशक में पिकासो ने Women of Algiers पर आधारित विविध रूपों की एक लंबी श्रृंखला बनाई।

rue de Furstenberg का वह अपार्टमेंट और स्टूडियो, जहाँ उन्होंने अपने आख़िरी साल बिताए, मौरिस डेनिस सहित प्रशंसकों के एक समूह ने बचा लिया और 1932 में उसे संग्रहालय के रूप में खोल दिया गया। आज यह Musée national Eugène-Delacroix है, जो लौवर से जुड़ा है और Saint-Sulpice के चैपल से थोड़ी ही दूरी पर है। उनकी ज़्यादातर बड़ी पेंटिंगें स्वयं लौवर में हैं। वहाँ The Barque of Dante, The Massacres at Chios, The Death of Sardanapalus, Liberty Leading the People और Women of Algiers एक-दूसरे से कुछ ही कमरों की दूरी पर टँगी हैं।

जिस चित्रकार की कृतियाँ कभी भंडारघर में छिपा दी गई थीं और जिसकी सलोन में भेजी पेंटिंगों को भूल कहकर ख़ारिज किया जाता था, उसका बाद का जीवन असाधारण है। डेलाक्रुआ नहीं चाहते थे कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी कोई छवि बनाई जाए। फ्रांस ने उनकी इच्छा अनसुनी की, उनका चित्र अपनी मुद्रा पर छापा और उनकी स्वतंत्रता की आकृति को गणराज्य का चेहरा बना दिया।

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