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चाइना ओपन में बार्टुनकोवा से हारीं सबालेंका: वापसी करने की उनकी ताकत अब काम नहीं आ रही

Jack T. Taylor
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आर्यना सबालेंका (Aryna Sabalenka) ने दबाव का जवाब और ज्यादा दबाव से देने के दम पर अपना करियर बनाया है। उनकी सर्व और भी दमदार हो जाती है, फोरहैंड की गूंज और तेज़ सुनाई देती है और नेट के पार खड़ी खिलाड़ी आखिरकार घबरा जाती है। बीजिंग में कोई नहीं घबराया। मैच के बाद सबालेंका ने इसकी जो वजह बताई, वह तार सेवाओं में छाए “उलटफेर” के शोर से कहीं ज्यादा सटीक और ईमानदार थी: वह गेंद को वापस नहीं कर पा रही थीं।

चेक गणराज्य की युवा खिलाड़ी निकोला बार्तुन्कोवा (Nikola Bartunkova) पहली बार उनके सामने थीं। उन्होंने सबालेंका के बनाए हर ब्रेक पॉइंट से अपनी सर्व के दम पर राह निकाली और चाइना ओपन के तीसरे दौर का मुकाबला सीधे सेटों में जीत लिया। ज्यादातर कवरेज में इस हार को एलेना रयबाकिना की शुरुआती विदाई के साथ जोड़कर टूर्नामेंट की शीर्ष वरीय खिलाड़ियों के लिए दोहरे झटके के तौर पर पेश किया गया। यह व्याख्या सुविधाजनक है, लेकिन यह उस वजह को अनदेखा करती है जिसके चलते यह हार सबालेंका के लिए किसी एक मैच के स्कोर से कहीं ज्यादा चिंता की बात होनी चाहिए।

Tennis365 के मुताबिक, सबालेंका ने कहा, “वह बहुत प्रतिभाशाली हैं और कोर्ट पर अच्छी तरह मूव करती हैं। उनकी सर्व भी अच्छी है, इसलिए उनके खिलाफ मिले मौकों को भुनाना जरूरी होता है। उनकी सर्व वाकई दमदार हो सकती है और छाया हो या धूप, वहां से रिटर्न करना मुश्किल होता है। आज मैं इसमें अच्छी नहीं थी।”

यह किसी खिलाड़ी का एक शॉट का आकलन है, संकट का संकेत नहीं—और मैच के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। पहले सेट के एक ही गेम में उन्हें पांच ब्रेक पॉइंट मिले, लेकिन वह एक भी नहीं भुना सकीं। दूसरे सेट में उन्हें एक भी ब्रेक पॉइंट नहीं मिला। बार्तुन्कोवा ने पांचों बचाए, चार ऐस लगाए और मिले आठ मौकों में से तीन बार सबालेंका की सर्व तोड़ी। Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे सेट में सबालेंका ने अपना रैकेट फेंक दिया—उनका शरीर वही कह रहा था, जिसकी पुष्टि बाद में स्कोरशीट करने वाली थी।

WTA के अपने मैच नोट्स में दर्ज ज्यादा चिंताजनक आंकड़ा आगे मिलता है। पहला सेट गंवाने के बाद सबालेंका लगातार छह मैच हार चुकी हैं और इस सीज़न में ऐसी स्थिति से उनका रिकॉर्ड 3-7 है। जिस खिलाड़ी का पूरा खेल पहल अपने हाथ में लेने पर टिका हो, उसके लिए यही आंकड़ा खास तौर पर ध्यान देने लायक है। शुरुआती सेट हाथ से निकल जाए तो अब मैच पलटने वाला जवाब नहीं आता।

इस सीज़न का बाकी हिस्सा भी उनकी आवाज़ में सुनाई दे रही तल्खी की वजह बताता है। मार्च के आखिर से पहले सबालेंका ब्रिस्बेन, इंडियन वेल्स और मियामी जीत चुकी थीं। उसके बाद से नौ टूर्नामेंट बीत गए, लेकिन कोई खिताब नहीं मिला। वह ग्रैंड स्लैम के दो फाइनल में पहुंचीं और दोनों में रयबाकिना से हार गईं—पहले ऑस्ट्रेलियन ओपन में और फिर US Open में। न्यूयॉर्क के बाद दुनिया की नंबर 1 रैंकिंग भी रयबाकिना के पास चली गई। Roland Garros में डायना श्नाइडर (Diana Shnaider) के हाथों क्वार्टर फाइनल की हार और Wimbledon में नाओमी ओसाका (Naomi Osaka) से चौथे दौर में मिली शिकस्त, खिताब के बिना बीते इस साल की बाकी तस्वीर पूरी करती हैं।

इनमें से किसी बात से बार्तुन्कोवा की उपलब्धि कम नहीं होती। प्राग की 20 वर्षीय खिलाड़ी 26वीं वरीयता प्राप्त थीं—वह क्वालिफायर नहीं, जैसा कुछ सुर्खियों में बताया गया—और मार्च में शीर्ष 100 में जगह बनाने के बाद करियर की सर्वश्रेष्ठ 34वीं रैंकिंग तक पहुंचीं। ऑस्ट्रेलियन ओपन में बेलिंडा बेनचिच (Belinda Bencic) को हराने के बाद यह उनके करियर की दूसरी शीर्ष-10 जीत थी। मुकाबला एक घंटे 35 मिनट चला। WTA से उन्होंने कहा, “यह मेरे करियर की सबसे बड़ी जीत है।” मैच का उनका अपना सार इससे भी सीधा था: “मैंने खुद पर ध्यान दिया और शांत रहने की कोशिश की।” अब अंतिम 16 में उनका सामना ऑस्ट्रिया की सिंजा क्राउस (Sinja Kraus) से होगा।

बीजिंग कभी सबालेंका के लिए अच्छा मैदान नहीं रहा। मुख्य ड्रॉ में पांच बार खेलने के बावजूद वह सेमीफाइनल तक नहीं पहुंची हैं; 2018, 2023 और 2024 में उनका सफर क्वार्टर फाइनल में थमा। लिहाजा, नतीजे की कुछ वजह आयोजन स्थल भी है। लेकिन रिटर्न गेम और गायब हो चुकी वापसी को दुरुस्त करना उनकी अपनी जिम्मेदारी है।

आगे का कैलेंडर उन्हें कोशिश करने के लिए सही जगह देता है। WTA 1000 का वुहान टूर्नामेंट 12 अक्टूबर से शुरू होगा। यह सबालेंका का टूर्नामेंट है—उस तरह, जिस तरह बीजिंग कभी नहीं रहा: यहां उनके तीन खिताब हैं, 2018, 2019 और 2024 में, और रिकॉर्ड 20-1 का है। इकलौती हार पिछले साल सेमीफाइनल में जेसिका पेगुला (Jessica Pegula) के खिलाफ आई थी। इस बार वहां रयबाकिना नई नंबर 1 खिलाड़ी के तौर पर पहुंचेंगी, जबकि कोको गॉफ (Coco Gauff) मौजूदा चैंपियन हैं।

सबालेंका उस ड्रॉ में उतरेंगी, जहां उन्हें शायद ही कभी किसी मुश्किल से वापसी करनी पड़ी हो। अगर वहां वह पहला सेट गंवाती हैं और फिर भी मैच का रुख नहीं पलट पातीं, तो बीजिंग महज एक खराब दोपहर नहीं लगेगा—वह उनके खेल का नया रूप नजर आने लगेगा।

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